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क्या भाजपा को चुनाव के वक्त भगवान श्री राम की याद अचानक होती है?: नाना पटोले

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क्या भाजपा को चुनाव के वक्त भगवान श्री राम की याद अचानक होती है?: नाना पटोले

सारांश

क्या भाजपा केवल चुनाव के समय भगवान श्री राम का नाम लेकर वोट पाने की कोशिश कर रही है? नाना पटोले ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है, और महात्मा गांधी के आदर्शों का भी जिक्र किया है। क्या यह भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा है?

मुख्य बातें

भाजपा चुनाव के समय भगवान श्री राम का नाम लेती है, जिसे नाना पटोले ने अनुचित बताया।
महात्मा गांधी के आदर्शों का उल्लेख कर भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए गए।
भाषा विवाद में भाजपा का दोहरा रुख स्पष्ट है।

नागपुर, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता नाना पटोले ने तेलंगाना से कांग्रेस नेता बोम्मा महेश के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करती है। नाना पटोले ने कहा कि भाजपा को चुनाव के समय भगवान श्री राम की याद क्यों आती है।

नागपुर में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि तेलंगाना से कांग्रेस नेता द्वारा भाजपा के लिए जो बातें कही गई हैं, उनका अलग अर्थ निकाला जा रहा है। मैंने भी वही पढ़ा है। जिस तरह भाजपा चुनाव के दौरान भगवान श्री राम का नाम लेती है, वो सही नहीं है, क्योंकि धर्म और राजनीति को अलग रखना चाहिए। महाराष्ट्र में संतों की एक प्रखर परंपरा है। भाजपा केवल चुनाव के समय ही श्री राम को याद करती है। इसलिए तेलंगाना से हमारे कांग्रेस विधायकों ने यह कहा कि केवल चुनाव के दौरान भगवान का नाम लेना अनुचित है। वोट हासिल करने के लिए धर्म का उपयोग करने के बजाय हमें यह देखना चाहिए कि सरकार ने क्या किया है। उन्होंने देश पर कैसे शासन किया है, क्या विकास हुआ है या नुकसान हुआ है, और देश को कैसे चलाया जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया संविधान के तहत होती है। मुझे लगता है कि जिस विधायक ने यह बात कही है, उसका मतलब यह है कि चुनाव के समय श्री राम का नाम लेकर इसे चुनावी मुद्दा बनाना गलत है। इस पर भाजपा को विचार करना चाहिए। मैं भी हिंदू हूं, मेरे आराध्य भगवान श्री राम हैं, लेकिन राजनीति में उनका उपयोग करना उचित नहीं है।

महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा महात्मा गांधी के आदर्शों को कमजोर करना चाहती है। कांग्रेस ने एक योजना का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा था और भाजपा उसे बंद करना चाहती है। लोकतंत्र में वे जो विषैले बीज बो रहे हैं, उन्हें उनके अनुयायी या वामपंथी सोच वाले लोग फैला रहे हैं। महात्मा गांधी केवल कांग्रेस के नहीं, बल्कि पूरे देश के थे। भाजपा को यह पसंद नहीं है क्योंकि उनके पास कोई ऐसा महात्मा नहीं है। महात्मा गांधी की विचारधारा को खत्म करके जो राजनीति की जा रही है, उससे देश को खतरा हो सकता है। यह भाजपा की मानसिकता है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता पाने के लिए जो भी करना पड़े, वे करेंगे। वे अपनी सुविधानुसार बार-बार बदलते हैं और यही भाजपा का स्वभाव है।

उन्होंने मुंबई में भाषा विवाद पर कहा कि मुंबई में, जहां मराठी भाषा और संस्कृति बहुत मजबूत है, वे कहते हैं कि वे हिंदी को बढ़ावा नहीं देंगे, बल्कि मराठी को बढ़ावा देंगे। मुख्यमंत्री भी यही कहते हैं। लेकिन साथ ही, नवी मुंबई में उनके घोषणापत्र में कहा गया है कि वहां हिंदी को बढ़ावा दिया जाएगा। मुंबई और नवी मुंबई में ज्यादा अंतर नहीं है। भाषा के मुद्दे पर भाजपा के अलग-अलग बयानों से यह स्पष्ट है कि वे सत्ता के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह विचार करना महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक दलों को चुनावी समय में धार्मिक प्रतीकों का उपयोग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। यह समाज में विभाजन का कारण बन सकता है और धर्म और राजनीति के बीच की सीमाओं को धुंधला कर सकता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या नाना पटोले का बयान भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाता है?
हाँ, नाना पटोले ने भाजपा की चुनावी रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं, खासकर भगवान श्री राम के नाम के इस्तेमाल को लेकर।
महात्मा गांधी का जिक्र क्यों किया गया?
नाना पटोले ने महात्मा गांधी के आदर्शों को कमजोर करने का आरोप भाजपा पर लगाया है, यह दर्शाने के लिए कि भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं कर रही है।
भाषा विवाद में भाजपा का क्या रुख है?
भाषा विवाद पर भाजपा के बयानों में असंगति है, जहां वे मौके के अनुसार बयान बदलते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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