18 जुलाई 2026
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कर्नाटक साइबर कमांड ने 8,750 अवैध सट्टेबाजी प्लेटफार्मों पर की बड़ी कार्रवाई

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कर्नाटक साइबर कमांड ने 8,750 अवैध सट्टेबाजी प्लेटफार्मों पर की बड़ी कार्रवाई

सारांश

कर्नाटक साइबर कमांड ने एक झटके में 8,750 अवैध सट्टेबाजी प्लेटफार्म ध्वस्त किए — वेबसाइट से लेकर मिरर डोमेन तक। यह देश के सबसे बड़े साइबर सट्टा-विरोधी अभियानों में से एक है, जो दर्शाता है कि राज्य और केंद्रीय साइबर एजेंसियाँ अब मिलकर डिजिटल जुआ नेटवर्क के खिलाफ नई रणनीति अपना रही हैं।

मुख्य बातें

कर्नाटक राज्य साइबर कमांड ने 1 जून 2026 को 8,750 अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफार्मों पर कार्रवाई की।
निशाने पर वेबसाइटें, मोबाइल ऐप, मिरर डोमेन, सब-डोमेन और क्लोन यूआरएल सभी शामिल थे।
यह अभियान भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से चलाया गया।
हजारों नागरिकों को कथित तौर पर वित्तीय नुकसान, डेटा लीक और कर्ज की समस्याओं का सामना करना पड़ा था।
DGP प्रणब मोहंती ने अभियान की पुष्टि करते हुए सुरक्षित डिजिटल वातावरण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

कर्नाटक राज्य साइबर कमांड ने 1 जून 2026 को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी-विरोधी अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिसमें 8,750 से अधिक अवैध डिजिटल सट्टेबाजी प्लेटफार्मों को निशाना बनाया गया। इन प्लेटफार्मों पर कथित तौर पर हजारों नागरिकों की मेहनत की कमाई लूटी जा रही थी।

मुख्य घटनाक्रम

साइबर कमांड द्वारा सोमवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अभियान में वेबसाइटें, मोबाइल ऐप, मिरर डोमेन, सब-डोमेन और क्लोन यूआरएल सहित कुल 8,750 डिजिटल ठिकानों पर कार्रवाई की गई। विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर विशेष साइबर टीमों ने समन्वित ऑनलाइन जांच की और मुख्यतः अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी संचालित करने वाले संगठित गिरोहों की पहचान की।

जांच में सामने आया कि ये ऑपरेटर कानून की पकड़ से बचने के लिए लगातार नए मिरर डोमेन और क्लोन वेबसाइटें तैयार कर अपनी गतिविधियाँ जारी रखते थे — एक ऐसी रणनीति जो इस तरह के नेटवर्क को पारंपरिक तरीकों से बंद करना लगभग असंभव बना देती है।

आम जनता पर असर

अधिकारियों के अनुसार, इन अवैध सट्टेबाजी नेटवर्कों के कारण देश भर में हजारों नागरिकों को कथित तौर पर भारी वित्तीय नुकसान, डेटा लीक, मानसिक उत्पीड़न और कर्ज संबंधी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा है। विशेष रूप से चिंताजनक यह रहा कि कई कमजोर वर्ग के लोगों ने इन गिरोहों द्वारा संचालित क्रेडिट-आधारित सट्टेबाजी प्रणालियों के जाल में फंसकर अपनी जीवन भर की बचत गँवा दी।

सरकार की प्रतिक्रिया

पुलिस महानिदेशक (साइबर कमांड) प्रणब मोहंती ने कहा कि कर्नाटक राज्य साइबर कमांड नागरिकों को साइबर-सक्षम अपराधों से बचाने और एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग के लिए I4C और संबंधित साइबर टीमों का आभार भी व्यक्त किया।

अधिकारियों ने बताया कि इस बड़े पैमाने की कार्रवाई ने अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के तंत्र के एक महत्वपूर्ण हिस्से को बाधित कर दिया है और जनता को होने वाले आगे के वित्तीय नुकसान को रोकने में मदद मिली है।

क्या होगा आगे

यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग को लेकर नियामकीय ढाँचे पर बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि I4C के साथ राज्य-स्तरीय साइबर इकाइयों का यह समन्वय एक नई कार्यप्रणाली को दर्शाता है, जिसे भविष्य में अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है। साइबर कमांड ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे किसी भी संदिग्ध सट्टेबाजी प्लेटफार्म की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें।

संपादकीय दृष्टिकोण

750 प्लेटफार्मों पर एकसाथ कार्रवाई प्रभावशाली संख्या है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह स्थायी प्रभाव डालेगी — क्योंकि मिरर डोमेन और क्लोन वेबसाइटें घंटों में दोबारा खड़ी हो जाती हैं। भारत में ऑनलाइन सट्टेबाजी पर कोई एकीकृत केंद्रीय कानून नहीं है, जिससे राज्य-स्तरीय कार्रवाइयाँ अक्सर 'व्हाक-ए-मोल' बनकर रह जाती हैं। I4C के साथ समन्वय एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन बिना कठोर नियामकीय ढाँचे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के, इन नेटवर्कों की जड़ें — जो अक्सर विदेशी सर्वरों पर होती हैं — काटना मुश्किल रहेगा।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक साइबर कमांड ने कितने अवैध सट्टेबाजी प्लेटफार्मों पर कार्रवाई की?
कर्नाटक राज्य साइबर कमांड ने 1 जून 2026 को 8,750 अवैध डिजिटल सट्टेबाजी प्लेटफार्मों पर कार्रवाई की, जिनमें वेबसाइटें, मोबाइल ऐप, मिरर डोमेन, सब-डोमेन और क्लोन यूआरएल शामिल थे।
इस अभियान में किन एजेंसियों ने भाग लिया?
यह अभियान कर्नाटक राज्य साइबर कमांड और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के संयुक्त समन्वय से चलाया गया। DGP प्रणब मोहंती के नेतृत्व में विशेष साइबर टीमों ने समन्वित ऑनलाइन जांच की।
इन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफार्मों से आम नागरिकों को क्या नुकसान हुआ?
अधिकारियों के अनुसार, इन नेटवर्कों के कारण हजारों नागरिकों को कथित तौर पर भारी वित्तीय नुकसान, डेटा लीक, मानसिक उत्पीड़न और कर्ज की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। कई कमजोर वर्ग के लोगों ने क्रेडिट-आधारित सट्टेबाजी प्रणालियों में अपनी जीवन भर की बचत गँवा दी।
ये सट्टेबाजी ऑपरेटर पकड़ से कैसे बचते थे?
जांच में पता चला कि ये ऑपरेटर पकड़े जाने से बचने के लिए लगातार नए मिरर डोमेन और क्लोन वेबसाइटें तैयार करते थे। एक प्लेटफार्म बंद होने पर वे तुरंत नए यूआरएल के जरिए अपनी गतिविधियाँ जारी रखते थे।
क्या भविष्य में और ऐसे अभियान चलाए जाएंगे?
DGP प्रणब मोहंती ने स्पष्ट किया है कि साइबर कमांड नागरिकों की सुरक्षा के लिए इस तरह के अभियान जारी रखेगा। I4C के साथ राज्य-स्तरीय समन्वय की यह कार्यप्रणाली अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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