क्या ठोस जानकारी और सबूत के साथ भ्रष्टाचार की शिकायत करनी चाहिए? : कुणाल घोष

सारांश
Key Takeaways
- भ्रष्टाचार की शिकायत ठोस जानकारी के साथ करनी चाहिए।
- राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का चलन है।
- अनियमितताओं के कारण कई लोग गिरफ्तार हुए हैं।
- केंद्र का धन कैसे उपयोग किया जा रहा है, यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
- राजनीतिक विवादों का सामाजिक प्रभाव होता है।
पश्चिमी मिदनापुर, 31 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रमुख नेता कुणाल घोष ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुवेंदु अधिकारी द्वारा उठाए गए आरोपों का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्र का 80 प्रतिशत धन मुख्यमंत्री आवास में उपयोग हुआ। इस पर टीएमसी नेता ने सुझाव दिया कि भ्रष्टाचार की शिकायतें केवल ठोस जानकारी और सबूत के साथ की जानी चाहिए।
कुणाल घोष ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यदि कोई शिकायत प्रस्तुत करता है, तो उसे भी ठोस जानकारी और सबूत के साथ पेश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ अनियमितताएं सामने आई हैं, जिसके चलते कई लोग गिरफ्तार हुए हैं। मध्य प्रदेश का कांड भी इसी वजह से हुआ था, जिसमें जांच के दौरान कई लोगों की जानें गई थीं। त्रिपुरा में दस हजार से अधिक लोगों के रोजगार के पैनल रद्द कर दिए गए हैं। उन्होंने सीपीएम और भाजपा से सवाल किया कि वे इस अन्याय पर क्या कहेंगे?
सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी विधायक जीवनकृष्ण साहा के बारे में कहा कि उनके पास पार्थ चटर्जी और अभिषेक का भी प्रभाव था। इस पर कुणाल घोष ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी नवंबर 2020 तक तृणमूल में थे। अगर उनके पास इतनी जानकारी और आक्रोश था, तो उन्होंने नवंबर में ये बातें क्यों नहीं उठाई? भाजपा में शामिल होने के बाद अचानक यह गुस्सा क्यों आया?
उन्होंने कहा कि हमारा सवाल यह है कि जब प्रधानमंत्री ने वोट देने का आह्वान किया, तब केंद्रीय एजेंसी फिर से सक्रिय क्यों हुई। नवंबर 2020 तक सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि तृणमूल जैसी कोई पार्टी नहीं है और ममता बनर्जी जैसा कोई नेता नहीं है। अचानक यह सब कैसे बदल गया? यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अनियमितताओं के चलते कई लोग जेल में हैं और जांच जारी है। इस पर आगे चर्चा करने का कोई अर्थ नहीं है।