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क्या जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री को चिट्ठी लिखकर ओवरसीज मोबिलिटी बिल के क्लॉज 12 को हटाने की मांग की?

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क्या जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री को चिट्ठी लिखकर ओवरसीज मोबिलिटी बिल के क्लॉज 12 को हटाने की मांग की?

सारांश

राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक पत्र में ओवरसीज मोबिलिटी बिल के क्लॉज 12 को हटाने की अपील की है। यह क्लॉज संवैधानिक रूप से खतरनाक बताया गया। जानें इस पत्र में क्या कहा गया है और इसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं।

मुख्य बातें

क्लॉज 12 नागरिकों के अधिकारों को सीमित कर सकता है।
यह संवैधानिक रूप से खतरनाक है।
brittas ने भेदभावपूर्ण प्रावधानों का विरोध किया है।
सरकार को नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।
प्रवासी मजदूरों की भलाई को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 12 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा के माकपा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने ओवरसीज मोबिलिटी (फैसिलिटेशन एंड वेलफेयर) बिल, 2025 के ड्राफ्ट में शामिल क्लॉज 12 को पूरी तरह से हटाने की मांग की है। यह बिल पुराने इमिग्रेशन एक्ट, 1983 की जगह लेने वाला है। डॉ. brittas ने अपने पत्र में इस क्लॉज को संवैधानिक रूप से खतरनाक और नीतिगत दृष्टि से गलत बताया है।

डॉ. brittas ने पत्र में कहा कि क्लॉज 12 केंद्र सरकार को भारतीय नागरिकों की विभिन्न श्रेणियां बनाने और किसी विशेष देश में उनके प्रवास पर विशेष प्रक्रिया या पाबंदी लगाने की असीमित शक्ति देता है। यह शक्ति बिना किसी स्पष्ट दिशानिर्देश के दी गई है, जिससे सरकार अपनी मर्जी से फैसले ले सकती है। सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा कि इससे नागरिकों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार हो सकता है। आधार जाति, धर्म, क्षेत्र या सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दे हो सकते हैं। बिना किसी कानूनी सुरक्षा या निष्पक्ष मानकों के यह प्रावधान भेदभाव को बढ़ावा देगा और मनमानी का दरवाजा खोलेगा।

सांसद ने जोर देकर कहा कि यह क्लॉज संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन करता है। अनुच्छेद 14 कानून के सामने समानता की गारंटी देता है, जबकि 15 भेदभाव पर रोक लगाता है। अनुच्छेद 21 निजी स्वतंत्रता और जीवन की रक्षा करता है, और 25 धर्म की आजादी सुनिश्चित करता है।

डॉ. brittas के अनुसार, यह प्रावधान राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कार्यपालिका को अत्यधिक नियंत्रण देगा, जो खास क्षेत्रों, धर्मों या समुदायों को निशाना बनाने का जरिया बन सकता है। इससे कमजोर समूहों के खिलाफ भेदभावपूर्ण नियम लागू हो सकते हैं, बिना किसी अनुपातिकता या कानूनी जांच के।

उन्होंने पुराने इमिग्रेशन एक्ट, 1983 का उदाहरण देते हुए बताया कि उसमें नागरिकों को श्रेणियों में बांटने की कोई शक्ति नहीं थी। वहां केवल देश-विशेष पाबंदियां लगाई जा सकती थीं, जो सभी पर समान रूप से लागू होती थीं और उनकी समय सीमा बेहद सख्त थी। नए बिल में क्लॉज 13 तो पुराने प्रावधानों को बनाए रखता है, लेकिन क्लॉज 12 एक नया और अनावश्यक अधिकार जोड़ता है, जो पहले कभी नहीं था। यह स्थापित कानूनी सिद्धांतों से पूरी तरह अलग है और कार्यपालिका की मनमानी को बढ़ावा देगा।

डॉ. brittas ने क्लॉज 12 को कार्यपालिका की शक्तियों का खतरनाक विस्तार बताया और विदेश मंत्रालय से इसे हटाने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रवासी मजदूरों की भलाई और सुरक्षा को संवैधानिक तरीके से मजबूत किया जाए, लेकिन भेदभावपूर्ण प्रावधानों से बचते हुए। इससे कमजोर कामगारों की रक्षा हो सकेगी, बिना किसी समुदाय को निशाना बनाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह विषय बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं से जुड़ा है। डॉ. जॉन brittas का पत्र एक गंभीर मुद्दे को उठाता है, जो समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर सकता है। यह आवश्यक है कि सरकार संवैधानिक मूल्यों का पालन करे और किसी भी भेदभावपूर्ण प्रावधान से दूर रहे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्लॉज 12 में क्या प्रावधान हैं?
क्लॉज 12 केंद्र सरकार को भारतीय नागरिकों की श्रेणियां बनाने और प्रवास पर विशेष प्रक्रिया या पाबंदी लगाने की शक्ति देता है।
डॉ. जॉन brittas ने इस क्लॉज को क्यों खतरनाक बताया?
उन्होंने इसे संवैधानिक रूप से खतरनाक और भेदभावपूर्ण बताया, जो नागरिकों के साथ भेदभाव कर सकता है।
इस बिल का प्रभाव क्या होगा?
यह बिल नागरिकों के अधिकारों को सीमित कर सकता है और भेदभावपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा दे सकता है।
क्या सरकार इस पत्र पर ध्यान देगी?
यह देखना होगा कि सरकार इस पत्र को गंभीरता से लेती है या नहीं।
क्लॉज 12 हटाने की मांग का क्या महत्व है?
इससे नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा होगी और भेदभाव पर रोक लगेगी।
राष्ट्र प्रेस
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