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क्या प्राकृतिक खेती अपनाने से किसान की आय बढ़ेगी? अमित शाह का दावा

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क्या प्राकृतिक खेती अपनाने से किसान की आय बढ़ेगी? अमित शाह का दावा

सारांश

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने रासायनिक खादों के दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए प्राकृतिक खेती के लाभों को बताया। जानिए कैसे यह खेती किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

मुख्य बातें

प्राकृतिक खेती से किसान की आय में डेढ़ गुना वृद्धि हो सकती है।
रासायनिक खादों के उपयोग से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सर्टिफिकेशन की व्यवस्था कर रही है।
एक देशी गाय से 21 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा सकती है।
दुनियाभर में प्राकृतिक खेती का बड़ा बाजार मौजूद है।

रीवा, 25 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रासायनिक खादों के उपयोग से होने वाली बीमारियों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसान प्राकृतिक खेती को अपनाते हैं, तो उनकी आय डेढ़ गुना तक बढ़ सकती है।

रीवा में बसामन मामा गौ वन्य विहार अभयारण्य में प्राकृतिक खेती के प्रकल्प का शुभारंभ करते हुए केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश का रीवा क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। रीवा में एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट है और यहां से जबलपुर तक सड़क मार्गों का जाल बिछा हुआ है। इंदौर और दिल्ली के लिए हवाई सेवा भी शुरू कर दी गई है।

उन्होंने आगे कहा कि बसावन मामा गौवंश वन्य विहार में एक अनुकरणीय प्रकल्प तैयार किया गया है। यहां गोबर से तैयार खाद का उपयोग कर प्राकृतिक खेती की जा रही है। इस प्रयोग से छोटे किसानों को बड़ा लाभ होगा, क्योंकि एक एकड़ में सवा लाख रुपए की आय हो सकती है। यदि किसान इस मॉडल को अपनाएंगे, तो उनकी आय में वृद्धि होगी। राज्य सरकार प्रगतिशील किसानों को इस परंपरागत मॉडल से परिचित कराने के लिए भ्रमण कराएगी।

उन्होंने बताया कि एक देशी गाय से 21 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा सकती है। किसानों को प्रेरित करने और प्रोत्साहित करने के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।

उन्होंने चिंता जताई कि अनाज उत्पादन में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण कई बीमारियां बढ़ रही हैं। इससे बचने के लिए हमें प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने से उत्पादन में कमी नहीं आती। मैंने स्वयं अपने खेतों में प्राकृतिक खेती का अभ्यास किया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत प्राकृतिक खेती के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया बड़े स्तर पर की जा रही है।

केंद्र सरकार ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए उत्पादों के सर्टिफिकेशन, पैकेजिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था की है। भविष्य में देश में 400 से अधिक प्रयोगशालाएं किसानों को प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रमाण पत्र प्रदान करेंगी। इन प्रयासों से प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की आय डेढ़ गुना बढ़ जाएगी।

उन्होंने बताया कि विश्वभर में प्राकृतिक खेती का बड़ा बाजार है। ऑर्गेनिक अनाज खाने से स्वास्थ्य में सुधार होता है। भूमि परीक्षण से सर्टिफिकेशन, उपज का परीक्षण, बेहतर पैकेजिंग और मार्केटिंग से किसानों को उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। हम किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्राथमिकता से प्रयास कर रहे हैं। आगामी समय में प्राकृतिक खेती के लिए किसानों का मार्गदर्शन निदर्शन फॉर्म करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसके कार्यान्वयन में चुनौतियाँ भी हैं। सरकार को चाहिए कि वह किसानों को उचित मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए ताकि वे इस परिवर्तन को सफलतापूर्वक अपना सकें।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्राकृतिक खेती क्या है?
प्राकृतिक खेती एक ऐसी खेती की पद्धति है जिसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर फसलें उगाई जाती हैं।
प्राकृतिक खेती से किसानों की आय कैसे बढ़ेगी?
प्राकृतिक खेती से उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होता है, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिलती है। इसके अलावा, यह किसानों के लिए स्वास्थ्यवर्धक विकल्प भी है।
क्या प्राकृतिक खेती में उत्पादन में कमी आती है?
नहीं, प्राकृतिक खेती में उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है, और सही तकनीकों के उपयोग से उत्पादन में कमी नहीं आती।
सरकार प्राकृतिक खेती को कैसे प्रोत्साहित कर रही है?
सरकार प्राकृतिक खेती के लिए सर्टिफिकेशन, पैकेजिंग और मार्केटिंग की सुविधाएं उपलब्ध करा रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।
किसान प्राकृतिक खेती के लिए कैसे प्रशिक्षण ले सकते हैं?
किसान विभिन्न कृषि केंद्रों और सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण ले सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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