तमिलनाडु उपचुनाव: मदुरांतकम और धरापुरम में एनटीके व वाम दलों की जमानत जब्त, 43 उम्मीदवार फिसले
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मदुरांतकम और धरापुरम विधानसभा उपचुनावों में नाम तमिलर काची (एनटीके) और वाम दलों के उम्मीदवार अपनी जमानत बचाने में नाकाम रहे। 10 अक्टूबर 2026 को घोषित नतीजों के अनुसार, दोनों सीटों पर मिलाकर कुल 43 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई, जो तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके), द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के वर्चस्व के बीच तीसरी और चौथी धारा की पार्टियों के सिकुड़ते जनाधार को रेखांकित करता है।
मदुरांतकम में मतदान का हाल
मदुरांतकम सीट पर 27 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे, जिनमें से 24 की जमानत जब्त हो गई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — माकपा की उम्मीदवार सुगंधी को महज 1,986 मत मिले, जबकि एनटीके के जानकीरामन को 2,709 वोट प्राप्त हुए। दोनों के संयुक्त मत केवल 4,695 रहे।
इसके विपरीत, टीवीके की उम्मीदवार मरगाथम कुमारवेल ने 74,048 मतों के साथ जीत दर्ज की। DMK के परंथमन 54,008 वोटों के साथ दूसरे और AIADMK की कनिथा संपत 47,450 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। इन तीनों की ही जमानत बच सकी। निर्वाचन क्षेत्र में 2,13,815 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,84,640 ने मताधिकार का प्रयोग किया और 652 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना।
धरापुरम में मतदान का हाल
धरापुरम विधानसभा सीट पर 22 उम्मीदवारों में से 19 की जमानत जब्त हुई। एनटीके की उम्मीदवार कार्तिका को 5,268 वोट मिले — जो मदुरांतकम के मुकाबले अधिक है — फिर भी वे जमानत बचाने की न्यूनतम सीमा से काफी नीचे रहीं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के उम्मीदवार लक्ष्मणन को केवल 1,157 मत मिले। दोनों के संयुक्त 6,425 वोट भी जमानत बचाने के लिए अपर्याप्त रहे।
टीवीके की सत्यबामा ने 66,841 वोटों से बाज़ी मारी। DMK की सुकन्या 57,370 मतों के साथ दूसरे और AIADMK की भानुमति 45,280 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। 2,23,306 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,79,214 ने मतदान किया और 677 मतदाताओं ने नोटा चुना।
तीन प्रमुख दलों का एकाधिकार
दोनों सीटों पर टीवीके, DMK और AIADMK ने मतों पर स्पष्ट वर्चस्व स्थापित किया। मदुरांतकम में इन तीन दलों को कुल 1,75,506 और धरापुरम में 1,69,491 वोट मिले। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में टीवीके के तेज़ी से उभरते जनाधार ने पारंपरिक वाम और क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक जगह और सिकोड़ दी है।
गौरतलब है कि दोनों सीटों पर वाम दलों के उम्मीदवारों को 2,000 से भी कम वोट मिले, जो राज्य में उनकी सांगठनिक कमज़ोरी को साफ़ दर्शाता है। यह तमिलनाडु में वाम दलों की उस दीर्घकालिक गिरावट की कड़ी है, जो पिछले कई विधानसभा चुनावों में लगातार देखी जा रही है।
आगे क्या होगा
इन नतीजों के बाद एनटीके और वाम दलों के समक्ष अपनी रणनीति पर पुनर्विचार की ज़रूरत और गहरी हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तमिलनाडु में त्रिकोणीय मुकाबले की नई संरचना — जिसमें टीवीके तेज़ी से नई ताक़त बन रही है — छोटे दलों के लिए चुनावी स्थान और संकरा करती जा रही है। आने वाले नगर निकाय और विधानसभा चुनावों में इन दलों का प्रदर्शन यह तय करेगा कि क्या वे गठबंधन की राजनीति में प्रासंगिक भूमिका निभा सकते हैं।