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क्या शादी के लिए माता-पिता की मंजूरी वाला कानून बनाना चाहिए? राम कुमार गौतम ने हरियाणा विधानसभा में उठाई मांग

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क्या शादी के लिए माता-पिता की मंजूरी वाला कानून बनाना चाहिए? राम कुमार गौतम ने हरियाणा विधानसभा में उठाई मांग

सारांश

क्या माता-पिता की सहमति से विवाह अनिवार्य होना चाहिए? हरियाणा के भाजपा विधायक राम कुमार गौतम ने इस विषय पर महत्वपूर्ण मांग उठाई है। जानिए इस कानून के पीछे की सोच और इसके सामाजिक प्रभाव के बारे में।

मुख्य बातें

राम कुमार गौतम ने माता-पिता की सहमति को अनिवार्य करने वाला कानून बनाने की मांग की।
सामाजिक वातावरण को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
युवाओं की भावनाओं और पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन आवश्यक है।
राष्ट्रीय खेल दिवस पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
किसान और ग्रामीण खिलाड़ियों को प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

चंडीगढ़, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा के भाजपा विधायक राम कुमार गौतम ने प्रदेश में एक ऐसा कानून बनाने की मांग की है, जो उन युवाओं से संबंधित हो, जो माता-पिता की इच्छा के बिना घर से भागकर शादी कर लेते हैं। विधायक का मानना है कि लड़कों और लड़कियों को माता-पिता की सहमति से ही विवाह करना चाहिए।

राम कुमार गौतम के इस बयान पर भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है और इससे सामाजिक वातावरण को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।

हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में, भाजपा विधायक ने विवाह से पहले माता-पिता की सहमति को अनिवार्य करने वाला कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा, "कई बार बच्चों के भाग जाने के कारण परिवारों को गंभीर संकट, जैसे आत्महत्या, का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि एक ऐसा कानून बनाया जाए जिसमें शादी से पहले माता-पिता की अनुमति अनिवार्य हो।"

इस पर सुभाष बराला ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है, जो युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुजुर्गों को समान रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक वातावरण को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि सभी को इस पर विचार करना चाहिए ताकि सामाजिक समस्याएं न बढ़ें।

बराला ने युवाओं की आकांक्षाओं और भावनाओं का सम्मान करते हुए सामाजिक मानदंडों और संस्कृति को बनाए रखने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा युवाओं की भावनाओं और सामाजिक मर्यादाओं के बीच संतुलन की मांग कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर विचार करना जरूरी है, क्योंकि समाज के वातावरण को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए। प्रयास यह रहना चाहिए कि सामाजिक समरसता बनी रहे।

सुभाष बराला ने कहा कि राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर 29 से लेकर 31 अगस्त तक खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इस महोत्सव के तहत पूरे देश और प्रदेश में विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

29 अगस्त से युवाओं के लिए एक पोर्टल खोला जाएगा, जहां अलग-अलग खेलों के लिए पंजीकरण कराया जा सकेगा। बराला ने कहा कि इन प्रतियोगिताओं से ग्रामीण स्तर पर खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए विश्वास जताया कि इन प्रयासों से नई-नई युवा प्रतिभाएं सामने आएंगी, जो देश का नाम रोशन करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह एक जटिल मामला है जिसमें युवाओं की स्वतंत्रता और पारिवारिक मूल्यों का संतुलन बनाना आवश्यक है। समाज में सामंजस्य बनाए रखने के लिए संवाद और समझ की जरूरत है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या माता-पिता की सहमति के बिना शादी करना गलत है?
यह एक व्यक्तिगत और सामाजिक मामला है, जिसमें विभिन्न दृष्टिकोण हो सकते हैं। कई लोग इसे स्वतंत्रता का उल्लंघन मानते हैं जबकि कुछ इसे पारिवारिक मूल्यों का सम्मान समझते हैं।
क्या ऐसा कानून बनाना संभव है?
कानून बनाना संभव है, लेकिन इसके लिए व्यापक सामाजिक सहमति और विचार-विमर्श की आवश्यकता होगी।
इस कानून से समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस कानून का प्रभाव परिवारों के बीच संवाद को बढ़ाने और सामाजिक मुद्दों को समझने में मदद कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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