11 अगस्त 2026
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क्या उपचुनाव में जीत के बाद केजरीवाल बेतुके बयान दे रहे हैं? : संजय निरुपम

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क्या उपचुनाव में जीत के बाद केजरीवाल बेतुके बयान दे रहे हैं? : संजय निरुपम

सारांश

क्या केजरीवाल के बयान में सच्चाई है? जानिए संजय निरुपम का क्या कहना है उपचुनाव में जीत के बाद। राजनीति में इस बयान के क्या अर्थ हैं, जानें इस रिपोर्ट में।

मुख्य बातें

केजरीवाल ने विवादास्पद बयान दिया।
निरुपम ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
भाजपा और कांग्रेस के रिश्ते पर सवाल।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तानियों की गतिविधियों पर चिंता।
कांवड़ यात्रा पर धार्मिक भावनाओं का सम्मान।

मुंबई, 3 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के रिश्ते को "प्रेमी-प्रेमिका जैसा" करार दिया है। इस बयान पर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने केजरीवाल पर हमला करते हुए कहा कि वे अचानक उपचुनाव में जीत के बाद बेतुके बयान देने लगे हैं।

संजय निरुपम ने गुरुवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "दिल्ली में बुरी तरह हारने वाले अरविंद केजरीवाल अब उपचुनाव में एक-दो जीत के बाद ऐसे बेतुके बयान दे रहे हैं जैसे "बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा हो"।

उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी यह नहीं सोच सकता कि भाजपा और कांग्रेस एक साथ आ सकते हैं। कांग्रेस की नीतियों ने देश को तबाह किया है, इसलिए भाजपा हमेशा कांग्रेस का विरोध करती रही है और उनके खिलाफ खड़ी होकर सरकार बनाई है। एनडीए का कांग्रेस से कोई समझौता करना बेवकूफी है।

पाकिस्तानी कलाकारों के सोशल मीडिया अकाउंट से बैन हटने पर निरुपम ने कहा कि भारत सरकार ने "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत पाकिस्तान के कुछ प्रभावशाली लोगों और कलाकारों के भारत विरोधी सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक किया था। इससे उनका भारत-विरोधी दुष्प्रचार रुक गया था, लेकिन अब अचानक खबर आई है कि वे अकाउंट्स फिर से सक्रिय हो गए हैं, जो चिंताजनक है। ऐसे लोगों को दोबारा ब्लॉक किया जाना चाहिए। सरकार को इस पर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।

बिहार चुनाव में चंद्रशेखर और ओवैसी के साथ आने के सवाल पर निरुपम ने कहा कि सभी पार्टियाँ स्वतंत्र हैं और उन्हें चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। लेकिन बिहार की जनता को यह तय करना होगा कि जो नेता केवल चुनाव के समय सामने आते हैं, वे कितने उपयोगी हैं। उन्हें वोट देने या न देने से जनता को क्या लाभ या हानि होगी, इसका मूल्यांकन जनता को खुद करना चाहिए।

इसके अलावा, कांवड़ यात्रा में "दुकानों के लाइसेंस" मुद्दे पर ओवैसी के बयान "गुंडागर्दी रोके सरकार" की निरुपम ने निंदा की। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा शिवभक्तों की एक पवित्र यात्रा है, जिसमें श्रद्धालु लंबी दूरी तय कर भगवान शंकर का जलाभिषेक करते हैं। ओवैसी द्वारा इसे गुंडागर्दी कहना निंदनीय है और उन्हें अपना बयान तुरंत वापस लेना चाहिए। हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ भी महत्वपूर्ण हैं। जैसे हम मुस्लिम धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं, वैसे ही हमारी भावनाओं को भी ठेस नहीं पहुंचाई जानी चाहिए। कांवड़ यात्रा के दौरान सात्विकता और शुद्धता बनाए रखना हमारी परंपरा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या केजरीवाल का बयान सही है?
यह सवाल राजनीतिक दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। कुछ लोग इसे सही मान सकते हैं जबकि अन्य इसे बेतुका मानते हैं।
क्या भाजपा और कांग्रेस कभी एक साथ आ सकते हैं?
यह संभावना बहुत कम है, क्योंकि दोनों दलों के बीच ऐतिहासिक विरोधाभास हैं।
क्या निरुपम का बयान महत्वपूर्ण है?
हाँ, निरुपम का बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया दर्शाता है और सियासी हलचल को बढ़ा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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