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क्या एससीआर छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति का नया इंजन बनेगा? : ओपी चौधरी

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क्या एससीआर छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति का नया इंजन बनेगा? : ओपी चौधरी

सारांश

छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने एससीआर की स्थापना की घोषणा की है, जो प्रदेश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। नक्सलवाद का उन्मूलन और मोदी सरकार की कर नीतियों के बारे में चर्चा करते हुए, उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदेश विकास के नए आयाम छुएगा। इस पहल से रोजगार और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्य बातें

छत्तीसगढ़ में एससीआर की स्थापना से आर्थिक प्रगति में तेजी आएगी।
नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की गई है।
मोदी सरकार की कर नीतियों ने मध्यम वर्ग को राहत दी है।
सरकार का फोकस गरीबों के कल्याणकारी कार्यक्रमों पर है।
अगले बजट में जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।

रायपुर, 15 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सोमवार को एससीआर (स्टेट कैपिटल रीजन) की स्थापना, नक्सलवाद के उन्मूलन की समयसीमा, और मोदी सरकार की कर नीतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास के नए आयाम छुएगा।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओपी चौधरी ने कहा कि एनसीआर (नेशनल कैपिटल रीजन) की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में एससीआर की स्थापना की गई है। चुनावी संकल्प पत्र में इसका उल्लेख किया गया था और अब यह अधिनियम रूप में लागू होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आवास एवं शहरी विकास विभाग द्वारा विधानसभा में इसे पारित किया गया था और राज्यपाल की स्वीकृति के बाद यह एक नवंबर से मूर्त रूप ले लेगा।

चौधरी ने कहा कि एससीआर प्रदेश की आर्थिक प्रगति का नया इंजन बनेगा। इसके अंतर्गत रायपुर, नवा रायपुर, बीिरगांव, दुर्ग, भिलाई और राजनांदगांव को जोड़कर एकीकृत क्षेत्र का निर्माण होगा।

उन्होंने कहा कि तकनीकी अध्ययन और नीति आयोग के सहयोग से यहां एकीकृत आर्थिक योजना तैयार की जाएगी, जिससे आने वाले 10–15 वर्षों में छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। यह पहल न केवल राजस्व वृद्धि में सहायक होगी, बल्कि सरगुजा और बस्तर जैसे पिछड़े क्षेत्रों के विकास को भी नई दिशा देगी।

चौधरी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि नक्सलवाद पर उनकी कोई स्पष्ट रणनीति नहीं थी, जिसके कारण छत्तीसगढ़ को पांच साल अतिरिक्त इंतजार करना पड़ा।

उन्होंने दावा किया कि यदि 2018 में भाजपा की सरकार बनी होती तो केंद्र के मार्गदर्शन में माओवाद का सफाया पहले ही हो जाता। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा तय मार्च 2026 की समयसीमा तक माओवाद का अंत हो जाएगा।

वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि आयकर छूट की सीमा को सीधे 12 लाख रुपये तक बढ़ाना एक ऐतिहासिक कदम रहा है। उन्होंने इसे मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत बताया।

इसी कड़ी में उन्होंने जीएसटी रिफॉर्म 2 को भी जनता के लिए बड़ा उपहार बताया। 300 से अधिक वस्तुओं पर कर घटाया गया, जिससे लोअर मिडिल क्लास और मिडिल क्लास को फायदा मिला। आम उपभोक्ता वस्तुएं जैसे साबुन, टूथपेस्ट और शैम्पू पर कर घटाने से महंगाई में राहत मिली। वहीं, टेक्सटाइल जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर में जीएसटी सुधार से रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला।

चौधरी ने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य केवल सब्सिडी आधारित कल्याणकारी योजनाएं नहीं हैं, बल्कि उन्हें सतत बनाने के लिए ‘गति’ रणनीति लागू की गई है। इस रणनीति के तहत सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में तीव्र आर्थिक विकास हो, राजस्व वृद्धि हो और गरीबों के कल्याणकारी कार्यक्रम सतत रूप से चलते रहें।

वित्त मंत्री ने कहा कि नवंबर से बजट को लेकर बैठकों का दौर शुरू होगा। इसमें जनहित के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश तेजी से आर्थिक और सामाजिक विकास की राह पर आगे बढ़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नक्सलवाद के मुद्दे पर भी प्रभाव डालेगी। केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन इस क्षेत्र के लिए लाभदायक साबित हो सकता है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल कैसे आगे बढ़ती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एससीआर की स्थापना से क्या लाभ होगा?
यह योजना आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और नक्सलवाद के उन्मूलन में मदद करेगी।
ओपी चौधरी ने क्या कहा?
उन्होंने एससीआर को प्रदेश की आर्थिक प्रगति का नया इंजन बताया और केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना की।
इस योजना का समयसीमा क्या है?
एससीआर के लागू होने की योजना एक नवंबर से है।
कांग्रेस का इस पर क्या कहना है?
ओपी चौधरी ने कांग्रेस पर नक्सलवाद के मुद्दे पर कोई स्पष्ट रणनीति न होने का आरोप लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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