मध्य प्रदेश कैबिनेट ने सोयाबीन भावांतर योजना को मंजूरी दी, 22 अक्टूबर से बिक्री शुरू
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार की कैबिनेट ने 15 अक्टूबर 2026 को भोपाल में हुई मंत्रि-परिषद बैठक में सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भावांतर योजना लागू करने की स्वीकृति दी। यह निर्णय खरीफ वर्ष 2026 में किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से लिया गया है। बैठक में कुल ₹27,000 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों के प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी गई।
योजना की रूपरेखा और दायरा
यह भावांतर योजना केंद्र सरकार के 'प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान' (PM-AASHA) के तहत संचालित 'प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम' (PDPS) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप क्रियान्वित की जाएगी। इसका मुख्य लक्ष्य राज्य के सोयाबीन उत्पादकों को औसत गुणवत्ता की उपज पर MSP की गारंटी देना है।
योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। अधिसूचित मंडियों में उपज बेचने की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर संशोधित किया जा सकेगा।
भुगतान संरचना: कब मिलेगी भावांतर राशि
सरकारी निर्णय के अनुसार, यदि मंडी में बिक्री मूल्य MSP के बराबर या उससे अधिक रहता है तो कोई प्रतिपूर्ति नहीं दी जाएगी। यदि बिक्री मूल्य MSP से कम लेकिन मॉडल रेट से अधिक है, तो किसान को MSP और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच के अंतर की राशि मिलेगी। वहीं, यदि बिक्री मूल्य मॉडल रेट के बराबर या उससे कम हो, तो MSP और मॉडल रेट के अंतर की पूरी राशि सीधे किसान के पंजीकृत बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।
गौरतलब है कि यदि किसी किसान ने 1 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 के बीच — यानी योजना की विक्रय अवधि शुरू होने से पहले — मंडी में सोयाबीन बेची है, तो उस मात्रा को उसकी कुल पात्रता सीमा में से घटाकर केवल शेष मात्रा पर ही भावांतर भुगतान मान्य होगा।
मॉडल रेट निर्धारण की प्रक्रिया
भुगतान में पारदर्शिता लाने के लिए मॉडल रेट की व्यवस्था लागू की गई है। सीजन के प्रथम 14 दिनों के लिए मॉडल रेट का निर्धारण प्रदेश की समस्त मंडियों के भारित औसत के आधार पर होगा, जो 22 अक्टूबर 2026 से प्रभावी रहेगा। इसके बाद प्रतिदिन पिछले 14 दिनों के भारित औसत के आधार पर मॉडल रेट तय किया जाएगा और उसे ई-मंडी पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
वित्तीय व्यवस्था और क्रियान्वयन समितियाँ
भावांतर राशि का भुगतान मंडी बोर्ड द्वारा DBT के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाएगा। इसकी प्रतिपूर्ति सर्वप्रथम राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के मूल्य स्थिरीकरण कोष से होगी। यदि कोष में राशि अपर्याप्त हो, तो राज्य सरकार मंडी बोर्ड को ₹1,500 करोड़ की साख सीमा (क्रेडिट लिमिट) एक वर्ष के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराएगी। योजना के सुचारु क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में क्रियान्वयन समितियाँ गठित की जाएंगी।
कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले
मंत्रि-परिषद ने जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित 94 सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों के परिवहन के लिए ₹241 करोड़ 88 लाख की स्वीकृति दी। इसके अलावा, नवगठित चार जिलों — निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर — में महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के लिए 24 नवीन पदों के सृजन तथा प्रतिस्थापन से 12 पदों की स्वीकृति भी दी गई।
यह योजना ऐसे समय में लागू हो रही है जब राज्य में सोयाबीन की कीमतों में उतार-चढ़ाव किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। भावांतर के डिजिटल और पारदर्शी ढाँचे से यह देखना होगा कि जमीनी स्तर पर पात्र किसान समय पर पंजीयन कर पाते हैं या नहीं।