क्या भाजपा एसआईआर को लेकर जल्दीबाज़ी कर रही है? अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा पर आरोप कि वे एसआईआर के माध्यम से वोट डालने का अधिकार छीन रहे हैं।
- अखिलेश यादव ने बीएलओ की आत्महत्या का कारण जल्दबाजी को बताया।
- सरकारी सहायता की मांग पर जोर दिया गया।
- लोकतंत्र की सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गईं।
लखनऊ, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एसआईआर को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और भाजपा दोनों एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। एसआईआर के माध्यम से वोट डालने का अधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है।
अखिलेश यादव ने शनिवार को राज्य के कुछ बीएलओ की मौत के बाद उनके परिजनों को आर्थिक सहायता के रूप में दो-दो लाख रुपए के चेक प्रदान किए। उन्होंने कहा कि हम अभी मृतक बीएलओ के परिवार की सहायता कर रहे हैं, लेकिन सरकार से मांग है कि एक करोड़ रुपए की मदद की जाए और सरकारी नौकरी दी जाए।
लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि बीएलओ पर जल्दबाजी का दबाव बनाया गया, जिसके कारण उन्होंने आत्महत्या का कदम उठाया।
उन्होंने कहा, "समाजवादी पार्टी की हमेशा से यह मांग रही है कि बीएलओ के ऊपर काम का दबाव न बढ़ाया जाए, क्योंकि एसआईआर एक बहुत ही जिम्मेदारी का कार्य है और इसे सावधानी से करना चाहिए। एक बार यदि फॉर्म रिजेक्ट हो गया, तो वोट नहीं बन पाएगा और लोगों को कागजात लेकर दौड़-भाग करनी पड़ेगी।" उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा एसआईआर को लेकर इतनी जल्दी क्यों है?
सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि नगरपालिका के सफाई कर्मचारियों को भी सहायक बनाया गया है। उन्होंने कहा, "एसआईआर के फॉर्म में कई तकनीकी बातें हैं, यदि बीएलओ उन्हें पूरा नहीं कर पाता है, तो उसके लिए एक सफाई कर्मचारी को सहायक बनाया गया है। इस फॉर्म का वितरण तेजी से किया जा रहा है।"
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकारी डाटा के अनुसार सभी फॉर्म बांटे जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे कोई फॉर्म नहीं बंटे हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि फिर उसी प्रकार कलेक्शन का रिकॉर्ड बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह एक सोची-समझी साजिश है। बाबा साहेब भीमराव के द्वारा दिए गए वोट डालने के अधिकार को छीनने की योजना बनाई जा रही है।
उपचुनावों का उदाहरण देते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जब उपचुनाव हो रहा था, चुनाव आयोग ने बूथ लुटने दिया और बीजेपी के लोगों को वोट डालने दिया। यह एक रणनीति है ताकि लोकतंत्र इस देश से समाप्त हो जाए।