क्या कर्नाटक सरकार ने गडग के रिट्टी परिवार को सोने का खजाना सौंपने पर विशेष पुरस्कार की घोषणा की?

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क्या कर्नाटक सरकार ने गडग के रिट्टी परिवार को सोने का खजाना सौंपने पर विशेष पुरस्कार की घोषणा की?

सारांश

गडग जिले के रिट्टी परिवार को उनके साहसिक निर्णय के लिए कर्नाटक सरकार द्वारा विशेष पुरस्कार दिया गया है। यह पुरस्कार उनके द्वारा सोने के खजाने को प्रशासन को सौंपने के लिए है, जो समाज में नैतिक मूल्यों का प्रतीक है।

Key Takeaways

  • ईमानदारी का महत्व: रिट्टी परिवार ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
  • सरकार का मान्यता: ईमानदारी को सम्मानित करना महत्वपूर्ण है।
  • ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर: लक्कुंडी का ऐतिहासिक महत्व है।

गडग (कर्नाटक), 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर गडग जिले के लक्कुंडी गांव के प्रज्वल रिट्टी और उनके परिवार की ईमानदारी को मान्यता देने के लिए एक विशेष पुरस्कार की घोषणा की है।

यह परिवार तब चर्चा में आया था जब उन्होंने अपने घर की नींव खोदते हुए मिले सोने के भंडार को अपने पास रखने के बजाय प्रशासन को सौंप दिया। इस कदम को सरकार ने ईमानदारी और नैतिक मूल्यों के सम्मान के रूप में देखा है।

इस विशेष पुरस्कार की घोषणा कानून एवं संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल ने सोमवार को गडग शहर के खेल स्टेडियम में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद की। मंत्री पाटिल ने मंच से रिट्टी परिवार की सत्यनिष्ठा की सराहना की और कहा कि ऐसे उदाहरण समाज में विश्वास और नैतिकता को मजबूती प्रदान करते हैं, इसीलिए सरकार ने इस परिवार को सम्मानित करने का निर्णय लिया है।

पुरस्कार के अंतर्गत कर्नाटक सरकार प्रज्वल रिट्टी के परिवार को एक आवासीय भूखंड आवंटित करेगी, घर निर्माण के लिए 5 लाख रुपए की नकद सहायता प्रदान करेगी और प्रज्वल की मां कस्तुरेवा रिट्टी को संविदा आधार पर सरकारी नौकरी देगी। मंत्री पाटिल ने इसे सरकार की ओर से ईमानदारी के प्रति सम्मान और प्रोत्साहन का प्रतीक बताया।

इस अवसर पर जिला प्रशासन ने प्रज्वल रिट्टी और उनकी माता कस्तुरेवा रिट्टी को औपचारिक रूप से सम्मानित किया। मंत्री पाटिल ने परिवार को भूखंड आवंटन का प्रमाण पत्र सौंपा, वहीं कस्तुरेवा रिट्टी को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए इसे ईमानदारी की दुर्लभ लेकिन अत्यंत सार्थक पहचान बताया।

बता दें कि 10 जनवरी को लक्कुंडी गांव में घर की नींव खोदने के दौरान रिट्टी परिवार को करीब 466 ग्राम वजन के प्राचीन सोने के आभूषणों का खजाना मिला था। इस खोज का आर्थिक और ऐतिहासिक महत्व काफी अधिक होने के बावजूद परिवार ने इसे अपने पास रखने के बजाय प्रशासन को सौंपने का निर्णय लिया। उनके इस कदम की न केवल जिले में बल्कि पूरे राज्य में सराहना हुई।

गडग जिले का ऐतिहासिक गांव लक्कुंडी चालुक्य काल के मंदिरों, प्राचीन झीलों और पुरातात्विक महत्व के स्मारकों के लिए जाना जाता है। पुरातत्वविदों के अनुसार, मध्यकाल में लक्कुंडी एक प्रमुख व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है, जहां सोना, सिक्के और आभूषण दफनाने की परंपरा प्रचलित थी। प्रज्वल रिट्टी के परिवार द्वारा खोजा गया यह सोने का भंडार गांव के समृद्ध और गौरवशाली ऐतिहासिक अतीत का एक और महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।

Point of View

बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है। रिट्टी परिवार की ईमानदारी और नैतिकता ने समाज में एक नया मानक स्थापित किया है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमें भी अपने जीवन में ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का पालन करना चाहिए।
NationPress
07/02/2026

Frequently Asked Questions

रिट्टी परिवार ने सोने का खजाना क्यों सौंपा?
रिट्टी परिवार ने सोने का खजाना प्रशासन को सौंपा क्योंकि उन्होंने ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी।
कर्नाटक सरकार ने क्या पुरस्कार देने की घोषणा की?
कर्नाटक सरकार ने रिट्टी परिवार को एक आवासीय भूखंड, नकद सहायता और सरकारी नौकरी देने की घोषणा की।
लक्कुंडी गांव का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
लक्कुंडी गांव चालुक्य काल के मंदिरों और पुरातात्विक महत्व के स्मारकों के लिए जाना जाता है।
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