मिडिल ईस्ट के संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार, जानें कारण

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मिडिल ईस्ट के संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार, जानें कारण

सारांश

ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के चलते, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गई हैं। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और इसका वैश्विक बाजार पर प्रभाव।

Key Takeaways

  • ईरान से जुड़ी स्थिति के कारण तेल की आपूर्ति बाधित हुई है।
  • कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गई हैं।
  • विश्लेषक मानते हैं कि कीमतें और बढ़ सकती हैं।
  • यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
  • इतिहास में भी ऐसे संकटों ने बड़ी आर्थिक समस्याएँ पैदा की हैं।

नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान से जुड़ी स्थिति के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति में रुकावट और वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के चलते कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तेजी का समर्थन करते हुए कहा कि यह ईरान के परमाणु खतरे का निपटारा करने की अस्थायी कीमत है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करने के बाद तेल की कीमतें जल्द ही घटेंगी, और यह दुनिया की सुरक्षा के लिए एक छोटी कीमत है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गईं हैं, क्योंकि मध्य पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादकों ने उत्पादन में कमी की है और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति लगभग ठप जैसी स्थिति में है।

वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चे तेल की कीमत लगभग 20.75 प्रतिशत या 18.83 डॉलर बढ़कर 109.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गई। वहीं, ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत भी 18 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 109.48 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

यह वृद्धि 1980 के दशक की शुरुआत के बाद से तेल वायदा कारोबार में सबसे बड़े साप्ताहिक उछालों में से एक मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में यह उछाल इसलिए आया है क्योंकि आशंकाएं हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रह सकती है। यह समुद्री मार्ग विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और वैश्विक तेल तथा तरलीकृत प्राकृतिक गैस का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि इस क्षेत्र में हमलों और धमकियों के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही काफी धीमी हो गई है और कई जहाज इस इलाके से गुजरने से बच रहे हैं।

खाड़ी क्षेत्र के कुछ तेल उत्पादकों ने उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। भंडारण टैंक भरने लगे हैं और निर्यात मार्ग बंद होने के कारण कुछ कंपनियों को कुओं को बंद करना या उत्पादन घटाना पड़ रहा है।

इस स्थिति का प्रभाव वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा है। एशियाई बाजारों में कारोबार शुरू होने के साथ ही शेयर बाज़ारों में तेज गिरावट देखी गई। जापान का बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 5 प्रतिशत गिर गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया का बाजार 7 प्रतिशत से अधिक टूट गया। दोनों अर्थव्यवस्थाएं आयातित तेल और गैस पर काफी हद तक निर्भर हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कुछ बाजार अनुमानों के अनुसार, इस वर्ष के अंत तक कच्चा तेल 143 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकता है।

ऊर्जा इतिहासकार डेनियल येर्गिन ने कहा कि यह स्थिति रोजाना तेल उत्पादन के लिहाज से दुनिया के इतिहास में सबसे बड़े व्यवधानों में से एक बन सकती है।

इस संघर्ष का प्रभाव वैश्विक व्यापार मार्गों पर भी पड़ रहा है। वाशिंगटन पोस्ट ने बताया कि क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच व्यापारिक जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस स्थिति का सबसे ज्यादा प्रभाव एशिया और यूरोप पर पड़ सकता है, क्योंकि ये क्षेत्र ऊर्जा के लिए फारस की खाड़ी से आने वाले आयात पर ज्यादा निर्भर हैं।

हालांकि अमेरिका अपने घरेलू तेल उत्पादन और बढ़ते ऊर्जा निर्यात के कारण कुछ हद तक सुरक्षित हो सकता है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि का असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। आमतौर पर ईंधन महंगा होने से परिवहन और खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।

इतिहास में भी फारस की खाड़ी में तेल संकट ने बड़ी आर्थिक समस्याएं पैदा की हैं। 1973 के अरब तेल प्रतिबंध और 1979 की ईरानी क्रांति के समय भी तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था और वैश्विक मंदी जैसी स्थिति बन गई थी।

Point of View

बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए भी चिंता का विषय है। संघर्ष की तीव्रता और उसके परिणामों का प्रभाव न केवल मध्य पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है। हमें इस स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
NationPress
09/03/2026

Frequently Asked Questions

कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति रुकने के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
क्या यह कीमतें स्थायी रहेंगी?
विश्लेषकों का मानना है कि अगर संघर्ष जारी रहता है, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।
इस स्थिति का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
यह स्थिति वैश्विक वित्तीय बाजारों और ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकती है।
क्या अमेरिका पर इस स्थिति का असर पड़ेगा?
हालांकि अमेरिका का घरेलू उत्पादन उच्च है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि का असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
क्या इतिहास में भी ऐसा कुछ हुआ है?
हाँ, 1973 के अरब तेल प्रतिबंध और 1979 की ईरानी क्रांति के समय भी तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था।
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