3 मार्च को होगा साल का पहला चंद्रग्रहण: जानें आपकी राशि पर प्रभाव
सारांश
Key Takeaways
- 3 मार्च को साल का पहला चंद्रग्रहण होगा।
- ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण का अर्थ है चंद्रमा का उदय ग्रहण में होना।
- सिंह राशि पर इसका विशेष प्रभाव होगा।
- चूड़ामणि योग में दान-पुण्य का महत्व बढ़ जाता है।
- ग्रहण के बाद विशेष पूजा-पाठ करने की सलाह दी गई है।
उज्जैन, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। एक अद्भुत खगोलीय घटना 3 मार्च को होने जा रही है। यह साल का पहला चंद्रग्रहण होगा, जिसे ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण कहा जाएगा। उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित अक्षत व्यास ने राष्ट्र प्रेस के साथ इस ग्रहण के महत्व पर विशेष जानकारी साझा की।
पंडित व्यास ने बताया कि यह ग्रहण इसलिए ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण कहलाता है, क्योंकि जब चंद्रमा उदय होगा, तब वह पहले से ही ग्रहण की स्थिति में होगा। अर्थात्, जैसे ही चांद निकलेगा, उसे ग्रहण की अवस्था में देखा जा सकेगा। उन्होंने कहा, "चंद्रमा के उदय के समय ग्रहण में होगा। यह सोमवार की शाम को हो रहा है, इसलिए इसे चूड़ामणि योग भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस योग में दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य एवं आध्यात्मिक लाभ होता है।"
उन्होंने आगे कहा, "चंद्रग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा, लेकिन उस समय चाँद आसमान में नहीं होगा। भारत में चंद्रमा शाम लगभग 6:26 से 6:32 बजे तक उदित होगा और तब से ग्रहण देखा जा सकेगा। यह शाम 6:46 से 6:47 बजे तक समाप्त होगा। अर्थात, भारत में यह ग्रहण केवल 14-20 मिनटों तक ही दिखाई देगा।"
पंडित व्यास ने ग्रहण के संभावित प्रभावों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, "फाल्गुन महीने (2 फरवरी से 3 मार्च) में 5 मंगलवार हैं। चंद्रग्रहण का प्रभाव लोगों में नाखुशी ला सकता है। यह राजनीतिक उथल-पुथल, झगड़े, सड़क दुर्घटनाएं या समुद्री तूफान जैसी घटनाओं का संकेत कर सकता है।"
उन्होंने बताया कि चंद्रग्रहण का प्रभाव राशियों पर भी पड़ेगा। विशेषकर सिंह राशि पर इसका सबसे अधिक प्रभाव होगा, क्योंकि ग्रहण सिंह राशि में प्रारंभ होगा। कन्या और मकर राशि के लोगों को भी सावधान रहने की सलाह दी गई है। सिंह राशि के जातकों को विशेष पूजा-पाठ करना चाहिए। सिंह और मकर राशि वाले ग्रहण के बाद स्नान करें, तांबे के कटोरे में घी भरें, उस पर चांदी का चंद्रमा, सोने का सूरज और नाग रखें। इसके बाद घाट पर जाकर ब्राह्मणों को दान देने का संकल्प लें। इससे दुर्भाग्य से मुक्ति संभव है।