क्या पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना उचित है? अमित शाह और नड्डा ने की निंदा, बोले- राहुल मांगें माफी

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क्या पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना उचित है? अमित शाह और नड्डा ने की निंदा, बोले- राहुल मांगें माफी

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों का विवाद बढ़ता जा रहा है। अमित शाह और जेपी नड्डा ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से माफी की मांग की है। क्या राजनीति में इस तरह की भाषा का उपयोग उचित है? जानिए पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • कांग्रेस और राजद की 'वोटर अधिकार यात्रा' का विवादित बयान।
  • अमित शाह और जेपी नड्डा का कड़ा विरोध।
  • राजनीति में भाषा का स्तर महत्वपूर्ण है।
  • लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखना आवश्यक।
  • भविष्य में राजनीतिक संवाद में सुधार की आवश्यकता।

नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस और राजद की 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी का मामला तेजी से बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को इस कुकृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "बिहार के दरभंगा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कांग्रेस और राजद के मंच से जिस प्रकार अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है, वह न केवल निंदनीय है, बल्कि हमारे लोकतंत्र को भी कलंकित करने वाला है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की राजनीति अपने निम्न स्तर पर आ पहुंची है। उनको यह बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है कि कैसे एक गरीब मां का बेटा बीते 11 वर्षों से प्रधानमंत्री पद पर बैठा हुआ है और अपने नेतृत्व में देश को निरंतर आगे ले जा रहा है। यह साफ दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी अपने उस चाल-चरित्र में वापस लौट आई है, जिसके माध्यम से उसने हमेशा देश की राजनीतिक संस्कृति में जहर घोलने का काम किया।"

उन्होंने आगे कहा, "गुजरात के मुख्यमंत्री काल से लेकर आज तक गांधी परिवार ने प्रधानमंत्री के खिलाफ नफरत फैलाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। परंतु अब तो इन्होंने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। यह हर मां का, हर बेटे का अपमान है, जिसके लिए 140 करोड़ देशवासी उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।"

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से माफी की मांग की। उन्होंने गुरुवार को एक बयान में कहा, "कांग्रेस की तथाकथित 'वोट अधिकार यात्रा' में जिस तरह से कांग्रेस-राजद के मंच से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली दी गई, वह घोर निंदनीय है। अभद्रता की सारी सीमा लांघ चुके दो शहजादों ने बिहार की धरती पर बिहार की संस्कृति का भी तिरस्कार किया है। उन्होंने बिहार की परंपरा को भी बदनाम किया है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को अविलंब इस कुकृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "राहुल-तेजस्वी और 'इंडी ठगबंधन' के नेताओं को यह बात हजम नहीं हो रही है कि एक गरीब मां का बेटा देश के प्रधानमंत्री पद पर कैसे आसीन है और कैसे देश की जनता ने उन्हें अपने दिलों में बैठाया हुआ है। राजद और कांग्रेस ने सार्वजनिक मंच से उनका अपमान किया है और देश की महान संस्कृति तथा परंपरा में कभी इसको स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इस कुकृत्य के लिए जितनी निंदा की जाए, वह कम है।"

जेपी नड्डा ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर भाषा की मर्यादा को लांघने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "राहुल और तेजस्वी की तू-तड़ाक की भाषा ने राजनीतिक मर्यादा की सीमा को तार-तार करके रख दिया है। राहुल और तेजस्वी को देखकर उनके नेताओं ने भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। बिहार की जनता उनकी भाषा को कभी स्वीकार नहीं करेगी और उन्हें उचित जवाब देगी।"

Point of View

मैं यह कहना चाहता हूं कि राजनीति में भाषा का स्तर बहुत महत्वपूर्ण होता है। अभद्र टिप्पणियाँ न केवल व्यक्तिगत अपमान होती हैं, बल्कि यह लोकतंत्र की गरिमा को भी नुकसान पहुंचाती हैं। सभी राजनीतिक दलों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

क्यों राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से माफी मांगी जा रही है?
कांग्रेस और राजद की 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिसके लिए अमित शाह और जेपी नड्डा ने माफी की मांग की है।
अमित शाह ने क्या कहा?
अमित शाह ने कहा कि यह अपमान केवल पीएम मोदी का नहीं, बल्कि हर मां और बेटे का अपमान है।
क्या यह पहली बार है जब मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई है?
नहीं, गांधी परिवार ने हमेशा मोदी के खिलाफ नफरत फैलाने का काम किया है, लेकिन यह घटना गंभीर मानी जा रही है।
कांग्रेस का क्या कहना है?
कांग्रेस ने इस टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वे इसे राजनीतिक द्वेष मानते हैं।
इस विवाद का राजनीतिक प्रभाव क्या होगा?
इससे बिहार में आगामी चुनावों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि लोग भाषा और संस्कृति का सम्मान करते हैं।