क्या दावोस सम्मेलन में वैश्विक समाज के सामने झारखंड की मेगालिथिक विरासत प्रस्तुत की जाएगी?

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क्या दावोस सम्मेलन में वैश्विक समाज के सामने झारखंड की मेगालिथिक विरासत प्रस्तुत की जाएगी?

सारांश

झारखंड की प्राचीन मेगालिथिक विरासत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की तैयारी कर रही है। दावोस सम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का प्रतिनिधिमंडल महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करेगा। यह दौरा झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

Key Takeaways

  • झारखंड की मेगालिथिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास।
  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल का दावोस दौरा।
  • वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर का प्रस्तुतीकरण।
  • इंटरनेशनल सत्रों में निवेश और विकास पर चर्चा।
  • यूनाइटेड किंगडम में कार्यक्रमों में भागीदारी।

रांची, १२ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड की हजारों वर्ष पुरानी मेगालिथिक (वृहत पाषाण) संस्कृति अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार का प्रतिनिधिमंडल इस महीने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाग लेगा और इसके बाद यूनाइटेड किंगडम की यात्रा करेगा। प्रतिनिधिमंडल राज्य की प्राचीन पाषाण संरचनाओं, गुफा चित्रों और दुर्लभ भू-दृश्यों से संबंधित दस्तावेज अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

सरकार का उद्देश्य इन मेगालिथिक स्थलों को वैश्विक धरोहर के रूप में पहचान और संरक्षण दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाना है। झारखंड सरकार पहली बार वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेने जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल १८ जनवरी को झारखंड से रवाना होकर दावोस पहुंचेगा और २६ जनवरी तक अंतरराष्ट्रीय दौरे का हिस्सा रहेगा।

दावोस के बाद, प्रतिनिधिमंडल यूनाइटेड किंगडम के लंदन और ऑक्सफोर्ड का दौरा करेगा। राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दावोस में झारखंड 'प्रकृति के साथ सामंजस्य और विकास' की अवधारणा के साथ खुद को प्रस्तुत करेगा। विभिन्न सत्रों में प्रतिनिधिमंडल निवेश, खनिज संसाधन, औद्योगिक ढांचा, ऊर्जा संक्रमण, पर्यटन और सतत विकास जैसे विषयों पर संवाद करेगा। साथ ही, झारखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को वैश्विक समुदाय के सामने लाया जाएगा।

झारखंड के सिंहभूम, हजारीबाग और आसपास के क्षेत्रों में फैली मेगालिथिक संरचनाएं न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती हैं, बल्कि सूर्य की गति, दिन-रात की अवधि और खगोलीय घटनाओं से भी जुड़ी मानी जाती हैं। हजारीबाग के पकरी बरवाडीह क्षेत्र में मौजूद महापाषाण संरचनाओं की तुलना यूनाइटेड किंगडम के स्टोनहेंज जैसे प्रसिद्ध स्थलों से की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ये स्थल मानव सभ्यता की उस साझा समझ को दर्शाते हैं, जिसमें समय, प्रकृति और ब्रह्मांड को पत्थरों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया। यूके दौरे के दौरान मुख्यमंत्री लंदन और ऑक्सफोर्ड में निवेश और नीति सहयोग से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे। वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ब्लावाटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में विशेष व्याख्यान और संवाद सत्र को भी संबोधित करेंगे।

सरकार का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय दौरा झारखंड की आर्थिक संभावनाओं के साथ-साथ उसकी प्राचीन मेगालिथिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

Point of View

यह स्पष्ट है कि झारखंड की मेगालिथिक विरासत न केवल हमारे इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह राज्य की सांस्कृतिक और आर्थिक संभावनाओं को भी उजागर करती है। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भागीदारी से झारखंड को वैश्विक पहचान मिलेगी, जो हमारे देश की विविधता और समृद्धि को दर्शाती है।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

झारखंड की मेगालिथिक विरासत क्या है?
झारखंड की मेगालिथिक विरासत प्राचीन पाषाण संरचनाओं, गुफा चित्रों और अन्य ऐतिहासिक स्थलों का एक समूह है, जिसकी आयु हजारों वर्ष पुरानी है।
दावोस सम्मेलन में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल कब जाएगा?
झारखंड का प्रतिनिधिमंडल 18 जनवरी को दावोस के लिए रवाना होगा और 26 जनवरी तक वहां रहेगा।
इस दौरे का उद्देश्य क्या है?
इस दौरे का उद्देश्य झारखंड की मेगालिथिक विरासत को वैश्विक समुदाय के सामने प्रस्तुत करना और इसे वैश्विक धरोहर के रूप में पहचान दिलाना है।
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