भाजपा सांसद खटाना का हमला: राहुल गांधी हताश नेता, देश को पाकिस्तान-बांग्लादेश की राह पर ले जाना चाहते हैं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद गुलाम अली खटाना ने 17 अक्टूबर 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए उन्हें देश को अस्थिर करने की कोशिश करार दिया। खटाना ने कांग्रेस नेता को 'हताश' बताते हुए पिछले दस संसदीय सत्रों में उनके आचरण को असंसदीय और जनता की आस्थाओं पर चोट पहुँचाने वाला घोषित किया।
खटाना के मुख्य आरोप
भाजपा सांसद ने सीधे शब्दों में कहा, 'राहुल गांधी देश को पाकिस्तान और बांग्लादेश के नक्शे-कदम पर चलाना चाहते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत के 140 करोड़ लोग ज़मीन और संस्कार से जुड़े हैं तथा देश के हित के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। खटाना ने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस को इस पर आत्म-मंथन करना चाहिए और राहुल गांधी के 'चेकअप' की भी ज़रूरत है।
विरोध-प्रदर्शन और सुरक्षा एजेंसियों का संदर्भ
खटाना ने दावा किया कि सुरक्षा एवं कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के इनपुट से पता चलता है कि जुलाई में हुए विरोध-प्रदर्शनों में कथित तौर पर आपराधिक तत्वों को भी शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार सुनिश्चित है, किंतु सरकारी कर्मचारियों, मरीजों, व्यापारिक समुदाय और स्कूली बच्चों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
नेहा बोरा के बयान पर प्रतिक्रिया
बांग्लादेश से सीखने की बात करने वाले नेहा बोरा के बयान पर भाजपा सांसद ने कहा कि ऐसी सोच रखने वाले लोगों की मानसिकता में बुनियादी समस्या है। खटाना के अनुसार भारत 11वीं अर्थव्यवस्था से उठकर अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन चुका है, अंतरिक्ष क्षेत्र में भी वैश्विक ताकत के रूप में उभरा है और डिजिटल इंडिया के माध्यम से बिचौलियों को समाप्त किया गया है।
खड़गे-मोदी पत्राचार पर रुख
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखे जाने के मुद्दे पर खटाना ने कहा कि विपक्ष और सरकार के बीच पत्राचार की प्रक्रिया चलती रहती है, परंतु देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता के 140 करोड़ लोगों के हित में जो निर्णय होगा, वही लिया जाएगा और विपक्ष को चर्चा में बुलाना है या नहीं, यह सरकार का विशेषाधिकार है।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच यह वाकयुद्ध ऐसे समय में तेज़ हुआ है जब संसद के आगामी सत्र से पहले विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में है। यह पहली बार नहीं है कि राहुल गांधी के बयानों को लेकर भाजपा नेताओं ने इस स्तर की प्रतिक्रिया दी हो — पिछले कुछ महीनों में इस तरह के हमले लगातार बढ़े हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दोनों दलों के बीच तीखे वाकयुद्ध का यह सिलसिला आने वाले समय में और तीव्र हो सकता है।