क्या 1971 युद्ध के दौरान अत्याचारों के लिए माफी की मांग बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंधों में बाधा बनेगी?

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क्या 1971 युद्ध के दौरान अत्याचारों के लिए माफी की मांग बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंधों में बाधा बनेगी?

सारांश

1971 के युद्ध के दौरान बांग्लादेश द्वारा पाकिस्तान से माफी की मांग एक बार फिर सामने आई है। क्या यह मांग दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा करेगी? जानिए इस मुद्दे पर ताजा घटनाक्रम और विशेषज्ञों की राय।

Key Takeaways

  • 1971 के युद्ध में हुए अत्याचारों की माफी की मांग बांग्लादेश की प्राथमिकता है।
  • पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री की यात्रा ने इस मांग को फिर से ताजा किया है।
  • बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने की जरूरत है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि माफी मांगने से तनाव कम हो सकता है।
  • भारत को इस मुद्दे पर गहरी नजर रखनी चाहिए।

ढाका, 25 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। 1971 के युद्ध के दौरान बांग्लादेश द्वारा पाकिस्तान से माफी की मांग एक बार फिर उठी है। यह मांग उस समय जोर पकड़ी, जब पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री मुहम्मद इशाक डार ढाका का दौरा कर रहे थे। इस माँग को अहम माना जा रहा है, क्योंकि डार 2012 के बाद से ढाका जाने वाले सबसे उच्चतम रैंक के अधिकारी हैं। 2012 में भी यही मांग की गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

शेख हसीना के सत्ता से हटने और देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहतर हुए हैं, जो भारत के लिए एक चिंता का विषय है।

यह सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान से माफी मांगने का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा करेगा। बांग्लादेश पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि यह बार-बार की जाने वाली मांग संबंधों में बाधा डाल सकती है। हालांकि, वर्तमान घटनाक्रमों के अनुसार, यह तनाव बढ़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि बांग्लादेश में निर्णय जमात-ए-इस्लामी जैसी पार्टियों द्वारा निर्धारित किए जा रहे हैं।

डार की बैठक में माफी की मांग न केवल मुहम्मद यूनुस द्वारा की गई बल्कि जमात और बीएनपी ने भी इसे उठाया। परंतु, विशेषज्ञों का कहना है कि यह सब केवल बांग्लादेश की जनता को खुश करने के लिए है।

बैठक के बाद इशाक डार ने कहा कि बांग्लादेश को चाहिए कि वह अपने दिल की बात समझे और 1971 में हुए अत्याचारों के लिए पाकिस्तान की जिम्मेदारी को छोड़कर आगे बढ़े।

उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा 1974 में ही सुलझ गया था जब जनरल मुशर्रफ बांग्लादेश आए थे।

डार ने 1974 के त्रिपक्षीय समझौते का भी उल्लेख किया, जिसमें पाकिस्तान ने अत्याचारों में अपनी सेना की संलिप्तता स्वीकार की थी।

पाकिस्तान द्वारा माफी मांगने से रिश्तों में कोई बाधा नहीं आएगी, इसका कारण यह है कि डार की यात्रा के दौरान, दोनों देशों के राजनयिकों और अधिकारियों को बिना वीजा यात्रा करने की अनुमति देने का एक समझौता हुआ है। यह भारत के लिए एक बड़ी चिंता है, क्योंकि इससे आतंकवादी बांग्लादेश में प्रवेश कर सकते हैं, जो भारत की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

दिसंबर 2024 में काहिरा में आयोजित होने वाले डी-8 शिखर सम्मेलन के दौरान यूनुस ने 1971 के युद्ध से संबंधित लंबित मुद्दों को हल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जमात के अलावा, बांग्लादेश में कई लोग पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने के पक्ष में हैं।

पाकिस्तान समर्थक यह मानते हैं कि शेख हसीना भारत सरकार की मदद से सत्ता में बनी रहीं, इसलिए हसीना के विरोध का गुस्सा भी भारत के प्रति है। हसीना के निष्कासन के बाद बांग्लादेश तेजी से पाकिस्तान के करीब आ गया है।

हाल के दिनों में, बांग्लादेश ने पाकिस्तान को कई रियायतें दी हैं। बांग्लादेश ने पाकिस्तानी खेपों के लिए 100 प्रतिशत भौतिक निरीक्षण की आवश्यकता को हटा दिया है। पाकिस्तानी वीजा आवेदकों के लिए मंजूरी की आवश्यकताओं को भी आसान बना दिया गया है। इसके अलावा, ढाका हवाई अड्डे पर पाकिस्तान केंद्रित सुरक्षा डेस्क को समाप्त कर दिया गया है।

Point of View

मैं मानता हूँ कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच के संबंधों में सुधार की आवश्यकता है। हालांकि, 1971 के युद्ध के दौरान हुए अत्याचारों पर माफी का मुद्दा एक संवेदनशील विषय है। हमें इस मुद्दे को समझदारी से संभालने की आवश्यकता है ताकि दोनों देशों के बीच का तनाव कम हो सके।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

1971 युद्ध के दौरान बांग्लादेश में क्या हुआ था?
1971 युद्ध में बांग्लादेश ने पाकिस्तान से स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया था, जिसमें कई अत्याचार हुए थे।
पाकिस्तान माफी क्यों नहीं मांग रहा?
पाकिस्तान माफी मांगने के मुद्दे को अनदेखा कर रहा है, क्योंकि वह अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है।
बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्ते कैसे हैं?
हाल के दिनों में बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्ते सुधर रहे हैं, लेकिन 1971 के युद्ध का मुद्दा अभी भी विवादास्पद है।
क्या माफी मांगने से संबंध बेहतर होंगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि माफी मांगने से संबंधों में थोड़ी बेहतर स्थिति आ सकती है, लेकिन यह मुद्दा जटिल है।
क्या भारत को इस मुद्दे में चिंता करनी चाहिए?
हाँ, भारत को इस मुद्दे पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।