भारतीय रेलवे ने 11 वर्षों में 942 मिलियन डॉलर का एफडीआई आकर्षित किया
सारांश
Key Takeaways
- भारतीय रेलवे ने 942 मिलियन डॉलर का एफडीआई आकर्षित किया है।
- 2014-15 से दिसंबर 2025 के बीच का आंकड़ा।
- हाई-स्पीड ट्रेनों और रेलवे नेटवर्क के विकास में निवेश।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
- रेलवे सेक्टर में मजबूत निर्माण आधार स्थापित हुआ है।
नई दिल्ली, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सरकार ने बुधवार को जानकारी दी है कि भारतीय रेलवे ने पिछले 11 वर्षों में 942 मिलियन डॉलर (लगभग 7,800 करोड़ रुपए) का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित किया है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रेलवे को 2014-15 से दिसंबर 2025 के बीच कुल 942 मिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जो इस क्षेत्र में विदेशी निवेशकों की लगातार बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे के बुनियादी ढांचे में ऑटोमेटिक रूट के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है।
उन्होंने बताया कि इस नीति के कारण हाई-स्पीड ट्रेनों, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन, सिग्नलिंग सिस्टम और यात्री और माल ढुलाई टर्मिनलों जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी निवेश में वृद्धि हुई है।
मंत्री ने कहा कि सरकार ने रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए अपने व्यय में भी काफी बढ़ोतरी की है। रेलवे के लिए ग्रॉस बजटरी सपोर्ट (जीबीएस) 2013-14 में 29,055 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026-27 में 2.78 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
इस बढ़े हुए निवेश का उद्देश्य रेलवे नेटवर्क का विस्तार करना, सुरक्षा बढ़ाना, नई तकनीक अपनाना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है।
उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू फंडिंग के कारण भारतीय रेलवे को बुनियादी ढांचे और आधुनिकीकरण में अधिक निवेश करने का अवसर मिला है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहा है।
रेल मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा दे रहा है। भारत ने स्विट्जरलैंड, जर्मनी, रूस और स्पेन जैसे देशों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों के अंतर्गत हाई-स्पीड रेल, मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट, आईटी सॉल्यूशंस और रेलवे मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जा रहा है।
पिछले एक दशक में भारत ने रेलवे क्षेत्र में एक मजबूत निर्माण आधार भी स्थापित किया है। अब देश में लोकोमोटिव, कोच, वैगन और ट्रैक्शन मोटर, ट्रांसफार्मर और मेट्रो सिस्टम सहित विभिन्न प्रकार के उपकरण बनाए जा रहे हैं।
इन उत्पादों का निर्यात संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित कई विकसित और विकासशील देशों में किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, भारत का कुल रेलवे निर्यात 2016-17 से जनवरी 2026 तक 3.35 अरब डॉलर (लगभग 26,000 करोड़ रुपए) रहा है।
निर्यात में यह वृद्धि भारत के रेलवे निर्माण क्षेत्र की मजबूती और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती पहचान को दर्शाती है।