26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएम-किसान योजना: गुजरात के 69.25 लाख किसान परिवारों को 22 किश्तों में ₹23,083 करोड़ से अधिक का सीधा लाभ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएम-किसान योजना: गुजरात के 69.25 लाख किसान परिवारों को 22 किश्तों में ₹23,083 करोड़ से अधिक का सीधा लाभ

सारांश

गुजरात में पीएम-किसान योजना की 22 किश्तों का सफर — 28.65 लाख किसानों और ₹572 करोड़ से शुरू होकर आज 69.25 लाख परिवारों और ₹23,083 करोड़ से अधिक तक। थ्री-लेयर डिजिटल सत्यापन ने बिचौलियों को खत्म कर सीधे अन्नदाता तक रकम पहुँचाई।

मुख्य बातें

पीएम-किसान योजना के तहत गुजरात के 69.25 लाख से अधिक किसान परिवारों को 22 किश्तों में ₹23,083 करोड़ से अधिक की सहायता राशि सीधे बैंक खातों में भेजी गई।
22वीं किश्त में 50.54 लाख से अधिक किसान परिवारों को ₹1,010 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर देश के 11 करोड़ से अधिक किसानों को कुल ₹4.27 लाख करोड़ से अधिक की सहायता दी जा चुकी है।
योजना में लैंड सीडिंग , आधार सीडिंग और ई-केवाईसी की थ्री-लेयर प्रणाली से बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त की गई।
शुरुआती 2 हेक्टेयर भूमि सीमा समाप्त होने के बाद अब राज्य के सभी भूमिधारक किसान योजना के पात्र हैं।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान) के अंतर्गत गुजरात के 69.25 लाख से अधिक किसान परिवारों को योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 22 किश्तों में ₹23,083 करोड़ से अधिक की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। 9 जून 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से बिना किसी बिचौलिए के किसानों तक पहुँचाई गई है।

योजना का विस्तार और प्रमुख आंकड़े

गुजरात में पीएम-किसान योजना की यात्रा पहली किश्त से शुरू हुई थी, जब राज्य के 28.65 लाख से अधिक किसानों को ₹572.21 करोड़ का भुगतान किया गया था। 22वीं किश्त तक पहुँचते-पहुँचते लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 69.25 लाख से अधिक हो गई है। हाल ही में जारी 22वीं किश्त में 50.54 लाख से अधिक किसान परिवारों को ₹1,010 करोड़ से अधिक की राशि सीधे खातों में जमा की गई।

राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो इस योजना के अंतर्गत देश के 11 करोड़ से अधिक किसानों को अब तक कुल ₹4.27 लाख करोड़ से अधिक की सहायता का भुगतान किया जा चुका है। आंकड़ों के अनुसार, यह योजना भारत के कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण पहलों में से एक बन चुकी है।

किसानों पर ज़मीनी असर

गांधीनगर जिले के दशेला गांव के किसान गोविंदभाई पटेल कहते हैं, 'सरकार की ओर से वर्ष में जो तीन किश्तें सीधे बैंक खाते में मिलती हैं, उससे हमें खेती के लिए खाद, बीज तथा कीटनाशक जैसी वस्तुएँ लेने में समय पर मदद मिल जाती है। इस राशि के कारण हम मूंगफली और कपास जैसी फसलों की बुवाई निश्चिंत होकर कर पाते हैं।'

एक अन्य किसान रमेशभाई पटेल के अनुसार, 'मजदूरी, डीजल और मेंटेनेंस जैसे छोटे खर्चों से निपटने में ऐसी सरकारी योजनाएं ही किसान को खेत में अडिग बने रहने के लिए मजबूत आधार प्रदान करती हैं।' गौरतलब है कि पूर्व में खरीफ और रबी बुवाई के समय छोटे किसानों को बीज, उर्वरक और कीटनाशक खरीदने के लिए साहूकारों पर निर्भर रहना पड़ता था।

सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य के कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने कहा, 'पीएम किसान सम्मान निधि योजना ने धरतीपुत्रों को आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान किया है। इस सहायता के कारण छोटे और सीमांत किसानों को खेती में आवश्यक बीज, उर्वरक जैसे इनपुट के लिए आर्थिक मदद प्राप्त होती है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि योजना में शुरुआत में रखी गई 2 हेक्टेयर की भूमि सीमा को समाप्त किए जाने के बाद अब राज्य के सभी भूमिधारक किसान इसके पात्र हो गए हैं।

तकनीक से पारदर्शिता: थ्री-लेयर सुरक्षा प्रणाली

योजना में बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त करने के लिए सरकार ने तीन स्तरीय सत्यापन प्रणाली लागू की है। 12वीं किश्त से भूमि के डिजिटल रिकॉर्ड का सत्यापन यानी 'लैंड सीडिंग' अनिवार्य किया गया। 13वीं किश्त से बैंक खाते के साथ 'आधार सीडिंग' और डीबीटी प्रक्रिया जोड़ी गई, और 15वीं किश्त से 'ई-केवाईसी' को अनिवार्य कर दिया गया।

इस थ्री-लेयर सुरक्षा तंत्र के परिणामस्वरूप योजना का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक पहुँचना सुनिश्चित हुआ है और भूमि उत्पादकता में भी सुधार दर्ज किया गया है। आगे चलकर योजना की पहुँच और पारदर्शिता में और विस्तार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

083 करोड़ के आंकड़े निस्संदेह प्रभावशाली हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि प्रति किसान परिवार सालाना ₹6,000 की यह राशि बढ़ती कृषि लागत — बीज, डीजल, उर्वरक — के मुकाबले कितनी पर्याप्त है। यह ऐसे समय में आया है जब किसान संगठन लंबे समय से इस राशि को बढ़ाने की माँग करते रहे हैं। डीबीटी और थ्री-लेयर सत्यापन प्रणाली पारदर्शिता की दृष्टि से सराहनीय कदम है, परंतु पात्र किसानों की संख्या में उतार-चढ़ाव — पहली किश्त में 28.65 लाख से 22वीं किश्त में 50.54 लाख — यह भी संकेत देता है कि एक बड़ा वर्ग अभी भी सत्यापन की बाधाओं से जूझ रहा है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-किसान योजना के तहत गुजरात को अब तक कितनी राशि मिली है?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गुजरात के 69.25 लाख से अधिक किसान परिवारों को योजना की शुरुआत से 22 किश्तों में ₹23,083 करोड़ से अधिक की सहायता राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।
पीएम-किसान की 22वीं किश्त में गुजरात के कितने किसानों को लाभ मिला?
22वीं किश्त में गुजरात के 50.54 लाख से अधिक किसान परिवारों को ₹1,010 करोड़ से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में जमा की गई।
पीएम-किसान योजना में बिचौलियों को कैसे रोका गया है?
सरकार ने तीन स्तरीय डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू की है — 12वीं किश्त से लैंड सीडिंग, 13वीं से आधार सीडिंग और 15वीं से ई-केवाईसी अनिवार्य है। इससे 100 प्रतिशत राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में जाती है।
क्या गुजरात के सभी किसान पीएम-किसान योजना के पात्र हैं?
हाँ, योजना में पहले रखी गई 2 हेक्टेयर भूमि की सीमा समाप्त किए जाने के बाद अब राज्य के सभी भूमिधारक किसान इस योजना का लाभ उठाने के पात्र हैं।
पीएम-किसान योजना के तहत किसानों को कितनी राशि और कब मिलती है?
इस योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को हर चार महीने के अंतराल पर ₹2,000 की किश्त दी जाती है, यानी एक वर्ष में कुल ₹6,000 तीन किश्तों में सीधे बैंक खाते में अंतरित होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले