जम्मू-कश्मीर: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में नशा-विरोधी मार्च का नेतृत्व किया, नार्को-आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' का संकल्प
सारांश
Key Takeaways
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार, 4 मई 2025 को श्रीनगर में एक व्यापक नशा-विरोधी मार्च का नेतृत्व किया और स्पष्ट किया कि प्रशासन नशीले पदार्थों की तस्करी तथा नार्को-आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर अडिग है। उन्होंने घोषणा की कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक जम्मू-कश्मीर में नशा बेचने या तस्करी करने वाला एक भी व्यक्ति मौजूद है।
अभियान का उद्देश्य और दायरा
उपराज्यपाल सिन्हा ने श्रीनगर में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और नार्को-आतंकवाद के खिलाफ इस बड़े अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि इसका मकसद नशे के फैलाव को रोकना, नशे के नेटवर्क को तोड़ना और क्षेत्र में बढ़ते नशा-आतंक के खतरे से निपटना है। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ मिलकर काम करेंगी, जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएँगे और नशा तस्करों की पहचान के लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
उपराज्यपाल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि नशा तस्करों के विरुद्ध कानूनी सजा के अलावा अतिरिक्त दंडात्मक कदम उठाए जाएँगे। इनमें आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट रद्द करना, तथा नशे के धन से अर्जित संपत्ति को जब्त करना शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में नार्को-आतंकवाद के मामलों में वृद्धि की चिंताएँ बढ़ी हैं।
समाज और युवाओं से अपील
सिन्हा ने अपने संबोधन में युवाओं, समाज के लोगों और समुदाय के नेताओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि वही आने वाले समय में देश के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व करेंगे।
व्यापक नशा-मुक्त योजना का हिस्सा
यह अभियान जम्मू-कश्मीर प्रशासन की उस व्यापक योजना का अंग है, जिसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश को नशा-मुक्त बनाना और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना है। गौरतलब है कि यह क्षेत्र सीमापार नशा तस्करी के मार्गों पर स्थित होने के कारण लंबे समय से नार्को-आतंकवाद की चुनौती से जूझता रहा है। आगामी हफ्तों में पुलिस और एजेंसियों द्वारा समन्वित कार्रवाई और जन-जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला अपेक्षित है।