गुलाम अली खटाना का कांग्रेस पर हमला: संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बर्दाश्त नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर कड़े आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाकर उन्हें कमज़ोर करने की कोशिश कर रहा है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं। उन्होंने इंडिया ब्लॉक की प्रस्तावित रैली, चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों, अरुणाचल प्रदेश से संबंधित कथित फर्जी वीडियो और जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार सहित कई मुद्दों पर विपक्ष को घेरा।
संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव का आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग से जुड़े मामले को सुप्रीम कोर्ट में जारी रखने की बात कहे जाने पर खटाना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि संबंधित फैसले तीनों आयुक्तों की आपसी सहमति से लिए गए। खटाना के अनुसार, दबाव की राजनीति से संवैधानिक ढाँचे को नहीं तोड़ा जा सकता।
कांग्रेस पर संसद में बाधा डालने का आरोप
इंडिया ब्लॉक की प्रस्तावित रैली के संदर्भ में खटाना ने कहा कि पिछले आठ-दस संसदीय सत्रों में कांग्रेस ने सदन के कामकाज को बाधित किया और नए सांसदों को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। उन्होंने त्योहारों के मौसम में विरोध प्रदर्शनों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि दीपावली जैसे त्योहार पर व्यापारी वर्ग को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। खटाना ने आरोप लगाया कि कांग्रेस देशहित से पहले अपने दलगत स्वार्थ को प्राथमिकता देती है।
कथित फर्जी वीडियो पर माफी की माँग
अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ का दावा करने वाले एक वायरल वीडियो को लेकर खटाना ने कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की माँग की। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने इस वीडियो को AI-निर्मित फुटेज बताया है और यह क्लिप वास्तव में 27 अक्टूबर 2023 को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। खटाना ने कहा कि सेना का मनोबल गिराने वाली ऐसी गतिविधियाँ 'बाँटो और राज करो' की पुरानी सोच को दर्शाती हैं और कानून को इस पर अपना काम करना चाहिए। उन्होंने भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस को दुनिया के बेहतरीन सुरक्षा बलों में शामिल बताते हुए उनके मानवाधिकारों के प्रति समर्पण की सराहना की।
खड़गे की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर खटाना ने कड़ा एतराज़ जताया। उन्होंने कहा कि खड़गे एक वरिष्ठ नेता हैं और उनसे अपेक्षा है कि वे अपने अनुभव के अनुरूप मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करें। खटाना ने इस टिप्पणी को 'शर्मनाक और निम्न स्तर की राजनीति' करार दिया। गौरतलब है कि पृथ्वीराज चव्हाण और समाजवादी पार्टी नेता रामगोपाल यादव ने भी खड़गे की टिप्पणी की आलोचना की थी।
जम्मू-कश्मीर कैबिनेट विस्तार और विकास के दावे
जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार पर खटाना ने पुनर्गठन अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि 90 सदस्यीय विधानसभा में 10 मंत्रियों का प्रावधान है। उन्होंने बिजली और पानी के शुल्क बढ़ाए जाने पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि चुनावी घोषणापत्र में सस्ती बिजली और पानी का वादा किया गया था। खटाना ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए स्टार्टअप, शिक्षा और खेलों में अवसरों की उपलब्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र को पीछे ले जाने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था, सस्ते इंटरनेट और युवाओं के लिए वैश्विक अवसरों का भी उल्लेख किया।