क्या जूनागढ़ में प्रशासन ने धार्मिक स्थलों को हटाने का फैसला लिया?

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क्या जूनागढ़ में प्रशासन ने धार्मिक स्थलों को हटाने का फैसला लिया?

सारांश

जूनागढ़ में प्रशासन ने धार्मिक स्थलों को हटाने का निर्णय लिया है, जिससे यातायात सुगम हो सके। जानिए इस कार्रवाई के पीछे की कहानी और प्रशासन के कदमों का असर क्या होगा।

मुख्य बातें

जूनागढ़ में धार्मिक स्थलों को हटाने का निर्णय यातायात की सुगमता के लिए लिया गया।
इस कार्रवाई में प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया था।
धार्मिक अतिक्रमणों के खिलाफ प्रशासन की यह पहल महत्वपूर्ण है।

जूनागढ़, 15 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के जूनागढ़ जिले में प्रशासन ने वेरावल-पोरबंदर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित दो धार्मिक स्थलों के खिलाफ कार्रवाई की है। रविवार की रात को प्रशासन ने बुलडोजर का उपयोग करते हुए इन धार्मिक स्थलों को रास्ते से हटा दिया।

जानकारी के अनुसार, जूनागढ़ जिले के मंगरोल क्षेत्र में स्थित ये धार्मिक स्थल यातायात में अवरोध उत्पन्न कर रहे थे, जिसके कारण प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा। इस कार्रवाई के दौरान राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), स्थानीय प्रशासन, पुलिस और पश्चिम गुजरात विद्युत कंपनी लिमिटेड (पीजीवीसीएल) की संयुक्त टीमें मौजूद थीं।

उक्त कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस अधीक्षक सुबोध ओडेदरा के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारी लगातार गश्त करते रहे। तोड़फोड़ के दौरान रात में कई रास्तों को बंद कर दिया गया था और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।

जूनागढ़ के एसपी सुबोध ओडेदरा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "मंगरोल में स्थित वेरावल-पोरबंदर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ धार्मिक अतिक्रमण मौजूद था। पुलिस से आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया, जो हमने उपलब्ध कराए। राष्ट्रीय राजमार्ग टीम ने तोड़फोड़ की कार्रवाई को अंजाम दिया। साथ ही, कानून-व्यवस्था के मद्देनजर अलग से टीमें भी तैनात की गई थीं।"

इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, पुलिस निरीक्षक और 150 जीआरडी होमगार्ड जवानों सहित कुल 300 पुलिसकर्मी तैनात थे। एक बड़ा पुलिस काफिला भी मौके पर मौजूद रहा।

इससे पहले, 17 जून को गुजरात के जामनगर में प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई के दौरान 19.19 लाख वर्ग फुट जमीन को खाली कराया था। प्रशासन ने इसकी अनुमानित कीमत 259 करोड़ रुपए बताई है।

इसके अलावा, 13 मई को गुजरात के अमरेली में मौलाना मोहम्मद फजल अब्दुल अजीज शेख के मदरसे पर बड़ी कार्रवाई की गई थी। प्रशासन ने मौलाना के मदरसे पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक था। धार्मिक स्थलों के अतिक्रमण ने यातायात में बाधा उत्पन्न की थी। ऐसी कार्रवाई से न केवल सड़क की सुरक्षा बढ़ती है, बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं का भी संरक्षण होता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्यों हटाए गए धार्मिक स्थल?
यह धार्मिक स्थल यातायात में बाधा उत्पन्न कर रहे थे, जिसके कारण प्रशासन को इन्हें हटाने का निर्णय लेना पड़ा।
इस कार्रवाई में कितने पुलिसकर्मी शामिल थे?
इस कार्रवाई के दौरान कुल 300 पुलिसकर्मी तैनात थे।
क्या कार्रवाई के दौरान कोई अप्रिय घटना हुई?
नहीं, कार्रवाई शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।
राष्ट्र प्रेस