गुजरात में 63.35 लाख किसानों का फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन को मिली रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात में 63.35 लाख से अधिक किसानों ने फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण करा लिया है, जिससे राज्य की कृषि व्यवस्था एक एकीकृत डिजिटल ढाँचे पर आधारित होती जा रही है। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन (DAM) के तहत यह पहल किसानों को आधार-आधारित यूनिक फार्मर आईडी देकर उन्हें सरकारी कृषि योजनाओं से सीधे और पारदर्शी तरीके से जोड़ रही है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात इस राष्ट्रीय डिजिटल कृषि सुधार को ज़मीन पर उतारने में अग्रणी राज्यों में शुमार हो रहा है।
फार्मर रजिस्ट्री की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को गति देने के लिए डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन के अंतर्गत फार्मर रजिस्ट्री को किसानों के एक विश्वसनीय और केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें किसान की पहचान, उनकी ज़मीन के दस्तावेज़ और सरकारी सेवाओं तक पहुँच को एक ही मंच पर समेटा गया है।
गौरतलब है कि अब तक किसानों को हर सरकारी योजना के लिए अपनी व्यक्तिगत जानकारी, भूमि-विवरण और पात्रता के दस्तावेज़ बार-बार प्रस्तुत करने और सत्यापित कराने पड़ते थे। यह पहल उसी दोहराव को खत्म करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
पंजीकरण प्रक्रिया कैसे काम करती है
फार्मर आईडी की पंजीकरण प्रक्रिया को किसान-अनुकूल बनाया गया है। किसान अपने मोबाइल फोन से या सरकार-समर्थित सेवा केंद्रों की सहायता से पंजीकरण करा सकते हैं। प्रक्रिया में सबसे पहले आधार प्रमाणीकरण होता है, जिसके बाद किसान और उसकी भूमि से जुड़ी जानकारी सत्यापित की जाती है।
सत्यापन के बाद किसान की पहचान को भूमि रिकॉर्ड से डिजिटल रूप से जोड़कर एक यूनिक फार्मर आईडी तैयार की जाती है। यदि पंजीकरण के दौरान किसी भूमि का सर्वे नंबर छूट जाए, तो अपडेट फार्मर रिक्वेस्ट (UFR) सुविधा के ज़रिए उसे बाद में जोड़ा जा सकता है।
अधिकारियों और मंत्रियों के बयान
राजस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. जयंती एस. रवि ने कहा, 'इस व्यवस्था में किसान की आधार-आधारित पहचान को भूमि के रिकॉर्ड के साथ जोड़ा जाता है। फार्मर रजिस्ट्री के ज़रिए किसानों को यूनिक फार्मर आईडी दिया जाता है, जिससे वे विभिन्न सरकारी कृषि योजनाओं और सेवाओं का लाभ और भी सरल, तेज़ और पारदर्शी तरीके से प्राप्त कर सकते हैं।'
उन्होंने यह भी कहा, 'यह पहल केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है — यह किसानों और सरकारी सेवाओं के बीच के संबंध को अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।'
कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने कहा, 'फार्मर रजिस्ट्री का उद्देश्य एक साझा डिजिटल पहचान बनाकर योजनाओं का लाभ उठाने में होने वाले कार्यों के दोहराव को खत्म करना है।'
किन योजनाओं में होगा सीधा फायदा
फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण के बाद किसान पीएम किसान सम्मान निधि योजना, मूल्य समर्थन योजना (PSS) / न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत सरकारी खरीद, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और कृषि ऋण जैसी योजनाओं का लाभ अधिक सुगमता से उठा सकते हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न सब्सिडी और कृषि सहायता योजनाओं तथा डिजिटल कृषि सेवाओं तक पहुँच भी आसान होगी।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूरे देश में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन को गति देने पर ज़ोर दे रही है और गुजरात अपनी तेज़ क्रियान्वयन गति के चलते एक मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है। भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और आधार-आधारित पहचान के एकीकरण से भविष्य में कृषि ऋण वितरण, बीमा दावों और फसल क्षति मुआवज़े की प्रक्रिया भी स्वचालित और पारदर्शी होने की संभावना है।