गुजरात किसानों ने ई-नाम से बेची 3.20 करोड़ क्विंटल उपज, ₹12,740 करोड़ का कारोबार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के किसानों ने राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए अब तक 3.20 करोड़ क्विंटल से अधिक कृषि उपज बेची है, जिससे कुल ₹12,740.60 करोड़ का व्यापार हुआ है। 23 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, राज्य की 144 मंडियाँ इस मंच से जुड़ी हैं और 8,69,922 किसान इसके माध्यम से अपनी उपज का सौदा कर रहे हैं।
ई-नाम: क्या है यह मंच
केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी ई-नाम की शुरुआत की थी। यह एक ऑनलाइन कृषि व्यापार मंच है, जो कृषि उपज मंडी समितियों को एकीकृत डिजिटल बाजार से जोड़ता है। इसका संचालन केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत स्मॉल फार्मर्स एग्रीबिजनेस कंसोर्टियम द्वारा किया जाता है।
इस मंच का उद्देश्य किसानों को अधिक खरीदारों तक पहुँच, गुणवत्ता आधारित बेहतर मूल्य और पारदर्शी लेनदेन की सुविधा देना है। ऑनलाइन नीलामी प्रणाली के ज़रिए मांग और आपूर्ति के आधार पर मूल्य निर्धारित होता है, जिससे खरीदार और विक्रेता के बीच सूचना का अंतर कम होता है।
गुजरात में हितधारकों की संख्या
आँकड़ों के अनुसार, गुजरात में ई-नाम पर कुल 8,87,865 हितधारक पंजीकृत हैं। इनमें 8,69,922 किसान, 10,291 व्यापारी, 7,191 कमीशन एजेंट और 461 किसान उत्पादक संगठन (FPO) शामिल हैं। राज्य की 144 मंडियाँ इस डिजिटल मंच से सीधे जुड़ी हुई हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कृषि विपणन को डिजिटल बनाने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं और किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने की माँग लगातार उठ रही है।
किसानों का अनुभव: सीधे उनकी ज़ुबानी
ऊना मार्केट कमेटी से जुड़े किसान परबतभाई पटाट पिछले एक वर्ष से ई-नाम के माध्यम से मूंगफली बेच रहे हैं। उनके अनुसार यह प्रक्रिया पारंपरिक मंडियों की तुलना में अधिक तेज़ और सुविधाजनक है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक बिक्री पर ₹200 से ₹500 अतिरिक्त मिलते हैं, जिससे उनकी कुल आय में लगभग 5 से 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
परबतभाई के शब्दों में, 'प्रक्रिया काफी तेज़ है और हमें उपज का अच्छा मूल्य मिलता है। साथ ही भुगतान सीधे बैंक खाते में आने से लेनदेन आसान हो गया है।'
उपलेटा मार्केट कमेटी से जुड़े किसान हर्ष घोडासरा पिछले पाँच वर्षों से कपास, मूंगफली और गेहूँ की बिक्री ई-नाम के ज़रिए कर रहे हैं। उनका दावा है कि इस मंच से उनकी आय स्थानीय बाज़ारों की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी है। हर्ष ने कहा, 'व्यापारियों से सीधे संपर्क होने के कारण कमीशन की बचत होती है और भुगतान सीधे खाते में आ जाता है।'
राज्य सरकार की भूमिका
गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि विपणन को डिजिटल बनाने और किसानों को स्थानीय बाज़ारों से परे व्यापक व्यापारिक अवसर दिलाने के लिए ई-नाम को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। गौरतलब है कि गुजरात देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल है जहाँ ई-नाम की पहुँच और लेनदेन की मात्रा सबसे अधिक रही है।
आगे की राह
ई-नाम मंच के विस्तार और किसानों की बढ़ती भागीदारी से कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता की दिशा में सकारात्मक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता में और सुधार हो, तो छोटे और सीमांत किसान भी इस मंच का पूरा लाभ उठा सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य राज्य भी गुजरात के इस मॉडल को अपनाते हैं।