मध्य पूर्व के संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची
सारांश
Key Takeaways
- कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँचीं।
- आईईए और अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने कच्चा तेल जारी करने की घोषणा की।
- मध्य पूर्व में संघर्ष का कच्चे तेल पर सीधा असर।
- होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति से कीमतों में वृद्धि।
- वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का संकेत।
मुंबई, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों पर साफ नजर आ रहा है और गुरुवार को यह फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 9 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 100.76 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत भी लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
कच्चे तेल की तेजी उस समय आई है जब इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने कीमतों में कमी लाने हेतु इमरजेंसी रिजर्व से कच्चा तेल जारी करने की घोषणा की है।
पिछले बुधवार को आईईए ने 32 देशों के सदस्यों के साथ मिलकर इमरजेंसी रिजर्व से 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने की जानकारी दी, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
साथ ही, अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने भी घोषणा की है कि वह 172 मिलियन बैरल तेल अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व से जारी करेगा। ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि शिपमेंट अगले सप्ताह शुरू हो सकता है और इसे पूरा करने में लगभग 120 दिन लगेंगे।
इससे पहले, मध्य पूर्व में संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, लेकिन बाद में यह गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई थी।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में बाधा आना बताया जा रहा है। इसके साथ-साथ अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष में तेल टैंकरों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे कीमतों में और बढ़ोतरी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य, मध्य पूर्व में एक संकरा समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया में उत्पादित होने वाले लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार होता है।