भारतीय रेलवे में सुरक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार: फ्रैक्चर 92% और वेल्ड फेल्योर 93% कम हुए
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नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय रेलवे में रेल पटरियों के फ्रैक्चर की घटनाएं 92 प्रतिशत और वेल्ड फेल्योर 93 प्रतिशत तक कम हो गई हैं, जो ट्रैक सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है।
एक राष्ट्रीय प्रकाशन में अपने लेख में वैष्णव ने कहा कि ये उपलब्धियां 2014 के बाद से लागू किए गए व्यापक संरचनात्मक परिवर्तनों का परिणाम हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे संचालन में सुरक्षा को उच्चतम प्राथमिकता दी गई।
उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर रेलवे सुरक्षा का आकलन प्रति अरब यात्री-किलोमीटर पर होने वाली मौतों या दुर्घटनाओं के आधार पर किया जाता है, जिससे विभिन्न देशों के बीच तुलना संभव होती है।
वैष्णव के अनुसार, जबकि यूरोपीय संघ में यह आंकड़ा लगभग 0.09 है, भारत ने अपने ‘कंसिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स’ को सुधारकर 0.01 तक पहुंचा दिया है, जो भारत की स्थिति को उन देशों में मजबूत बनाता है जिनके पास बड़े और जटिल रेल नेटवर्क हैं।
उन्होंने दशक-दर-दशक के आंकड़ों को इस बदलाव का स्पष्ट प्रमाण बताया। कंसिक्वेंशियल ट्रेन दुर्घटनाएं 2014-15 में 135 से घटकर 2025-26 में केवल 16 रह गई हैं, जो 89 प्रतिशत की कमी को दर्शाती हैं।
इसी समय में दुर्घटना सूचकांक 0.11 से घटकर 0.01 हो गया है, जो यह संकेत देता है कि ट्रेन संचालन के विस्तार के बावजूद रेलवे नेटवर्क पहले से अधिक सुरक्षित हो गया है।
वैष्णव ने कहा कि भारत जैसे जटिल रेल तंत्र में, जहां यात्री, माल, उपनगरीय और एक्सप्रेस सेवाएं एक ही ट्रैक पर चलती हैं, यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने इस बदलाव को केवल क्रमिक सुधार नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक परिवर्तन बताया, जो निरंतर निवेश, तकनीकी उन्नयन और सुरक्षा के प्रति दीर्घकालिक नीति प्रतिबद्धता के कारण संभव हुआ है।
वैष्णव ने कहा, “भारत की रेलवे सुरक्षा यात्रा को वैश्विक मानकों से तुरंत तुलना के बजाय सुधार की गति और नीयत के आधार पर देखना चाहिए। यही दृष्टिकोण देश को धीरे-धीरे दुनिया के अग्रणी रेल नेटवर्क के समकक्ष ला रहा है।”