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महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों में डिजिटल लत के अध्ययन के लिए बनाई नई टास्क फोर्स

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महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों में डिजिटल लत के अध्ययन के लिए बनाई नई टास्क फोर्स

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत के खतरों को लेकर विशेषज्ञों की एक टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टास्क फोर्स बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल सुरक्षा पर गहन अध्ययन करेगी, जो राज्य की 4 करोड़ बच्चों की भलाई के लिए महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने डिजिटल लत पर अध्ययन करने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया।
टास्क फोर्स में विभिन्न विशेषज्ञ शामिल हैं।
राज्य में 4 करोड़ बच्चे डिजिटल लत के खतरे में हैं।
सरकार रिपोर्ट के माध्यम से इस समस्या को हल करने की योजना बना रही है।
डिजिटल प्लेटफार्मों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

मुंबई, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने बुधवार को एक विशेषज्ञों की टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है, जो बच्चों में डिजिटल एडिक्शन और उसके दुष्प्रभावों का गहन अध्ययन करेगी।

इस टास्क फोर्स में शिक्षा विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक, बाल परामर्शदाता, तकनीकी विशेषज्ञ, प्रबंधन सलाहकार, डॉक्टर, कानूनी विशेषज्ञ और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल रहेंगे।

राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आशीष शेलार ने विधान परिषद में जानकारी देते हुए बताया कि इस विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट विधानसभा के अगले सत्र से पहले प्रस्तुत की जाएगी। यह घोषणा तब की गई, जब सदस्य निरंजन दावखरे और संजय केनेकर ने युवाओं और नाबालिगों में सोशल मीडिया की लत से जुड़े बढ़ते खतरों को उठाया।

इस चर्चा में प्रवीण दरेकर, चित्रा वाघ, भाई जगताप, और उमा खापरे जैसे कई एमएलसी भी उपस्थित थे। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या गेमिंग ऐप और सोशल मीडिया के लिए कोई आयु सीमा तय की जाएगी और क्या नाबालिगों को लक्षित डिजिटल विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।

मंत्री शेलार ने बताया कि 2 फरवरी को आईटी विभाग के प्रधान सचिव वीरेंद्र सिंह को टास्क फोर्स के गठन के लिए लिखित निर्देश दिए गए थे। राज्य में 18 वर्ष से कम आयु के लगभग 4 करोड़ बच्चे हैं, जिनमें से करीब 3 करोड़ 15 वर्ष से कम आयु के हैं। उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत एक गंभीर सार्वजनिक मुद्दा है।

सरकार ने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए विधानमंडल के दोनों सदनों के सदस्यों की एक समिति भी गठित करेगी। टास्क फोर्स बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास पर प्रभाव, डिजिटल प्लेटफार्मों के संतुलित उपयोग, पारिवारिक और सांस्कृतिक अंतर, ग्रामीण-शहरी और आय वर्गों के बीच अंतर, आर्थिक प्रभाव और उत्पादकता सहित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ढांचों का अध्ययन करेगी।

मंत्री शेलार ने अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि मोबाइल गेम डाउनलोड के मामले में भारत विश्व में पहले स्थान पर है। वैश्विक गेमिंग बाजार का मूल्य 200 अरब डॉलर से अधिक है और महाराष्ट्र का घरेलू उद्योग 2027 तक 8.6 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

अध्ययन के अनुसार, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में 'गेमिंग डिसऑर्डर' तेजी से बढ़ रहा है। राज्य के पांच केंद्रों के आंकड़ों में हर 10 क्लिनिकल मामलों में 3 गेमिंग एडिक्शन से जुड़े पाए गए। स्कूलों में किए गए 'इंटरनेट डिपेंडेंसी स्केल' सर्वे में 40 प्रतिशत बच्चों में मध्यम से गंभीर स्तर की गेमिंग लत पाई गई।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, लेकिन महाराष्ट्र टास्क फोर्स की सिफारिशें औपचारिक रूप से केंद्र को भेजी जाएंगी। साथ ही, सरकार बौद्धिक विकास को बढ़ावा देने वाले खेलों को प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रोत्साहित करने की योजना भी बना रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और विशेषज्ञों की टास्क फोर्स का गठन इस दिशा में एक सकारात्मक पहल है। यह अध्ययन न केवल बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, बल्कि समाज में जागरूकता भी बढ़ाएगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टास्क फोर्स में कौन-कौन लोग शामिल हैं?
इस टास्क फोर्स में शिक्षा विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक, बाल परामर्शदाता, तकनीकी विशेषज्ञ, डॉक्टर, कानूनी विशेषज्ञ और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल हैं।
टास्क फोर्स की रिपोर्ट कब पेश की जाएगी?
यह रिपोर्ट विधानसभा के अगले सत्र से पहले पेश की जाएगी।
राज्य में कितने बच्चे डिजिटल लत से प्रभावित हैं?
राज्य में 18 वर्ष से कम आयु के लगभग 4 करोड़ बच्चे हैं, जिनमें से कई डिजिटल लत से प्रभावित हो रहे हैं।
क्या सरकार गेमिंग ऐप के लिए आयु सीमा निर्धारित करेगी?
सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है और टास्क फोर्स के सुझावों पर कार्रवाई कर सकती है।
डिजिटल लत के दुष्प्रभाव क्या हैं?
डिजिटल लत बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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