क्या आधुनिक खाद्य तकनीकों से अलग-अलग व्यंजनों के लिए विकसित किया जाएगा 'कलाड़ी'?

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क्या आधुनिक खाद्य तकनीकों से अलग-अलग व्यंजनों के लिए विकसित किया जाएगा 'कलाड़ी'?

सारांश

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कलाड़ी को एक नई दिशा देने का निर्णय लिया है। जीआई-टैग प्राप्त इस पारंपरिक उत्पाद को बड़े पैमाने पर विकसित करने की योजना है। जानिए कैसे कलाड़ी का स्वाद और पोषण गुण बनाए रखते हुए इसे विभिन्न व्यंजनों में शामिल किया जाएगा।

Key Takeaways

  • कलाड़ी की पारंपरिक विधियों का संरक्षण
  • विविध व्यंजनों में कलाड़ी का उपयोग
  • शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग
  • स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
  • सरकार की 'एक जिला एक उत्पाद' योजना का लाभ

नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले का जीआई-टैग प्राप्त पारंपरिक दुग्ध उत्पाद 'कलाड़ी' को उसके असली स्वाद, बनावट और पोषण गुणों को बनाए रखते हुए बड़े पैमाने पर विकसित किया जाना चाहिए, ताकि इसे विभिन्न व्यंजनों में उपयोग किया जा सके।

मंत्री ने उल्लेख किया कि सरकार की 'एक जिला एक उत्पाद' योजना के माध्यम से कलाड़ी में मूल्य वृद्धि की जानी चाहिए और इसकी शेल्फ लाइफ को बढ़ाना आवश्यक है, ताकि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि किसी भी वैज्ञानिक प्रक्रिया से कलाड़ी का स्वाद, पोषण और पारंपरिक पहचान को नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसकी सबसे बड़ी समस्या इसकी कम शेल्फ लाइफ है, जिसके कारण यह स्थानीय बाजारों से बाहर नहीं जा पाती। उचित पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और वैज्ञानिक तरीकों से इसकी शेल्फ लाइफ को बढ़ाना अनिवार्य है।

मंत्री ने यह भी कहा कि कलाड़ी को विभिन्न व्यंजनों में इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते इसका पारंपरिक दूधिया स्वाद, नरम बनावट और खिंचने वाली विशेषता बनी रहे। उन्होंने कहा कि 'जम्मू की मोजरेला' कहलाने वाली कलाड़ी की विशेषता को बनाए रखना आवश्यक है।

बैठक के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर के दो प्रमुख संस्थानों, सीएफटीआरआई, मैसूरु के निदेशक डॉ. गिरिधर पर्वतम और आईआईआईएम, जम्मू के निदेशक डॉ. जबीर अहमद से संवाद किया और उन्हें कलाड़ी के पोषण, गुणवत्ता, मूल्य वृद्धि और शेल्फ लाइफ बढ़ाने पर मिलकर कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट कुछ हफ्तों में और पूरी रिपोर्ट छह महीनों में प्रदान की जाए।

यह भी बताया गया कि कच्चे फुल-फैट दूध से बनने वाली कलाड़ी को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी आर्थिक महत्वता में इजाफा हुआ है और इससे स्थानीय लोगों, विशेषकर ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। लेकिन इसकी कुछ दिनों की शेल्फ लाइफ अब भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

मंत्री ने कहा कि परियोजना के तहत जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों में बनने वाली कलाड़ी की पारंपरिक विधियों को दर्ज किया जाएगा और उद्योग के अनुकूल एक समान प्रक्रिया विकसित की जाएगी।

Point of View

बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित करेगा।
NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

कलाड़ी क्या है?
कलाड़ी एक पारंपरिक दुग्ध उत्पाद है जो जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में बनाया जाता है।
जीआई टैग का क्या महत्व है?
जीआई टैग से उत्पाद की पहचान और उसकी गुणवत्ता की पुष्टि होती है, जिससे इसकी बाजार में मांग बढ़ती है।
कलाड़ी की शेल्फ लाइफ क्यों कम है?
कलाड़ी की शेल्फ लाइफ सामान्यत: कम होती है, जो इसे व्यापक बाजार में प्रवेश से रोकती है।
सरकार इस उत्पाद के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार 'एक जिला एक उत्पाद' योजना के तहत कलाड़ी के विकास और इसके मूल्य वृद्धि पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
क्या कलाड़ी का इस्तेमाल विभिन्न व्यंजनों में हो सकता है?
हाँ, कलाड़ी को विभिन्न व्यंजनों में इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते इसका पारंपरिक स्वाद और पहचान बनी रहे।
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