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फार्मर रजिस्ट्री 30 अप्रैल तक 100% पूरी करने का लक्ष्य, 15 मई से बिना ID नहीं मिलेगा खाद-बीज

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फार्मर रजिस्ट्री 30 अप्रैल तक 100% पूरी करने का लक्ष्य, 15 मई से बिना ID नहीं मिलेगा खाद-बीज

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अप्रैल 2026 तक 100% फार्मर रजिस्ट्री पूरी करने का लक्ष्य रखा है। 15 मई से Farmer ID अनिवार्य होगी — बिना इसके खाद, बीज व योजनाओं का लाभ नहीं। जायद 2026 के लिए 1 से 31 मई तक डिजिटल क्रॉप सर्वे भी होगा।

मुख्य बातें

30 अप्रैल 2026 तक उत्तर प्रदेश में 100% फार्मर रजिस्ट्री पूरी करने का सरकारी लक्ष्य निर्धारित।
15 मई 2026 से Farmer ID अनिवार्य — बिना ID के खाद, बीज और सरकारी योजनाओं का लाभ बंद।
कम पंजीकरण वाले गांवों पर विशेष फोकस; ग्राम प्रधानों और लाउडस्पीकर के जरिए जागरूकता अभियान।
पीएम किसान लाभार्थी और गैर-लाभार्थी — सभी भूमिधर किसानों को रजिस्ट्री में शामिल किया जाएगा।
28 अप्रैल 2026 को जिला टीमों को डिजिटल क्रॉप सर्वे का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
1 मई से 31 मई 2026 तक जायद 2026 के लिए पूरे प्रदेश में डिजिटल फसल सर्वे अभियान।

लखनऊ, 23 अप्रैल 2026 (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार ने जायद 2026 सीजन से पहले फार्मर रजिस्ट्री अभियान को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि 30 अप्रैल 2026 तक प्रदेश के 100 प्रतिशत भूमिधर किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही 15 मई 2026 से Farmer ID अनिवार्य कर दी जाएगी — बिना इसके किसानों को सरकारी कृषि योजनाओं, उर्वरक और बीज का लाभ नहीं मिल सकेगा।

किन गांवों पर है विशेष फोकस?

अभियान के तहत विशेष रूप से उन ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां अब तक रजिस्ट्री का सैचुरेशन स्तर कम है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे गांवों में विशेष शिविर लगाकर किसानों का पंजीकरण पूरा किया जाए।

इस अभियान में पीएम किसान योजना के लाभार्थियों के साथ-साथ उन सभी किसानों को भी शामिल किया जाएगा जो अब तक किसी सरकारी योजना से नहीं जुड़े हैं। यानी हर वह व्यक्ति जिसके नाम कृषि भूमि दर्ज है, उसे इस रजिस्ट्री में शामिल करना अनिवार्य होगा।

जागरूकता के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?

किसानों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन को व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें लाउडस्पीकर के माध्यम से गांव-गांव घोषणाएं, स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन और ग्राम प्रधानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी के चलते बड़ी संख्या में किसान अभी तक ऑनलाइन पोर्टल तक नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में ग्राम प्रधानों और लेखपालों की भूमिका अत्यंत निर्णायक होगी।

15 मई से Farmer ID अनिवार्य — क्या होगा असर?

सरकार ने साफ कर दिया है कि 15 मई 2026 के बाद बिना Farmer ID के कोई भी किसान सरकारी उर्वरक, बीज अनुदान या कृषि योजनाओं का लाभ नहीं उठा सकेगा। यह फैसला उन किसानों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है जो अभी तक पंजीकरण से वंचित हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि Farmer ID लागू होने से सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता आएगी और फर्जी लाभार्थियों पर लगाम लगेगी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की डिजिटल कृषि मिशन नीति के तहत देशभर में किसान डेटाबेस तैयार करने की योजना चल रही है, जिसका उत्तर प्रदेश एक प्रमुख पायलट राज्य है।

जायद 2026 के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे की तैयारी

फार्मर रजिस्ट्री के समानांतर जायद 2026 के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे भी निर्धारित समय-सीमा में शुरू किया जाएगा। 28 अप्रैल 2026 को जिला स्तरीय टीमों को इस सर्वे के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

1 मई से 31 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में यह सर्वे अभियान चलाया जाएगा। इस डिजिटल सर्वे के माध्यम से फसलों का सटीक आकलन किया जाएगा, जिससे सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा और किसानों को समय पर मुआवजा व सहायता मिल सकेगी।

तुलनात्मक दृष्टिकोण से देखें तो महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में भी इसी तर्ज पर डिजिटल फार्मर रजिस्ट्री लागू की जा चुकी है, लेकिन उत्तर प्रदेश की विशाल कृषि आबादी — जो देश के कुल किसानों का लगभग 18 प्रतिशत है — को देखते हुए यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल बन सकता है।

आने वाले दिनों में 30 अप्रैल की समयसीमा और 15 मई की अनिवार्यता यह तय करेगी कि उत्तर प्रदेश का कृषि डिजिटलीकरण अभियान कितना सफल रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सब्सिडी रिसाव रोकने और डेटा-आधारित कृषि नीति बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन असली सवाल यह है कि जिस राज्य में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता अभी भी असमान है, वहां महज एक सप्ताह में 100% पंजीकरण का लक्ष्य कितना यथार्थवादी है? 15 मई की अनिवार्यता उन सीमांत किसानों पर भारी पड़ सकती है जो तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से पंजीकरण नहीं करा पाते। सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि यह डिजिटल क्रांति किसी किसान को योजनाओं से बाहर करने का औजार न बने, बल्कि उन्हें जोड़ने का माध्यम बने।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी में फार्मर रजिस्ट्री की अंतिम तारीख क्या है?
उत्तर प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री की अंतिम तारीख 30 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। सरकार का लक्ष्य इस तारीख तक 100 प्रतिशत भूमिधर किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित करना है।
Farmer ID न होने पर किसानों को क्या नुकसान होगा?
15 मई 2026 से Farmer ID अनिवार्य हो जाएगी। बिना इसके किसानों को सरकारी उर्वरक, बीज अनुदान और किसी भी कृषि योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
जायद 2026 का डिजिटल क्रॉप सर्वे कब होगा?
जायद 2026 के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे 1 मई से 31 मई 2026 तक पूरे उत्तर प्रदेश में चलाया जाएगा। इससे पहले 28 अप्रैल को जिला स्तरीय टीमों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
क्या पीएम किसान योजना से बाहर के किसान भी फार्मर रजिस्ट्री में शामिल होंगे?
हां, इस अभियान में सभी भूमिधर किसान शामिल होंगे, चाहे वे पीएम किसान योजना के लाभार्थी हों या नहीं। हर वह किसान जिसके नाम कृषि भूमि दर्ज है, उसे पंजीकरण कराना होगा।
फार्मर रजिस्ट्री के लिए जागरूकता कैसे फैलाई जाएगी?
जिला प्रशासन लाउडस्पीकर घोषणाओं, स्थानीय अखबारों में विज्ञापन और ग्राम प्रधानों की सक्रिय भागीदारी के जरिए जागरूकता फैलाएगा। कम सैचुरेशन वाले गांवों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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