23 अक्टूबर 2026
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हुबली में प्रतिबंधित मांझे से 38 वर्षीय महिला की मौत, कर्नाटक पुलिस ने 12 मामले दर्ज किए

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हुबली में प्रतिबंधित मांझे से 38 वर्षीय महिला की मौत, कर्नाटक पुलिस ने 12 मामले दर्ज किए

सारांश

हुबली की कारवार रोड पर प्रतिबंधित मांझे से 38 वर्षीय महिला की मौत — और यह अक्टूबर में कर्नाटक में दूसरी ऐसी घटना है। पुलिस ने 12 मामले दर्ज किए, गोदामों पर छापे मारे और एक सप्ताह का विशेष अभियान शुरू किया। सवाल यह है कि बार-बार चेतावनियों के बाद भी प्रतिबंध लागू क्यों नहीं हो पाया?

मुख्य बातें

38 वर्षीय लैब टेक्नीशियन विद्या मंजूनाथ गौडर की मृत्यु 23 अक्टूबर 2026 को हुबली के कारवार रोड पर प्रतिबंधित मांझे से हुई।
कर्नाटक पुलिस ने अब तक 12 आपराधिक मामले दर्ज कर बड़ी मात्रा में मांझा जब्त किया है।
हुबली-धारवाड़ पुलिस अधीक्षक भूषण बोरासे ने एक सप्ताह का विशेष सफाई और जब्ती अभियान घोषित किया।
1 अक्टूबर 2026 को बेलगावी में 19 वर्षीय ध्रुव संतोष करजागी की भी मांझे से मृत्यु हो चुकी है — तीन हफ्तों में दूसरी घटना।
पुलिस ने नागरिकों से 112 इमरजेंसी हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
बेलगावी पुलिस कमिश्नर के.
रामराजन ने भी व्यापारियों को मांझा बेचने पर रोक लगाई।

कर्नाटक के हुबली-धारवाड़ में प्रतिबंधित मांझे से 38 वर्षीय लैब टेक्नीशियन विद्या मंजूनाथ गौडर की मौत के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। गुरुवार, 23 अक्टूबर 2026 को कारवार रोड पर शिवशंकर कॉलोनी के पास से गुजरते समय मांझा उनके गले में फंस गया, जिससे गले पर गंभीर चोट आई और उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद कर्नाटक पुलिस ने दुकानों और गोदामों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित मांझा जब्त किया है।

मुख्य घटनाक्रम

हुबली-धारवाड़ के पुलिस अधीक्षक भूषण बोरासे ने शुक्रवार को बताया कि उन्होंने तत्काल दो कदम उठाए हैं। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जहाँ भी मांझा बिकता मिले, वहाँ मामला दर्ज किया जाए। अब तक 12 आपराधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं और काफी मात्रा में प्रतिबंधित मांझा जब्त किया गया है।

बोरासे ने यह भी बताया कि बिजली के खंभों और पेड़ों पर फंसे पतंगों के मांझे हवा में लटके रहते हैं, जो सड़क पर चलने वालों — विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों और साइकिल सवारों — के लिए जानलेवा खतरा पैदा करते हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

पुलिस ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर नागरिक प्रशासन, सफाई कर्मचारियों और हुबली इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी के कर्मियों से इन खतरनाक धागों को हटाने में सहयोग माँगा है। अधीक्षक बोरासे के अनुसार प्रशासन एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाएगा, जिसमें जहाँ भी पतंगें या लटकते मांझे मिलेंगे, उन्हें हटाया जाएगा।

इसी क्रम में बेलगावी के पुलिस कमिश्नर के. रामराजन ने भी व्यापारियों को प्रतिबंधित मांझा न बेचने का निर्देश दिया है और आम जनता से अपील की है कि पतंगबाजी में इसका इस्तेमाल न करें।

पृष्ठभूमि: यह पहली घटना नहीं

गौरतलब है कि यह कर्नाटक में मांझे से होने वाली मौत की पहली घटना नहीं है। 1 अक्टूबर 2026 को बेलगावी में 19 वर्षीय छात्र ध्रुव संतोष करजागी की मृत्यु उस समय हुई जब मोटरसाइकिल चलाते हुए पतंग की तेज धार वाली डोर उनके गले में लग गई। महज तीन सप्ताह के भीतर राज्य में यह दूसरी ऐसी दुखद घटना है, जो स्पष्ट करती है कि प्रतिबंध के बावजूद मांझे की बिक्री और उपयोग जारी है।

