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क्या हर उम्र के छात्रों के लिए निशुल्क ई-बुक्स उपलब्ध हैं?

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क्या हर उम्र के छात्रों के लिए निशुल्क ई-बुक्स उपलब्ध हैं?

सारांश

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने डिजिटल पहल के तहत राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। इस पहल में 6000 से अधिक निशुल्क ई-बुक्स सभी उम्र के छात्रों के लिए उपलब्ध हैं, जो ज्ञान और मनोरंजन का अद्भुत स्रोत हैं। पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए यह योजना महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

6000 से अधिक निशुल्क ई-बुक्स की उपलब्धता।
हर उम्र के छात्रों के लिए उपयुक्त सामग्री।
पठन संस्कृति को प्रोत्साहन देने की योजना।
23 विभिन्न भारतीय भाषाओं में किताबें।
मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से पढ़ाई की सुविधा।

दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, डिजिटल पहल के अंतर्गत राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय कार्यक्रम का संचालन कर रहा है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, केंद्र सरकार की इस योजना के तहत अब 6000 से अधिक निशुल्क ई-पुस्तकें देश भर के पाठकों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

इसके साथ ही, साल 2026 को पठन वर्ष के रूप में चिन्हित करने का आह्वान किया जा रहा है। यह कदम इस उद्देश्य से उठाया जा रहा है कि देश में पढ़ने की संस्कृति और आदत को और अधिक प्रोत्साहन मिले। शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय नामक इस महत्वपूर्ण डिजिटल लाइब्रेरी प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। अब इसमें जो 6000 से अधिक निशुल्क ई-पुस्तकें पाठकों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं, उनमें सभी आयु वर्ग के छात्रों का ध्यान रखा गया है।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह पहल सभी आयु के पाठकों के लिए है, लेकिन विशेषकर बच्चों और किशोरों के लिए ज्ञान, मनोरंजन और सीखने के अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। बच्चों और किशोरों के ज्ञान में वृद्धि के उद्देश्य से यह शुरुआत की गई है।

वास्तव में, राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एक राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी है, जिसे शिक्षा मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है। इस लाइब्रेरी में हास्य, साहित्य, इतिहास, विज्ञान, जीवनी, कविता, कॉमिक्स, और अन्य कई विषयों की निशुल्क ई-पुस्तकें शामिल हैं, जो विभिन्न उम्र के पाठकों के लिए उपयुक्त हैं।

इस लाइब्रेरी की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसे देश के हर राज्य व प्रत्येक हिस्से को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसलिए, यहां 23 अलग-अलग भारतीय भाषाओं में किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। इसका एक बड़ा लाभ यह है कि इस ई-पुस्तकालय की पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक सुनिश्चित होती है। ये ई-पुस्तकें वेब, एंड्रॉइड और आइओएस ऐप सभी प्लेटफॉर्म पर पढ़ी जा सकती हैं।

इस पहल के तहत एक खास मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित की गई है। इस मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से पाठक कहीं भी, कभी भी ई-पुस्तकें पढ़ सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस ऐप में उम्र के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में पुस्तकें प्राप्त करने और पढ़ाने की सुविधा है। आयु के आधार पर 3 से 8 वर्ष, 8 से 11 वर्ष, 11 से 14 वर्ष14 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए किताबें खोजने की सुविधा उपलब्ध है।

यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत अध्यात्म और सीखने के अनुभव को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। शिक्षाविदों का मानना है कि यह डिजिटल लाइब्रेरी शैक्षणिक पुस्तकालयों और पारंपरिक पुस्तकों तक सीमित पहुंच के चक्र को तोड़ती है। साथ ही, यह लाइब्रेरी हर क्षेत्र के छात्रों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई का अवसर भी देती है।

ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के छात्रों को भी सुलभ ज्ञान संसाधन उपलब्ध कराना इस पहल का एक प्रमुख लक्ष्य है। इससे शिक्षा में समान अवसर भी सुनिश्चित हो पाएंगे। सरकार का मानना है कि यह पहल पढ़ने की आदत को बढ़ावा देगी और युवाओं में ज्ञानवर्धन, सांस्कृतिक सजगता और रचनात्मकता को मजबूती देगी। शिक्षा मंत्रालय और नेशनल बुक ट्रस्ट मिलकर इस प्लेटफॉर्म को और व्यापक बनाने पर काम कर रहे हैं ताकि आने वाले वर्षों में इसमें और भी अधिक पुस्तकों और भाषाओं का समावेश हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बच्चों और किशोरों में पढ़ने की आदत को भी बढ़ावा देती है। यह कार्यक्रम निश्चित रूप से देश की शिक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय किसके द्वारा विकसित किया गया है?
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय का विकास केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया गया है।
इस कार्यक्रम में कितनी ई-बुक्स उपलब्ध हैं?
इस कार्यक्रम में 6000 से अधिक निशुल्क ई-बुक्स उपलब्ध हैं।
क्या यह ई-बुक्स सभी उम्र के छात्रों के लिए हैं?
हाँ, यह ई-बुक्स सभी उम्र के छात्रों के लिए उपयुक्त हैं।
क्या यह ई-बुक्स मोबाइल पर पढ़ी जा सकती हैं?
जी हाँ, ये ई-बुक्स वेब, एंड्रॉइड और आइओएस ऐप पर पढ़ी जा सकती हैं।
क्या इस पहल का उद्देश्य शिक्षा में समान अवसर प्रदान करना है?
हाँ, इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों को भी सुलभ ज्ञान संसाधन उपलब्ध कराना है।
राष्ट्र प्रेस
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