क्या लाल किला आतंकी हमले के दोषी अशफाक की क्यूरेटिव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा?
सारांश
Key Takeaways
- लाल किला आतंकी हमला 2000 में हुआ था।
- सुप्रीम कोर्ट ने अशफाक की क्यूरेटिव याचिका पर नोटिस जारी किया।
- अशफाक को पहले फांसी की सजा सुनाई गई थी।
- इस मामले में कुल 21 लोग आरोपी थे।
- अशफाक के खिलाफ कई कानूनी कदम उठाए गए हैं।
नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 2000 के चर्चित लाल किला आतंकी हमले में दोषी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक से संबंधित मामले में कानूनी गतिविधियों में फिर से तेजी आई है। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।
हालांकि, इससे पहले उसकी पुनर्विचार याचिका और क्यूरेटिव याचिका दोनों ही खारिज हो चुकी थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य हालिया निर्णय ने अशफाक को एक बार फिर सुनवाई का अवसर प्रदान किया है।
अशफाक, जो कि लश्कर-ए-तैयबा का एक आतंकवादी और एक पाकिस्तानी नागरिक है, को साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लाल किला हमले के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
22 दिसंबर 2000 को, लश्कर-ए-तैयबा के छह आतंकवादियों ने दिल्ली के लाल किले में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें तीन लोगों की जान गई। इनमें एक संतरी और राजपूताना राइफल्स के दो जवान शामिल थे।
26 दिसंबर 2000 को दिल्ली पुलिस ने अशफाक और उसकी पत्नी रहमाना यूसुफ को जामिया नगर से गिरफ्तार किया।
लंबी सुनवाई के बाद, 2005 में ट्रायल कोर्ट ने अशफाक समेत सात आरोपियों को दोषी ठहराया और अशफाक को फांसी की सजा सुनाई।