जम्मू-कश्मीर: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में नशा-विरोधी मार्च का नेतृत्व किया, नार्को-आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' का संकल्प

Click to start listening
जम्मू-कश्मीर: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में नशा-विरोधी मार्च का नेतृत्व किया, नार्को-आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' का संकल्प

सारांश

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में नशा-विरोधी मार्च का नेतृत्व कर नार्को-आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' का संकल्प दोहराया। तस्करों के आधार कार्ड, पासपोर्ट रद्द करने और नशे की संपत्ति जब्त करने की घोषणा के साथ यह अभियान केंद्र शासित प्रदेश को नशा-मुक्त बनाने की बड़ी योजना का हिस्सा है।

Key Takeaways

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में नशा-विरोधी मार्च का नेतृत्व किया और नार्को-आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति दोहराई। अभियान का लक्ष्य नशे के नेटवर्क को तोड़ना, तस्करी रोकना और जम्मू-कश्मीर को नशा-मुक्त बनाना है। नशा तस्करों के आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट रद्द करने तथा संपत्ति जब्त करने की घोषणा की गई है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ मिलकर निगरानी करेंगी और जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँगे। युवाओं, समुदाय के नेताओं और समाज से अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार, 4 मई 2025 को श्रीनगर में एक व्यापक नशा-विरोधी मार्च का नेतृत्व किया और स्पष्ट किया कि प्रशासन नशीले पदार्थों की तस्करी तथा नार्को-आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर अडिग है। उन्होंने घोषणा की कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक जम्मू-कश्मीर में नशा बेचने या तस्करी करने वाला एक भी व्यक्ति मौजूद है।

अभियान का उद्देश्य और दायरा

उपराज्यपाल सिन्हा ने श्रीनगर में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और नार्को-आतंकवाद के खिलाफ इस बड़े अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि इसका मकसद नशे के फैलाव को रोकना, नशे के नेटवर्क को तोड़ना और क्षेत्र में बढ़ते नशा-आतंक के खतरे से निपटना है। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ मिलकर काम करेंगी, जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएँगे और नशा तस्करों की पहचान के लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

उपराज्यपाल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि नशा तस्करों के विरुद्ध कानूनी सजा के अलावा अतिरिक्त दंडात्मक कदम उठाए जाएँगे। इनमें आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट रद्द करना, तथा नशे के धन से अर्जित संपत्ति को जब्त करना शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में नार्को-आतंकवाद के मामलों में वृद्धि की चिंताएँ बढ़ी हैं।

समाज और युवाओं से अपील

सिन्हा ने अपने संबोधन में युवाओं, समाज के लोगों और समुदाय के नेताओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि वही आने वाले समय में देश के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व करेंगे।

व्यापक नशा-मुक्त योजना का हिस्सा

यह अभियान जम्मू-कश्मीर प्रशासन की उस व्यापक योजना का अंग है, जिसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश को नशा-मुक्त बनाना और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना है। गौरतलब है कि यह क्षेत्र सीमापार नशा तस्करी के मार्गों पर स्थित होने के कारण लंबे समय से नार्को-आतंकवाद की चुनौती से जूझता रहा है। आगामी हफ्तों में पुलिस और एजेंसियों द्वारा समन्वित कार्रवाई और जन-जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला अपेक्षित है।

Point of View

लेकिन इस बार आधार कार्ड और पासपोर्ट रद्द करने जैसे प्रशासनिक दंड जोड़ना एक उल्लेखनीय बदलाव है। असली परीक्षा यह होगी कि ये उपाय जमीन पर कितने प्रभावी साबित होते हैं, क्योंकि सीमापार तस्करी नेटवर्क केवल स्थानीय कार्रवाई से नहीं टूटते। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब नार्को-आतंकवाद की चुनौती और सुरक्षा बलों पर दबाव दोनों बढ़े हैं। बिना दीर्घकालिक पुनर्वास और आर्थिक अवसरों के, केवल दंडात्मक कदम समस्या की जड़ तक नहीं पहुँच सकते।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

जम्मू-कश्मीर में नशा-विरोधी अभियान क्या है?
यह जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा शुरू किया गया वह अभियान है जिसका उद्देश्य नशीले पदार्थों की तस्करी और नार्को-आतंकवाद को जड़ से खत्म करना है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में मार्च का नेतृत्व कर इसकी शुरुआत की और 'जीरो टॉलरेंस' की नीति दोहराई।
नशा तस्करों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?
नशा तस्करों के आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट रद्द किए जाएँगे और नशे के धन से अर्जित संपत्ति जब्त की जाएगी। ये कदम कानून में पहले से तय सजा के अतिरिक्त होंगे।
इस अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल होंगी?
अधिकारियों के अनुसार, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ मिलकर इस अभियान में काम करेंगी। इसके अलावा जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँगे और नशा तस्करों की पहचान के लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
नार्को-आतंकवाद जम्मू-कश्मीर के लिए क्यों बड़ी चुनौती है?
जम्मू-कश्मीर सीमापार नशा तस्करी के मार्गों पर स्थित है, जिससे नशे की तस्करी और आतंकी गतिविधियाँ आपस में जुड़ी हुई हैं। यह क्षेत्र लंबे समय से नार्को-आतंकवाद की इस दोहरी चुनौती से जूझता रहा है।
युवाओं और समाज की इस अभियान में क्या भूमिका है?
उपराज्यपाल सिन्हा ने युवाओं, समुदाय के नेताओं और समाज के लोगों से अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
Nation Press