मां बगदाई मंदिर: जहां भोग के रूप में चढ़ते हैं 5 पत्थर; अद्भुत परंपरा
सारांश
Key Takeaways
- मां बगदाई मंदिर में 5 पत्थर और एक फूल अर्पित करने की परंपरा है।
- यह मंदिर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित है।
- मंदिर में भक्तों की आस्था बहुत बड़ी है।
- यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
- नवरात्रि के दौरान यहां विशेष आयोजन होते हैं।
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देश के विभिन्न देवी मंदिरों में माता रानी को आमतौर पर फूल और फल अर्पित किए जाते हैं। कई मंदिरों में नारियल चढ़ाने की परंपरा है, जबकि कुछ स्थानों पर बलि दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा देवी मंदिर है जहां मां को भोग के रूप में पत्थर चढ़ाए जाते हैं, वो भी गिनती के पांच पत्थर?
आपको यह सुनकर आश्चर्य हो रहा होगा, लेकिन यह सत्य है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित मां बगदाई मंदिर एक प्रसिद्ध और अद्भुत मंदिर है। हालांकि मंदिर आकार में छोटा है, लेकिन भक्तों की आस्था इसमें बहुत बड़ी है। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भक्त दूर-दूर से यहां आते हैं। इस मंदिर में मां को नारियल नहीं, बल्कि पांच पत्थर और एक फूल चढ़ाने की परंपरा है, जो सदियों से चली आ रही है। यह माना जाता है कि मां बगदाई मंदिर वन की जागृत देवी हैं, जो वर्षों से वन और आस-पास के लोगों की रक्षा कर रही हैं।
स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, यह मंदिर पहले जंगल में स्थित था और 100 वर्ष से भी अधिक समय पहले एक चरवाहे को मां की जागृत प्रतिमा मिली थी। मां ने चरवाहे को सपने में दर्शन देकर प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश दिया। चरवाहे ने मां को जंगल में एक स्थान पर स्थापित किया और एक छोटा सा मंदिर बनवाया, लेकिन उसके पास मां को अर्पित करने के लिए कुछ नहीं था। उसने मां से अपनी दुविधा बताते हुए कहा, "मां, मेरे पास आपको भोग लगाने के लिए कुछ नहीं है।" तब मां ने अवतरित होकर उसे 5 पत्थर चढ़ाने के लिए कहा।
मां ने उसे बताया कि वह किसी भोग की भूखी नहीं है, बल्कि भक्त के प्रेम की भूखी है। इसी कारण से तब से लेकर आज तक मंदिर में मां को पत्थरों का भोग चढ़ाया जाता है। स्थानीय मान्यता है कि यदि कोई भक्त सच्चे मन से मां को पांच पत्थर और एक फूल अर्पित करता है और उसकी मनोकामना पूरी होती है, तो उसे दोबारा मंदिर में आकर 5 पत्थर और फूल अर्पित करने होते हैं।
मंदिर आज भी घने जंगलों के बीच स्थित है, जहां अध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान, मां के मंदिर में हजारों की संख्या में भक्त आते हैं और नौ दिनों तक मां का भव्य श्रृंगार किया जाता है।