क्या करण राजदान फिर से 'रजनी' शो बनाएंगे, एक्स-वाइफ प्रिया तेंदुलकर संग सेट के पलों को किया याद?
सारांश
Key Takeaways
- 'रजनी' शो का पुनः निर्माण समाज में जागरूकता लाने का प्रयास है।
- प्रिया तेंदुलकर की अदाकारी का महत्व आज भी कायम है।
- सामाजिक मुद्दों को उठाना इस शो की विशेषता है।
- करण राजदान और प्रिया का रिश्ता इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए ये शो महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
मुंबई, 10 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। टीवी के इतिहास में ऐसे कई शो हैं जो न केवल मनोरंजन करते हैं, बल्कि समाज में बदलाव लाने की प्रेरणा भी देते हैं। 1980 के दशक का प्रसिद्ध शो 'रजनी' भी इसी श्रेणी में आता है। यह शो दर्शकों के लिए एक उदाहरण बन गया था, क्योंकि इसमें आम लोगों की समस्याओं और समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर किया गया था।
इस शो में प्रिया तेंदुलकर ने एक साहसी गृहिणी 'रजनी' का किरदार निभाया, जो रोजमर्रा की चुनौतियों का सामना करती हैं। अब, डायरेक्टर करण राजदान ने इस शो को पुनः बनाने का निर्णय लिया है।
करण राजदान ने अपनी पूर्व पत्नी और मशहूर अभिनेत्री प्रिया तेंदुलकर के बारे में राष्ट्र प्रेस से कहा, ''मैंने थिएटर में कई वर्षों तक ट्रेनिंग ली, लेकिन प्रिया को कभी औपचारिक शिक्षा नहीं मिली। उन्होंने अपने अनुभव से बहुत कुछ सीखा। वह अपने पिता, महान लेखक विजय तेंदुलकर के नाटकों में भी काम करती थीं। उनका प्रतिभा स्वाभाविक था।''
उन्होंने आगे कहा, ''आज के समय में, जब हर दिशा में टीवी, वेब और सोशल मीडिया के अनगिनत प्लेटफॉर्म हैं, लोगों तक संदेश और जागरूकता पहुंचाना कठिन हो गया है। ऐसे में 'रजनी' जैसे शो को फिर से बनाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह अत्यंत आवश्यक भी है।''
करण ने बताया कि उनके और प्रिया के बीच एक गहरा क्रिएटिव और भावनात्मक संबंध था। उन्होंने कहा, ''शादी के दौरान प्रिया को मेरे साथ एक विशेष कनेक्शन महसूस होता था, क्योंकि मैं 'रजनी' की कहानी लिखता था। प्रिया अक्सर कहती थीं कि उन्हें मुझमें अपने पिता की झलक दिखती है, और यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था। सेट पर वह हमेशा मुझे रोल लिखने के लिए कहती थीं। उन्हें डायलॉग बोलने में वास्तविक खुशी मिलती थी।''
प्रिया तेंदुलकर ने न केवल टीवी में, बल्कि मराठी और हिंदी फिल्मों में भी काम किया और थिएटर में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित की। वह महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सुधारों के लिए भी मुखर रहीं।
'रजनी' के हर एपिसोड में आम जनता की किसी न किसी समस्या को उठाया जाता था। यही कारण है कि उस दौर में यह शो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बन गया।