राष्ट्रपति मुर्मु ने 8 केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों को राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम 2023 की शक्तियाँ सौंपीं
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 23 अक्टूबर 2026 को सभी 8 केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 की धारा 29, 48 और 56 के अंतर्गत 'राज्य सरकार' की शक्तियाँ प्रयोग करने और कार्यों का निर्वहन करने का अधिकार सौंप दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से यह शक्ति-प्रत्यायोजन लागू किया गया है।
किन केंद्र शासित प्रदेशों को मिली शक्तियाँ
राष्ट्रपति के आदेश के अनुसार दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी, चंडीगढ़, लद्दाख और लक्षद्वीप के प्रशासक इस अधिनियम के तहत शक्तियों का प्रयोग करेंगे।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ये अधिकार 'राष्ट्रपति के नियंत्रण के अधीन रहते हुए और अगले आदेश तक' प्रभावी रहेंगे — अर्थात यह प्रत्यायोजन स्थायी नहीं, बल्कि वापस लिए जाने योग्य है।
राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम 2023 क्या है
राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 (अधिनियम संख्या 21 ऑफ 2023) ने दशकों पुराने दंत चिकित्सक विधेयक, 1948 को निरस्त कर भारतीय दंत परिषद (DCI) का स्थान नई संस्था राष्ट्रीय दंत आयोग (NDC) को सौंप दिया। यह अधिनियम देश में दंत चिकित्सा शिक्षा, पेशे और मौखिक स्वास्थ्य सेवाओं को विनियमित करता है।
गौरतलब है कि यह कानून राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की तर्ज पर बनाया गया है और इसे चिकित्सा शिक्षा के व्यापक सुधार-ढाँचे का हिस्सा माना जाता है।
अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ
इस अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय दंत आयोग और राज्य दंत परिषदों का गठन किया गया है, साथ ही तीन स्वायत्त बोर्डों का प्रावधान है। आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और सचिव के लिए निश्चित कार्यकाल तय किया गया है — पुनर्नियुक्ति की कोई संभावना नहीं रखी गई है। इसके अतिरिक्त ऑनलाइन राष्ट्रीय रजिस्टर, दंत सलाहकार परिषद और योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया का भी प्रावधान है।
यह अधिनियम आयोग को निजी दंत चिकित्सालयों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटों के लिए शुल्क निर्धारण हेतु दिशानिर्देश तैयार करने का अधिकार भी देता है — जो किफायती दंत शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्र शासित प्रदेशों पर असर
इस प्रत्यायोजन के बाद केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन अपने-अपने क्षेत्रों में दंत महाविद्यालयों की मान्यता, पाठ्यक्रम निगरानी और नियामक निर्णयों में सीधी भागीदारी कर सकेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब कई केंद्र शासित प्रदेशों — विशेषकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।
यह अधिनियम राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, भारतीय फार्मेसी परिषद, भारतीय नर्सिंग परिषद और अन्य स्वास्थ्य नियामक निकायों के साथ समन्वय की सुविधा भी प्रदान करता है, जो एकीकृत स्वास्थ्य-शिक्षा नियामक पारिस्थितिकी तंत्र की ओर संकेत करता है।
आगे की राह
अधिसूचना के लागू होने के बाद सभी प्रभावित केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन इस अधिकार का प्रयोग तब तक करते रहेंगे जब तक कोई नया आदेश जारी न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दंत चिकित्सा नियामक ढाँचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने और भारतीय दंत चिकित्सकों की वैश्विक रोज़गार क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक व्यावहारिक प्रशासनिक पहल है।