11 अक्टूबर 2026
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भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना बोले — कानून-व्यवस्था के लिए सख्त कदम जरूरी, राहुल और कांग्रेस पर साधा निशाना

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भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना बोले — कानून-व्यवस्था के लिए सख्त कदम जरूरी, राहुल और कांग्रेस पर साधा निशाना

सारांश

भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने एक साथ तीन मोर्चों पर पलटवार किया — सुप्रीम कोर्ट के हिरासत-आदेश, 12 अक्टूबर के विपक्षी प्रदर्शन और राहुल गांधी के लोकतंत्र बयान पर। उनका तर्क था कि जनहित में सख्त कदम अपरिहार्य हैं, जबकि कांग्रेस आपातकाल की विरासत पर जवाब दे।

मुख्य बातें

भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने 11 अक्टूबर 2026 को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को लेकर प्रतिक्रिया दी।
खटाना ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की आशंका होने पर प्रवर्तन एजेंसियों को सख्त कदम उठाने पड़ते हैं।
चेन्नई में राहुल गांधी के लोकतंत्र संबंधी बयान पर खटाना ने आपातकाल के दौर का हवाला देते हुए कड़ा जवाब दिया।
खटाना ने कहा कि 8 से 10 सत्रों में सांसदों को भाग लेने का अवसर नहीं दिया गया।
विपक्ष का 12 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है।

भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने 11 अक्टूबर 2026 को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश, 12 अक्टूबर को प्रस्तावित विपक्षी प्रदर्शन और चेन्नई में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लोकतंत्र संबंधी बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। खटाना ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों को कभी-कभी सख्त कदम उठाने की अनिवार्यता होती है।

कानून-व्यवस्था पर खटाना का रुख

खटाना ने कहा, 'देखिए, कानून लागू करने वाली एजेंसियों का काम मुश्किल होता है। यह तलवार की धार और बाल की नोक से भी ज्यादा बारीक होता है। प्रदर्शनकारियों को विरोध करने का अधिकार है। काम करने वाले लोगों को काम करने का अधिकार है। अस्पताल जाने वाले का अपना अधिकार है और स्कूल जाने वाले बच्चे का अपना अधिकार है।'

उन्होंने आगे जोड़ा, 'इसलिए जब कानून लागू करने वाली एजेंसियों को जानकारी मिलती है या उन्हें शक होता है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हो सकता है या कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है, तो उन्हें कभी-कभी सख्त कदम उठाने पड़ते हैं। यह कदम लोगों की भलाई के लिए होता है।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब सर्वोच्च न्यायालय ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की निवारक हिरासत पर सवाल उठाए हैं।

राहुल गांधी के बयान पर पलटवार

चेन्नई में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था कि लोकतंत्र खत्म करने वालों से वे डरते नहीं और दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें आवाज उठाने से नहीं रोक सकती। इस पर खटाना ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'जब भी स्टेटमेंट देना हो, संसदीय मर्यादा में देना चाहिए। दूसरी बात, उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तो क्या करते थे।'

उन्होंने आपातकाल के दौर का हवाला देते हुए कहा, 'कांग्रेस के कार्यकाल में आपातकाल के दौरान मीडिया की क्या हालत थी, सभी ने देखा। नेताओं, नौजवानों और संसदीय संस्थाओं को नुकसान पहुंचाया गया था। लोगों ने कांग्रेस को नकार दिया है, फ्रस्ट्रेशन में वे ऐसे बयान दे रहे हैं।'

विपक्षी प्रदर्शन और संसदीय सत्र पर टिप्पणी

12 अक्टूबर को प्रस्तावित विपक्षी प्रदर्शन पर खटाना ने कहा कि सांसदों को 8 से 10 सत्रों में भाग लेने से रोका गया और उन्हें जीरो आवर के दौरान सरकार से सवाल पूछने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए भी कांग्रेस पर 'केवल उकसाने और भड़काने' का आरोप लगाया।

जेन-जी और कांग्रेस पर भाजपा का हमला

खटाना ने कहा, 'कांग्रेस ने देश को 2जी जैसे घोटालों में फंसाया। यह प्रधानमंत्री मोदी की ही देन है कि आज के युवा इतने जागरूक, जानकार और सशक्त हैं। जेन-जी के लिए दुनिया की सबसे सस्ती इंटरनेट सेवा उपलब्ध है और रियल-टाइम ट्रांजेक्शन भी सर्वाधिक होता है। कांग्रेस सिर्फ लोगों को डराती है।' यह ऐसे समय में आया है जब युवा मतदाताओं को लेकर दोनों दलों में तीखी प्रतिस्पर्धा चल रही है।

आगे क्या

12 अक्टूबर को विपक्ष का प्रस्तावित प्रदर्शन राजनीतिक तापमान और बढ़ा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मद्देनजर प्रवर्तन एजेंसियों का अगला कदम इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप यह संकेत देता है कि प्रवर्तन की सीमाएं बहस के दायरे में हैं। कांग्रेस पर आपातकाल का हमला भाजपा का परखा हुआ पलटवार है — मगर यह मौजूदा न्यायिक प्रश्न का उत्तर नहीं देता। विपक्षी प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समवर्ती होना सरकार के लिए असहज स्थिति है, जिसे भाजपा के बयानों में दरकिनार किया गया है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुलाम अली खटाना ने कानून-व्यवस्था पर क्या कहा?
भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा कि जब प्रवर्तन एजेंसियों को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका होती है, तो उन्हें सख्त कदम उठाने पड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम जनता की भलाई के लिए होता है।
राहुल गांधी ने चेन्नई में क्या कहा था और खटाना ने क्या जवाब दिया?
राहुल गांधी ने चेन्नई के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में कथित तौर पर कहा था कि लोकतंत्र खत्म करने वालों से वे नहीं डरते। खटाना ने इस पर आपातकाल के दौरान मीडिया और संसदीय संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने का हवाला देते हुए पलटवार किया और कांग्रेस के बयान को 'फ्रस्ट्रेशन' का नतीजा बताया।
12 अक्टूबर को विपक्ष का प्रदर्शन क्यों हो रहा है?
विपक्ष ने 12 अक्टूबर को प्रदर्शन का ऐलान किया है, जिसके पीछे आरोप है कि सांसदों को 8 से 10 सत्रों में भाग लेने और जीरो आवर के दौरान सवाल पूछने का मौका नहीं दिया गया। खटाना ने इसे स्वीकार करते हुए भी कांग्रेस पर केवल उकसाने का आरोप लगाया।
सर्वोच्च न्यायालय ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर क्या रुख अपनाया है?
सर्वोच्च न्यायालय ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने को लेकर आदेश दिया है, जिसके बाद यह मसला राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। खटाना ने इस आदेश के संदर्भ में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत का बचाव किया।
खटाना ने जेन-जी और 2जी घोटाले का जिक्र क्यों किया?
खटाना ने युवा मतदाताओं को लेकर कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश को 2जी जैसे घोटालों में फंसाया, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने जेन-जी को दुनिया की सबसे सस्ती इंटरनेट सेवा और सर्वाधिक रियल-टाइम ट्रांजेक्शन की सुविधा दी।
राष्ट्र प्रेस
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