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क्या बिहार में कांग्रेस जल्दी ही पश्चिम बंगाल की तरह विलुप्त हो जाएगी?

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क्या बिहार में कांग्रेस जल्दी ही पश्चिम बंगाल की तरह विलुप्त हो जाएगी?

सारांश

क्या बिहार में कांग्रेस का भविष्य खतरे में है? कर्नाटक की उलझनों के बीच, पार्टी के छह विधायकों के संभावित दल-बदल की अटकलें बढ़ रही हैं। स्थानीय राजनीति में इस बदलाव का क्या असर होगा? जानिए इस विस्तृत विश्लेषण में।

मुख्य बातें

कांग्रेस के विधायकों का संभावित दल-बदल नीतीश कुमार की जनता दल-यूनाइटेड में शामिल होने की अटकलें बिहार में कांग्रेस का भविष्य खतरे में महागठबंधन की स्थिति और कमजोर हो सकती है राजनीतिक स्थिति पर नजर रखना आवश्यक

नई दिल्ली, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के नेतृत्व ने कर्नाटक की जटिलताओं में उलझने के साथ-साथ अब ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि बिहार में भी पार्टी को विधानसभा सीटें मिलने की संभावना उतनी ही कम है, जितनी पश्चिम बंगाल में - अर्थात् शून्य।

बिहार के सभी छह कांग्रेस विधायकों के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं, और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल-यूनाइटेड में शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, कांग्रेस के नेता इन चर्चाओं का खंडन कर रहे हैं, लेकिन पार्टी की गतिविधियों में उनकी अनुपस्थिति और सत्ताधारी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) द्वारा उठाए गए प्रस्तावों ने संकेत दिया है कि कमजोर विपक्ष को एक और बड़ा झटका लग सकता है।

पिछले हफ्ते तीन कांग्रेस विधायकों की महत्वपूर्ण पार्टी बैठक में अनुपस्थिति के बाद अटकलें और भी बढ़ गईं, जब मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर आयोजित पारंपरिक "दही-चूड़ा" भोज में कोई भी विधायक शामिल नहीं हुआ।

खबरों के अनुसार, सत्ताधारी जनता दल-यूनाइटेड के नेता कांग्रेस विधायकों के संपर्क में हैं और जल्द ही दल-बदल की घोषणा की जा सकती है।

अफवाहों को और बढ़ाते हुए, लोक जनशक्ति पार्टी-राम विलास के नेता संजय कुमार ने दावा किया कि सभी छह विधायक एनडीए के संपर्क में हैं और मकर संक्रांति के बाद दल बदल सकते हैं।

यह अटकलें एनडीए की बिहार विधानसभा चुनावों में शानदार जीत के दो महीने बाद सामने आई हैं, जहां उसने 243 में से 202 सीटें जीती थीं, जिससे विपक्षी महागठबंधन को बड़ा झटका लगा था।

विश्लेषण तीन संभावित परिणामों की ओर इशारा करते हैं। पहला यह है कि सभी छह विधायक दल बदल लें, जिससे कांग्रेस का विधानसभा में अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और बिहार में उसका प्रतीकात्मक पतन हो जाएगा। इसके अलावा, आंशिक दलबदल की भी संभावना है, जो दलबदल विरोधी नियमों के तहत आधिकारिक विभाजन को ट्रिगर कर सकता है, जिससे कांग्रेस कमजोर तो होगी लेकिन पूरी तरह से समाप्त नहीं होगी।

हालांकि, यदि पुष्टि का अभाव रहता है, तो स्थिति स्थिर रह सकती है, जहां विधायक बने रहेंगे, लेकिन निरंतर चर्चाएं पार्टी की विश्वसनीयता को और कमजोर करेंगी।

किसी भी स्थिति में, महागठबंधन का विपक्षी गुट, जो पहले ही विधानसभा चुनाव में हाशिए पर चला गया है, अब और भी कमजोर हो जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

कांग्रेस के लिए स्थिति चिंताजनक है। एक ओर, पार्टी का अस्तित्व और पुनर्निर्माण आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर, यदि विधायक दल बदलते हैं तो यह एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनेगा। इस पर नज़र रखना महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कांग्रेस के विधायक वास्तव में दल बदल सकते हैं?
हाँ, स्थानीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कांग्रेस के विधायक जनता दल-यूनाइटेड में शामिल हो सकते हैं।
बिहार में कांग्रेस की स्थिति कितनी गंभीर है?
कांग्रेस की स्थिति बेहद गंभीर है, और विधानसभा चुनावों में उसकी संभावनाएँ कम होती दिख रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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