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क्या लद्दाख दुर्घटना में शहीद हुए लेफ्टिनेंट कर्नल और सेना के जवान पर उपराज्यपाल का दुख?

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क्या लद्दाख दुर्घटना में शहीद हुए लेफ्टिनेंट कर्नल और सेना के जवान पर उपराज्यपाल का दुख?

सारांश

लद्दाख में हुई एक दुखद दुर्घटना में लेफ्टिनेंट कर्नल और एक जवान की शहादत, उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। क्या हैं इसके पीछे की वजहें? जानें इस रिपोर्ट में।

मुख्य बातें

लद्दाख में हुई दुर्घटना में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सेना का जवान शहीद हुए हैं।
उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने शहीदों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
घटनास्थल पर लुढ़कते पत्थरों के कारण यह दुर्घटना हुई।
घायलों को लेह के सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
लद्दाख का पहाड़ी इलाका ड्राइविंग के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

जम्मू, 31 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। लद्दाख में हुई एक दुखद दुर्घटना में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सेना का जवान शहीद हो गए हैं। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया।

उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा, "यह घटना अत्यंत दुखद है। लद्दाख की सड़कें भले ही अच्छी हैं, लेकिन कुछ स्थान ऐसे हैं जो चुनौतीपूर्ण होते हैं, जिसके कारण इस प्रकार की घटनाएं घटित होती हैं। मैं शहीद के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। इस हादसे के पीछे की वजह का पता नहीं चल पाया है, लेकिन जब हमारे जवान जो देश की सेवा में लगे हैं, ऐसे हादसे का सामना करते हैं तो हृदय में बहुत दुःख होता है।"

दरअसल, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह जिले में बुधवार को एक लुढ़कते हुए पत्थर ने सेना के वाहन को टकरा दिया। इस भयानक दुर्घटना में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक जवान की जान चली गई, जबकि तीन अन्य सैन्य अधिकारी घायल हो गए।

एक अधिकारी ने बताया, "आज सुबह लगभग 11:30 बजे जब सेना का काफिला दुरबुक से चोंगताश की ओर जा रहा था, तभी एक पत्थर ने सेना के वाहन को टकरा दिया। इस दुर्घटना में लेफ्टिनेंट कर्नल और एक जवान की जान गई, जबकि मेजर रैंक के दो अधिकारी और एक कैप्टन घायल हुए हैं।"

अधिकारी के अनुसार, घायलों को इलाज के लिए लेह के सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अधिकारियों ने बताया, "हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान लेफ्टिनेंट कर्नल भानु प्रताप सिंह और लांस दफादार दलजीत सिंह के रूप में हुई है। घायलों की पहचान मेजर मयंक शुभम, मेजर अमित दीक्षित और कैप्टन गौरव के रूप में हुई है।"

हालांकि, इसे एक सुरक्षित ड्राइविंग क्षेत्र माना जाता है, लेकिन लद्दाख का पहाड़ी इलाका अपनी ऊँचाई और ऊबड़-खाबड़ भौगोलिक स्थिति के कारण कभी-कभी ड्राइवरों के लिए चुनौती बन जाता है।

किसी गुजरते वाहन से लुढ़कते पत्थर के टकराने जैसी अप्रत्याशित दुर्घटनाओं को कम से कम एक दुर्भाग्यपूर्ण त्रासदी ही कहा जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। हमें हमेशा अपने जवानों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लद्दाख दुर्घटना में कितने जवान शहीद हुए?
इस दुर्घटना में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सेना का जवान शहीद हुए हैं।
घायलों की संख्या कितनी है?
घायलों की संख्या तीन है, जिसमें दो मेजर और एक कैप्टन शामिल हैं।
उपराज्यपाल ने इस घटना पर क्या कहा?
कविंदर गुप्ता ने इसे अत्यंत दुखद घटना बताया और शहीद के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
क्या लद्दाख की सड़कें सुरक्षित हैं?
हालांकि लद्दाख की सड़कें सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन चुनौतीपूर्ण स्थानों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
इस घटना के कारण क्या थे?
इस घटना का कारण लुढ़कते पत्थर का टकराना बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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