कर्नाटक साइबर कमांड ने 8,750 अवैध सट्टेबाजी प्लेटफार्मों पर की बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक राज्य साइबर कमांड ने 1 जून 2026 को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी-विरोधी अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिसमें 8,750 से अधिक अवैध डिजिटल सट्टेबाजी प्लेटफार्मों को निशाना बनाया गया। इन प्लेटफार्मों पर कथित तौर पर हजारों नागरिकों की मेहनत की कमाई लूटी जा रही थी।
मुख्य घटनाक्रम
साइबर कमांड द्वारा सोमवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अभियान में वेबसाइटें, मोबाइल ऐप, मिरर डोमेन, सब-डोमेन और क्लोन यूआरएल सहित कुल 8,750 डिजिटल ठिकानों पर कार्रवाई की गई। विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर विशेष साइबर टीमों ने समन्वित ऑनलाइन जांच की और मुख्यतः अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी संचालित करने वाले संगठित गिरोहों की पहचान की।
जांच में सामने आया कि ये ऑपरेटर कानून की पकड़ से बचने के लिए लगातार नए मिरर डोमेन और क्लोन वेबसाइटें तैयार कर अपनी गतिविधियाँ जारी रखते थे — एक ऐसी रणनीति जो इस तरह के नेटवर्क को पारंपरिक तरीकों से बंद करना लगभग असंभव बना देती है।
आम जनता पर असर
अधिकारियों के अनुसार, इन अवैध सट्टेबाजी नेटवर्कों के कारण देश भर में हजारों नागरिकों को कथित तौर पर भारी वित्तीय नुकसान, डेटा लीक, मानसिक उत्पीड़न और कर्ज संबंधी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा है। विशेष रूप से चिंताजनक यह रहा कि कई कमजोर वर्ग के लोगों ने इन गिरोहों द्वारा संचालित क्रेडिट-आधारित सट्टेबाजी प्रणालियों के जाल में फंसकर अपनी जीवन भर की बचत गँवा दी।
सरकार की प्रतिक्रिया
पुलिस महानिदेशक (साइबर कमांड) प्रणब मोहंती ने कहा कि कर्नाटक राज्य साइबर कमांड नागरिकों को साइबर-सक्षम अपराधों से बचाने और एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग के लिए I4C और संबंधित साइबर टीमों का आभार भी व्यक्त किया।
अधिकारियों ने बताया कि इस बड़े पैमाने की कार्रवाई ने अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के तंत्र के एक महत्वपूर्ण हिस्से को बाधित कर दिया है और जनता को होने वाले आगे के वित्तीय नुकसान को रोकने में मदद मिली है।
क्या होगा आगे
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग को लेकर नियामकीय ढाँचे पर बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि I4C के साथ राज्य-स्तरीय साइबर इकाइयों का यह समन्वय एक नई कार्यप्रणाली को दर्शाता है, जिसे भविष्य में अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है। साइबर कमांड ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे किसी भी संदिग्ध सट्टेबाजी प्लेटफार्म की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें।