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मां बाराही मंदिर: अद्भुत सुरंग पूजा और नेत्र रोगों से मुक्ति का अनोखा स्थान

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मां बाराही मंदिर: अद्भुत सुरंग पूजा और नेत्र रोगों से मुक्ति का अनोखा स्थान

सारांश

मां बाराही मंदिर, गोंडा जिले में स्थित, अद्भुत मान्यताओं का केंद्र है। यहां की सुरंग पूजा से नेत्र रोगों में राहत मिलती है। जानें इस मंदिर के रहस्यमय इतिहास और आस्था के बारे में।

मुख्य बातें

मां बाराही मंदिर में सुरंग की पूजा होती है।
नेत्र रोगों के लिए मंदिर में विशेष मान्यता है।
यह मंदिर संतान सुख के लिए भी प्रसिद्ध है।
नवरात्र में भक्तों की भारी भीड़ आती है।
मां बाराही को उत्तरी भवानी भी कहा जाता है।

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत में मां सती के 51 शक्तिपीठ मंदिर मौजूद हैं, और प्रत्येक मंदिर की अपनी विशेष आस्था एवं पौराणिक महत्व है।

हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित मां बाराही मंदिर की। यहां मान्यता है कि मां के दर्शन के बाद आंखों पर पानी डालने से नेत्र रोगों से छुटकारा मिलता है। यही कारण है कि यह मंदिर पूर्वांचल यूपी में आस्था का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

मां बाराही का यह मंदिर हजारों वर्षों पुराना है, और यहां मां की प्रतिमा एक विशाल पत्थर के रूप में स्थापित है। इस पत्थर के नीचे एक छोटा सा स्थान है, जहां मां की ज्योति हमेशा जलती रहती है। गर्भगृह में मां दुर्गा की अष्टभुजी प्रतिमा भी स्थापित है। मां बाराही देवी का प्रतिदिन लाल वस्त्रों और चूड़ियों से श्रृंगार किया जाता है। इस मंदिर में कोई पारंपरिक प्रतिमा नहीं है, बल्कि एक सुरंग की पूजा की जाती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां सती का जबड़ा यहीं गिरा था, जिसके बाद इस शक्तिपीठ की स्थापना हुई। मां बाराही देवी को उत्तरी भवानी भी कहा जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई आंखों के रोग से पीड़ित है या उसकी दृष्टि चली गई है, तो मंदिर में अर्पित किया गया दूध या वट वृक्ष का नीर आंखों में डालने से उन्हें नेत्र रोगों से मुक्ति मिलती है। भक्त इसे मां की विशेष कृपा मानते हैं।

संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी महिलाएं मां के दर्शन करती हैं। स्थानीय मान्यता है कि मां ने एक ऐसी महिला की गोद भरी थी, जिसके पास बच्चेदानी नहीं थी। इसी कारण महिलाएं संतान सुख के लिए मां बाराही के दर्शन के लिए आती हैं। मनोकामना पूरी होने पर मंदिर में विशेष अनुष्ठान भी कराए जाते हैं।

चैत्र और शारदीय नवरात्र में मां के मंदिर में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, और भक्तों की भारी भीड़ यहां दर्शन के लिए पहुंचती है। खासकर सोमवार और शुक्रवार को, जब भक्तजन मंदिर में आते हैं, क्योंकि ये दिन मां बाराही को समर्पित माने जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह नेत्र रोगों के निवारण के लिए भी एक विशेष स्थान रखता है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का प्रतीक है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां बाराही मंदिर की पूजा कैसे की जाती है?
मां बाराही मंदिर में प्रतिमा की बजाय सुरंग की पूजा की जाती है, जहां भक्त दूध अर्पित करते हैं।
क्या मां बाराही के दर्शन से नेत्र रोग ठीक होते हैं?
मंदिर में मां के दर्शन के बाद आंखों पर पानी डालने से नेत्र रोगों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
क्या यहां संतान सुख की प्राप्ति के लिए पूजा होती है?
हां, महिलाएं संतान सुख के लिए मां बाराही के दर्शन करती हैं और विशेष अनुष्ठान करती हैं।
मंदिर में कब अधिक भीड़ होती है?
चैत्र और शारदीय नवरात्र में और सोमवार-शुक्रवार को भक्तों की अधिक भीड़ होती है।
क्या मां बाराही का कोई विशेष नाम है?
मां बाराही देवी को उत्तरी भवानी के नाम से भी जाना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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