बोरासे ने स्वीकार किया कि पुलिस पहले भी जागरूकता कार्यक्रम चला चुकी है, लेकिन लोगों ने चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया। इस बार कानूनी कार्रवाई को प्राथमिकता दी जा रही है।

आम जनता पर असर और अपील

पुलिस अधीक्षक बोरासे ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं खतरनाक तरीके से लटकता मांझा दिखे या प्रतिबंधित मांझे का उपयोग करके पतंग उड़ाते हुए कोई मिले, तो 112 इमरजेंसी हेल्पलाइन पर तुरंत सूचित करें। पुलिस का कहना है कि ऐसी शिकायतों पर फौरन कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला उन हज़ारों शहरी निवासियों को प्रभावित करता है जो प्रतिदिन सड़कों पर दोपहिया वाहनों से यात्रा करते हैं। विशेष अभियान पूरा होने के बाद भी यदि दीर्घकालिक निगरानी तंत्र नहीं बना, तो प्रतिबंध कागज़ी ही बना रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि महज दुर्घटना का। प्रतिबंध कागज़ पर लागू है, लेकिन जमीन पर इसकी कोई पुख्ता निगरानी व्यवस्था नहीं है। पुलिस खुद मान रही है कि पहले भी जागरूकता अभियान चले, पर असर नहीं हुआ — यानी समस्या जागरूकता की नहीं, क्रियान्वयन की है। एक सप्ताह का अभियान और 12 मामले दर्ज करना तात्कालिक राहत है, लेकिन जब तक आपूर्ति श्रृंखला — थोक विक्रेता से लेकर खुदरा दुकानदार तक — पर दीर्घकालिक जवाबदेही तय नहीं होती, अगला हादसा तय है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुबली में मांझे से महिला की मौत कैसे हुई?
38 वर्षीय लैब टेक्नीशियन विद्या मंजूनाथ गौडर 23 अक्टूबर 2026 को हुबली के कारवार रोड पर शिवशंकर कॉलोनी के पास से गुजर रही थीं, तभी प्रतिबंधित मांझा उनके गले में फंस गया और गले पर गंभीर चोट आई, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
कर्नाटक पुलिस ने मांझे के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
हुबली-धारवाड़ पुलिस ने दुकानों और गोदामों पर छापेमारी कर 12 आपराधिक मामले दर्ज किए हैं और बड़ी मात्रा में मांझा जब्त किया है। इसके अलावा एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाकर सड़कों से लटकते मांझे हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
कर्नाटक में इससे पहले भी मांझे से मौत हुई है?
हाँ, 1 अक्टूबर 2026 को बेलगावी में 19 वर्षीय छात्र ध्रुव संतोष करजागी की मोटरसाइकिल चलाते समय मांझा गले में लगने से मृत्यु हुई थी। यह तीन सप्ताह में राज्य में दूसरी ऐसी घटना है।
अगर कहीं प्रतिबंधित मांझा दिखे तो क्या करें?
पुलिस अधीक्षक भूषण बोरासे ने नागरिकों से अपील की है कि खतरनाक तरीके से लटकता मांझा दिखने पर या प्रतिबंधित मांझे से पतंग उड़ाने की सूचना मिलने पर तुरंत 112 इमरजेंसी हेल्पलाइन पर कॉल करें। पुलिस का आश्वासन है कि ऐसी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई होगी।
मांझा क्यों खतरनाक है और इस पर प्रतिबंध क्यों है?
प्रतिबंधित मांझा — जो प्रायः नायलॉन या धातु के कणों से लेपित होता है — अत्यंत तीखा होता है और सड़कों पर बिजली के खंभों या पेड़ों पर लटकने पर दोपहिया चालकों के गले या शरीर में धँस सकता है। इसीलिए इसकी बिक्री और उपयोग पर कानूनी प्रतिबंध लागू है।
राष्ट्र प्रेस
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