क्या बिहार विधानसभा चुनाव में लालू का गढ़ बरौली में भाजपा की पकड़ मजबूत है?

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क्या बिहार विधानसभा चुनाव में लालू का गढ़ बरौली में भाजपा की पकड़ मजबूत है?

सारांश

क्या भाजपा की मजबूत पकड़ बरौली में लालू के गढ़ को चुनौती देगी? जानें इस महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र के चुनावी समीकरण और संभावनाओं के बारे में।

Key Takeaways

  • बरौली विधानसभा सीट की राजनीतिक स्थिति जातीय समीकरणों पर निर्भर है।
  • भाजपा ने पिछले चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत की है।
  • कृषि इस क्षेत्र की मुख्य आर्थिक गतिविधि है।
  • युवाओं के लिए रोजगार की कमी एक बड़ी चुनौती है।
  • 2024 के चुनावों में यह सीट महत्वपूर्ण होगी।

पटना, 9 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के गोपालगंज की बरौली विधानसभा सीट एक बार फिर से चर्चा में है। यह सीट सामान्य वर्ग की है और गोपालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। भौगोलिक दृष्टि से यह गोपालगंज शहर से लगभग 15 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इसमें बरौली और मांझा प्रखंड के साथ-साथ बैकुंठपुर प्रखंड की कुछ पंचायतें भी शामिल हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन गोपालगंज और मीरगंज हैं, जो सड़क और रेल संपर्क से जुड़े हुए हैं।

बरौली क्षेत्र पश्चिमी गंगा के मैदानी इलाके में आता है, जहाँ की जलोढ़ मिट्टी अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है। यहां बड़े पैमाने पर धान, गेहूं, मक्का और गन्ने की खेती होती है। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। हाल के वर्षों में सड़क और बिजली की सुविधाओं में सुधार हुआ है, लेकिन स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार की कमी अभी भी एक गंभीर समस्या है।

बरौली विधानसभा क्षेत्र ने अब तक 17 चुनाव देखे हैं। प्रारंभिक दशकों में यहां कांग्रेस का प्रभुत्व रहा, जिसने यहां से सात बार जीत हासिल की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर इस क्षेत्र से चार बार विधायक बने। इसके बाद 2000 से अब तक हुए छह में से पांच चुनावों में भाजपा ने जीत दर्ज की। हालाँकि, 2015 में राजद ने भाजपा से यह सीट छीन ली। इसके बाद 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रामप्रवेश राय ने राजद को हराकर इस सीट को पुनः अपने नियंत्रण में ले लिया।

बरौली सीट की राजनीति जातीय समीकरणों पर निर्भर करती है। यहां सवर्ण (भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत) मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि यादव और मुस्लिम राजद के परंपरागत समर्थक माने जाते हैं। यही कारण है कि यह सीट हर चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले का गवाह बनती रही है। यह सीट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लालू प्रसाद यादव के गृह जिले गोपालगंज में स्थित है।

2024 के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बरौली क्षेत्र की कुल जनसंख्या 5,19,444 है, जिसमें 2,64,223 पुरुष और 2,55,221 महिलाएं शामिल हैं। कुल मतदाताओं की संख्या 3,14,892 है, जिसमें 1,59,670 पुरुष, 1,55,207 महिलाएं और 15 थर्ड जेंडर शामिल हैं।

Point of View

यह कहना उचित है कि बरौली विधानसभा क्षेत्र की राजनीति जातीय समीकरणों और स्थानीय मुद्दों से प्रभावित है। भाजपा और राजद के बीच की यह प्रतिस्पर्धा न केवल इस क्षेत्र के लिए, बल्कि बिहार की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि अगले चुनाव में मतदाता अपने अधिकार का सही उपयोग करेंगे।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

बरौली विधानसभा सीट की भौगोलिक स्थिति क्या है?
बरौली विधानसभा सीट गोपालगंज शहर से लगभग 15 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
बरौली में प्रमुख फसलें कौन सी हैं?
यहां मुख्य रूप से धान, गेहूं, मक्का और गन्ने की खेती होती है।
बरौली विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाता कितने हैं?
बरौली क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 3,14,892 है।
बरौली विधानसभा में पिछले चुनावों में किसने जीत हासिल की?
2015 में राजद ने जीत हासिल की, लेकिन 2020 में भाजपा ने इसे पुनः जीत लिया।
बरौली की राजनीति में जातीय समीकरणों का क्या महत्व है?
यहां सवर्ण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं, जबकि यादव और मुस्लिम राजद के परंपरागत वोटर हैं।
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