हुबली में मांझे से महिला की मौत: कर्नाटक के डिप्टी सीएम परमेश्वर की चेतावनी, लापरवाह इस्तेमाल पर होगी आपराधिक कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के हुबली में 23 अक्टूबर 2026 को एक दर्दनाक हादसे में 38 वर्षीय प्रयोगशाला तकनीशियन विद्या मंजुनाथ गौडर की मौत हो गई, जब कारवार रोड पर स्कूटर सवार होकर जाते समय उनके गले में कांच की परत चढ़ा प्रतिबंधित पतंग का मांझा उलझ गया और उनका गला कट गया। इस घटना के बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने सार्वजनिक रूप से कड़ी चेतावनी जारी की है कि खतरनाक मांझे का जानबूझकर इस्तेमाल आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आ सकता है।
घटना का विवरण
पीड़िता विद्या मंजुनाथ गौडर हुबली की रहने वाली थीं और पेशे से प्रयोगशाला तकनीशियन थीं। गुरुवार को वह शिवशंकर कॉलोनी के समीप कारवार रोड से स्कूटर पर जा रही थीं, जब लटका हुआ धारदार मांझा अचानक उनके गले में फंस गया। कांच की परत चढ़े उस धागे ने उनका गला काट दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। यह त्रासदी तब और गहरी हो जाती है जब यह ज्ञात हो कि ऐसे मांझे पर पहले से प्रतिबंध लागू है, फिर भी इसकी बिक्री और उपयोग बदस्तूर जारी है।
डिप्टी सीएम परमेश्वर की सख्त चेतावनी
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने इस घटना को 'बेहद दुखद और अस्वीकार्य' करार देते हुए कहा कि सरकार ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मनोरंजन का कोई भी पल किसी इंसान की जिंदगी से बढ़कर नहीं हो सकता। कोई भी उत्सव किसी परिवार को जिंदगी भर के दुख में धकेलने का औचित्य नहीं हो सकता।'
परमेश्वर ने आगे कहा कि जानबूझकर दूसरों की जान जोखिम में डालना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक कृत्य भी हो सकता है और ऐसे लोगों को कानून के तहत परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पतंग उड़ाने को खतरनाक प्रतिस्पर्धा या जुए जैसी गतिविधियों में बदलना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार की प्रस्तावित कार्रवाई
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने, मौजूदा कानूनी प्रावधानों की समीक्षा करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें और सख्त बनाने के लिए संबंधित मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल कानून लागू करने का नहीं, बल्कि मानवता, विवेक और सामूहिक जिम्मेदारी का भी मामला है।
परमेश्वर ने स्वीकार किया कि केवल कानूनी कार्रवाई से ऐसी दुर्घटनाओं को पूरी तरह रोकना संभव नहीं होगा — इसके लिए जनता का सक्रिय सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना भी आवश्यक है।
पुलिस की छापेमारी और जब्ती अभियान
घटना के बाद कर्नाटक पुलिस ने हुबली-धारवाड़ क्षेत्र में प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल के विरुद्ध अभियान तेज कर दिया है। पुलिस दुकानों और गोदामों में छापेमारी कर प्रतिबंधित मांझे का स्टॉक जब्त कर रही है और कारोबारियों को सख्त चेतावनी दी गई है कि वे इस प्रतिबंधित सामग्री की बिक्री बंद करें।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि यह कर्नाटक में मांझे से जुड़ी पहली मौत नहीं है। धारदार और कांच की परत चढ़े मांझे से देशभर में हर साल दर्जनों लोग अपनी जान गँवा देते हैं, जिनमें राहगीर, दोपहिया वाहन चालक और बच्चे तक शामिल होते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और केंद्रीय प्रतिबंध के बावजूद इस तरह के मांझे की अवैध बिक्री जारी रहना प्रवर्तन तंत्र की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
परमेश्वर ने कहा, 'ऐसी हर त्रासदी के पीछे एक ऐसा परिवार होता है, जिसकी दुनिया उजड़ जाती है। न माफी, न मुआवजा और न ही कोई सजा उस जिंदगी को वापस ला सकती है, जो खो चुकी है। हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी त्रासदियों को रोका जाए।' सरकार की अगली कार्रवाई और प्रस्तावित कानूनी समीक्षा की दिशा तय करेगी कि क्या यह चेतावनी महज बयानबाजी बनकर रह जाती है या ठोस नीतिगत बदलाव की शुरुआत करती है।