तेलंगाना: एयरोस्पेस हब की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं, मंत्री डी. श्रीधर बाबू का बयान
सारांश
Key Takeaways
- तेलंगाना को एक प्रमुख एयरोस्पेस हब बनाने के लिए सरकार का प्रयास।
- हैदराबाद में 42,000 नए विमानों की आवश्यकता का अनुमान।
- 1,500 से अधिक एमएसएमई वैश्विक एयरोस्पेस दिग्गजों को पुर्जे की आपूर्ति कर रहे हैं।
- ड्रोन, पुन: उपयोग योग्य रॉकेट, और अन्य प्रौद्योगिकियों पर जोर।
- घरेलू परीक्षण और प्रमाणन अवसंरचना का विकास आवश्यक।
हैदराबाद, १७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राज्य के उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने शुक्रवार को जानकारी दी कि सरकार तेलंगाना को देश का एक प्रमुख एयरोस्पेस हब बनाने के लिए सुनियोजित कदम उठा रही है, जो भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप होगा।
उन्होंने बताया कि बोइंग और एयरबस के अनुमान के अनुसार, अगले 20 वर्षों में 42,000 नए विमानों की आवश्यकता का अनुमान है, जिसके चलते हैदराबाद को इस अवसर का लाभ लेने के लिए तैयार किया जा रहा है।
हैदराबाद में एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, उन्होंने ड्रोन, पुन: उपयोग योग्य रॉकेट, एआई-आधारित एवियोनिक्स, 3डी प्रिंटिंग, और उन्नत सामग्रियों जैसी भविष्य-संचालित प्रौद्योगिकियों को एयरोस्पेस क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना इसके लिए तैयारी कर रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि हैदराबाद में 1,500 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पहले से ही वैश्विक एयरोस्पेस कंपनियों को पुर्जे की आपूर्ति कर रहे हैं, जिससे 'मेड इन तेलंगाना' ब्रांड को मजबूती मिल रही है। उन्होंने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचे, एयरोस्पेस पार्कों, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और कुशल प्रतिभाओं के भंडार के साथ, तेलंगाना वैश्विक एयरोस्पेस निवेश को आकर्षित कर रहा है।
मंत्री ने उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और नवप्रवर्तकों को हैदराबाद से एयरोस्पेस के भविष्य को आकार देने में राज्य सरकार के साथ सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया।
श्रीधर बाबू ने घरेलू परीक्षण और प्रमाणन अवसंरचना विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि विदेशी सुविधाओं पर निर्भरता लागत बढ़ाती है और उत्पादन में 18 से 24 महीने की देरी होती है। उन्होंने हैदराबाद में विश्वस्तरीय प्रमाणन प्रणाली स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आह्वान किया।
मंत्री ने एयरोस्पेस क्षेत्र में वैश्विक चुनौतियों और परिवर्तनों के अनुकूल एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अनुसंधान एवं विकास, उन्नत विनिर्माण और प्रमाणन एवं अनुपालन को एकीकृत करने में सक्षम क्षेत्र एयरोस्पेस में वैश्विक नेता बनेंगे। राज्य सरकार ऐसे एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
मंत्री ने कहा कि एयरोस्पेस अब केवल विनिर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसी राष्ट्र की रणनीतिक शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है। जहां एक समय अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों का इस क्षेत्र पर वर्चस्व था, वहीं अब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।