क्या कन्याकुमारी से लेकर पश्चिम बंगाल तक के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी?

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क्या कन्याकुमारी से लेकर पश्चिम बंगाल तक के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी?

सारांश

नव वर्ष का पहला दिन भारतीय मंदिरों में आस्था का भव्य उत्सव है। लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए उमड़ पड़े हैं, खासकर दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल के मंदिरों में। भक्तों की भारी भीड़, विशेष प्रार्थनाएं, और अद्भुत दृश्य इस दिन को खास बनाते हैं।

Key Takeaways

  • नव वर्ष पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
  • दक्षिण भारत के मंदिरों में भक्तों की कतारें लगीं।
  • मंदिर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए उपाय किए।
  • कन्याकुमारी और पश्चिम बंगाल के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2026 के पहले दिन, देश के विभिन्न मंदिरों में भक्तों की विशाल भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी है। दक्षिण भारत के भगवान विष्णु और मुरुगन के मंदिरों में श्रद्धालु सुबह से ही प्रभु के दर्शन के लिए कतार में खड़े हैं।

वहीं, पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध काली मंदिर में भी भक्त माता रानी के दर्शन के लिए दूर-दूर से आ रहे हैं।

तमिलनाडु के डिंडीगुल में नववर्ष के पहले दिन पलानी मुरुगन मंदिर में श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुँच रहे हैं। कोहरे और सर्दी की चुनौतियों के बावजूद भक्तों की आस्था हर परिस्थिति को पार कर रही है। ब्रह्म मुहूर्त से ही भक्त अपने आराध्य के दर्शन के लिए लंबी लाइनों में खड़े हैं। पलानी मुरुगन मंदिर के भक्त पहाड़ी की चढ़ाई करके मंदिर पहुँच रहे हैं, जहाँ साधु-संत एक दूसरे को विभूति लगा रहे हैं।

विश्व प्रसिद्ध तिरुमाला बालाजी मंदिर में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अतुल शरच्चन्द्र चंदुरकर भी अपने परिवार के साथ दर्शन के लिए आए। उन्होंने पहले तिरुमाला बालाजी का आशीर्वाद लिया और फिर मंदिर के प्रांगण में फोटो भी क्लिक की। इसके अलावा, तमिलनाडु के विलुप्पुरम मंदिर में वर्ष 2026 का स्वागत विशेष प्रार्थनाओं और पूजा-अर्चना के साथ किया जा रहा है। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा होने लगी है। भक्त अपने आराध्य के लिए उनकी पसंद की भेंट लेकर मंदिर पहुँच रहे हैं।

नव वर्ष को देखते हुए सभी मंदिर देर रात तक खुले रहे, ताकि भक्तों को आराम से दर्शन हो सके। मंदिर प्रशासन ने दर्शन को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए सभी तैयारियाँ की हैं। भीड़ को नियंत्रित करने हेतु पुलिस बल की तैनाती भी की गई है।

कन्याकुमारी मंदिर में भक्त हजारों की संख्या में पहुँच रहे हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल के काली घाट मंदिर में वर्ष 2026 के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अपने परिवार के साथ मां काली के दर्शन के लिए आ रही है। भक्त विशेष मनोकामना के लिए मंदिर परिसर में पूजा-अनुष्ठान भी करा रहे हैं और मां से नव वर्ष के शुभ होने की कामना कर रहे हैं।

Point of View

लाखों लोग अपने धार्मिक स्थलों पर जाकर नई शुरुआत करने की कोशिश कर रहे हैं। यह न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का भी।
NationPress
01/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या नए साल पर मंदिरों में दर्शन के लिए जाने का विशेष महत्व है?
जी हाँ, नए साल पर मंदिरों में जाकर श्रद्धालु अपने संकल्प और मनोकामनाओं के लिए पूजा करते हैं। यह एक नई शुरुआत का प्रतीक होता है।
कन्याकुमारी और पश्चिम बंगाल के मंदिरों में कितने भक्त पहुंचे?
नव वर्ष के पहले दिन, कन्याकुमारी और पश्चिम बंगाल के मंदिरों में हजारों श्रद्धालुओं का जमावड़ा हुआ।
क्या मंदिर प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के उपाय किए हैं?
हाँ, मंदिर प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की है और सभी तैयारियाँ की हैं।
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