भाजपा ने राहुल गांधी पर लगाया 'भारत विरोधी नैरेटिव' का आरोप, अमेरिकी रिपोर्ट का किया हवाला
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट में भारत की धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है।
- कांग्रेस का दावा है कि यह रिपोर्ट भारत में भेदभाव को दर्शाती है।
- गौरव भाटिया ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर भी सवाल उठाए।
- यह विवाद भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ दिखाता है।
नई दिल्ली, १८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए उन पर अमेरिका की एक रिपोर्ट का सहारा लेकर "भारत को बदनाम करने" और "एंटी-इंडिया नैरेटिव" को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि वे "भारी मन" से बोल रहे हैं क्योंकि कांग्रेस ने यूएससीआईआरएफ (यूएससीआईआरएफ) की रिपोर्ट को साझा किया है।
इस रिपोर्ट में भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीखी आलोचना की गई है।
गौरव भाटिया ने राहुल गांधी के "मोहब्बत की दुकान" वाले बयान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह "एंटी-इंडिया सामान" बेच रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल देश की छवि को धूमिल करने पर तुला हुआ है।
कांग्रेस के पोस्ट में यूएससीआईआरएफ की उस सिफारिश का जिक्र किया गया था, जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन से आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने, उसकी संपत्तियों को जब्त करने और उसके सदस्यों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई थी।
पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद १९४८ में देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था।
भाटिया ने यह भी दावा किया कि यूएससीआईआरएफ रिपोर्ट में रॉ और आरएसएस जैसे संगठनों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान रॉ से डरता है और अब भारत के विपक्ष के नेता भी रॉ के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं, यह चिंताजनक है।"
भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वे अमेरिकी सांसद इल्हान ओमर से मिलते हैं, जो भारत में लोकतंत्र के बारे में सवाल उठाती रही हैं।
दरअसल, यूएससीआईआरएफ की २०२६ की वार्षिक रिपोर्ट में अमेरिकी सरकार से भारत को "कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न" घोषित करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति बिगड़ गई है और विशेषकर मुस्लिम और ईसाई अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा बढ़ी है।
रिपोर्ट में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) जैसे विधायी कदमों का भी उल्लेख किया गया है।