क्या कांग्रेस का कल्चर वास्तव में मारपीट का है?
सारांश
Key Takeaways
- मधुबनी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प
- भाजपा और जदयू का कटाक्ष
- कांग्रेस का आंतरिक असंतोष
- राजनीतिक पदों के लिए संघर्ष
- कांग्रेस की संभावनाओं पर सवाल
पटना, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम की उपस्थिति में मधुबनी में कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प पर भाजपा और जदयू ने तीखा कटाक्ष किया है। सत्तापक्ष ने कहा कि कांग्रेस का मारपीट का कल्चर है। ये देश की भलाई के लिए नहीं, बल्कि सत्ता के लिए लड़ते हैं।
बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अब बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश में समाप्ति की कगार पर है। कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आ रही है। जो लोग पार्टी में बचे हैं, उनके बीच भी आंतरिक झगड़े और बंटवारे हो चुके हैं, जिससे पार्टी के सदस्यों के बीच टकराव बढ़ रहा है। इसका परिणाम मधुबनी में कांग्रेस के नेताओं के बीच हुई मारपीट में देखने को मिला।
उन्होंने कहा, अब कांग्रेस को और गिरने से कोई नहीं रोक सकता। यह अपने अंतिम दौर में है।
मंत्री लखेंद्र पासवान ने इस पर कहा कि दरअसल, कांग्रेस के नेताओं ने चुनाव में अपने कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया, "बिहार में कांग्रेस ने पैसे के आधार पर टिकट बेचने का कार्य किया। ऐसे में कार्यकर्ताओं को मान-सम्मान नहीं मिला और पार्टी के नेता पैसे लेकर टिकट बेचने लगे, तो कार्यकर्ता अपनी गरिमा के लिए कुछ भी कर सकते हैं।"
जदयू के एमएलसी खालिद अनवर ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में पद के लिए लड़ाई चल रही है। ये पद हमको मिल जाए, वही हमेशा से कांग्रेस की पुरानी परंपरा रही है। इस कारण से कांग्रेस कई हिस्सों में बंटी हुई है। लोग इसे देख रहे हैं। बिहार के लोग पहले ही उन्हें नकार चुके हैं और देश के लोग भी उन्हें आगे नकार देंगे।
गौरतलब है कि मधुबनी में कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष राजेश राम और पूर्व सीएलपी नेता शकील अहमद खान एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान अफरा-तफरी मच गई, जब पार्टी कार्यकर्ताओं के दो गुट आपस में भिड़ गए। इसके बाद धक्का-मुक्की और फिर लात-घूंसे का खेल शुरू हो गया।