क्या उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत मिलनी चाहिए थी? : शकील अहमद खान
सारांश
Key Takeaways
- उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की।
- कांग्रेस नेता शकील अहमद खान का मानना है कि उन्हें जमानत मिलनी चाहिए थी।
- बीसीसीआई के निर्णय पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की निंदा की गई।
- भाजपा नेताओं की आलोचना की गई।
- अदालत की कार्यवाही पर भी चर्चा हुई।
पटना, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली दंगों के संदर्भ में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने पर भाजपा नेताओं ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया, जबकि अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसका विरोध किया। उनके अनुसार, दोनों को जमानत मिलनी चाहिए थी। कांग्रेस के नेता शकील अहमद खान ने भी इस बात की पुष्टि की कि उन्हें जमानत मिलनी चाहिए थी।
शकील अहमद खान ने पटना में राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि सभी को जमानत मिलेगी। अदालत ने अपना फैसला सुनाया है और मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। लेकिन, सामान्य राय यह है कि उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत मिलनी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनके जमानत आवेदन को खारिज कर दिया है। मुझे लगता है कि हर भारतीय नागरिक को अदालत से न्याय की उम्मीद करनी चाहिए।
बांग्लादेशी क्रिकेटर को केकेआर से बीसीसीआई के निर्देश पर रिलीव करने के मामले में उन्होंने कहा कि बीसीसीआई ने यह निर्णय अपने मर्ज़ी से लिया है। बीसीसीआई के चेयरमैन शाहरुख खान नहीं हैं। बीसीसीआई के चेयरमैन में विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हैं। किसी भी देश में अल्पसंख्यकों पर हमला होना ठीक नहीं है। हमारे देश में भी अगर दलितों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा होती है, तो यह भी गलत है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर बांग्लादेश की सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए और भारत सरकार को भी इस पर गम्भीरता से ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि हम इस मुद्दे पर कुछ नहीं कह रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि हम भी बोल रहे हैं। मैं भाजपा से यह पूछना चाहता हूं कि जब दलित या अल्पसंख्यक पर हमला होता है, क्या वे उसी लहजे में बोलते हैं? भाजपा का चेहरा दोहरा है।
आईआरसीटीसी के मामले पर उन्होंने कहा कि अदालत की कार्यवाही चल रही है। हमारा मानना है कि अगर सभी विपक्षी नेता भाजपा के साथ समझौता कर लें, तो कोई मामला नहीं होगा। ऐसा कई बार देखा गया है। अजीत पवार ने कहा था कि भाजपा ने आरोप लगाया था, लेकिन आज वे हमारे साथ हैं।