क्या चुनाव आयोग सच में सत्तापक्ष के लिए काम कर रहा है?: अरविंद सावंत

सारांश
Key Takeaways
- चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं।
- राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
- अर्थव्यवस्था और राजनीति की स्थिति पर चिंता।
- भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुख बना हुआ है।
- चुनाव प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है।
मुंबई, 24 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में विधानसभा चुनाव का आयोजन होने वाला है। इससे पूर्व, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' का गंभीर आरोप लगाया है, जिसे शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने समर्थन दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि चुनाव आयोग के अधिकारी सत्तापक्ष के लिए काम कर रहे हैं।
अरविंद सावंत ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि सबसे पहले, यह ध्यान रखें कि लोकसभा चुनाव और उसके बाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आते ही, उद्धव ठाकरे ने संदेह व्यक्त किया था। यहां तक कि जीते हुए उम्मीदवारों ने भी यह सवाल उठाया था कि वे वास्तव में कैसे जीते। ये बातें नई नहीं हैं। राहुल गांधी ने एक चुनाव क्षेत्र का उदाहरण देकर बताया कि कैसे 'वोट चोरी' की गई। चुनाव आयोग के अधिकारी सत्तापक्ष के लिए काम कर रहे हैं।
अरविंद सावंत ने सवाल उठाया कि चुनाव के दौरान कई गाड़ियां पकड़ी जाती हैं जिनमें पैसे होते हैं, लेकिन कभी यह नहीं बताया जाता कि यह पैसा कहां से आया।
उन्होंने केंद्र सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला करते हुए कहा कि वाशिंग मशीन ने इस देश का सत्यानाश कर दिया है। चाहे जितना भी भ्रष्टाचार करो, हमारे पास आ जाओ, तुम्हें क्लीन चिट मिल जाती है। इससे देश के संविधान को ठेस पहुंच रही है और राजनीति का स्तर गिर गया है।
उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग पारदर्शी है, तो वोटिंग की सीसीटीवी फुटेज क्यों नहीं उपलब्ध कराई जाती है? चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भ्रष्ट हैं, वे भाजपा के प्रवक्ता हैं।
उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले एशिया कप मैच को लेकर कहा कि जिन बहनों का सिंदूर छिन गया, उनसे सवाल करो कि क्या भारत-पाकिस्तान के बीच मैच होना चाहिए। उद्धव ठाकरे ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के समय खून खौल गया था। अब क्या ठंडा हो गया? क्या यह गृह मंत्री के बेटे के लिए ठंडा पड़ा?