घुमंतू समुदाय के लिए महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, त्रिस्तरीय समितियों से मिलेगा न्याय

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घुमंतू समुदाय के लिए महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, त्रिस्तरीय समितियों से मिलेगा न्याय

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने घुमंतू और विमुक्त समुदाय के विकास व अत्याचार रोकने के लिए राज्य, जिला और उपमंडल स्तर पर त्रिस्तरीय समितियां गठित की हैं। मंत्री अतुल सावे की अध्यक्षता में यह नई व्यवस्था सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्रों तक पहुंचाएगी।

Key Takeaways

  • महाराष्ट्र सरकार ने घुमंतू और विमुक्त समुदाय के लिए राज्य, जिला और उपमंडल — तीन स्तरों पर विशेष समितियां गठित की हैं।
  • मंत्री अतुल सावे राज्य स्तरीय समिति के अध्यक्ष होंगे; समिति में कम से कम एक महिला गैर-सरकारी सदस्य अनिवार्य है।
  • समितियां अत्याचार की घटनाओं पर तत्काल एफआईआर दर्ज कराने और पीड़ितों को कानूनी व चिकित्सा सहायता दिलाने के लिए जिम्मेदार होंगी।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं — सभी क्षेत्रों में इस समुदाय तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना लक्ष्य है।
  • महाराष्ट्र में घुमंतू समुदाय की आबादी अनुमानित 1.5 करोड़ से अधिक है, जो दशकों से संस्थागत उपेक्षा का शिकार रही है।
  • यह निर्णय 2024 विधानसभा चुनाव में महायुति की जीत के बाद वंचित तबकों के लिए सरकार की नीतिगत प्रतिबद्धता का हिस्सा माना जा रहा है।

मुंबई, 24 अप्रैल। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के घुमंतू और विमुक्त समुदाय के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए त्रिस्तरीय समिति प्रणाली लागू की है। अन्य पिछड़ा वर्ग बहुजन कल्याण मंत्री अतुल सावे ने घोषणा की कि यह समितियां राज्य, जिला और उपमंडल — तीनों स्तरों पर गठित की गई हैं, जो इस समुदाय के खिलाफ होने वाले अत्याचारों पर त्वरित कार्रवाई करेंगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाएंगी।

क्यों जरूरी था यह फैसला?

भारत में घुमंतू और विमुक्त जनजातियां दशकों से सामाजिक उपेक्षा, पुलिस उत्पीड़न और सरकारी योजनाओं से वंचित रहने की समस्या झेलती आई हैं। रेणके आयोग (2008) की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था कि ये समुदाय देश के सबसे वंचित तबकों में से एक हैं। महाराष्ट्र में अनुमानित 1.5 करोड़ से अधिक घुमंतू और विमुक्त समुदाय के लोग निवास करते हैं, फिर भी उनकी शिकायतों के निवारण के लिए कोई संस्थागत ढांचा नहीं था। यह नई व्यवस्था उसी खालीपन को भरने का प्रयास है।

तीन स्तरों पर समिति की संरचना

राज्य स्तरीय समिति की अध्यक्षता स्वयं मंत्री अतुल सावे करेंगे। इसमें विभाग के सचिव सदस्य होंगे और पुणे स्थित ओबीसी बहुजन कल्याण निदेशालय के निदेशक सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे। संयुक्त सचिव या उप सचिव के साथ-साथ घुमंतू समुदाय के लिए कार्यरत छह गैर-सरकारी सदस्य भी शामिल होंगे, जिनमें कम से कम एक महिला सदस्य अनिवार्य रूप से होगी।

जिला स्तरीय समिति की बागडोर जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के हाथ में होगी। इसमें पुलिस आयुक्त या पुलिस अधीक्षक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला जाति सत्यापन अधिकारी और सहायक निदेशक (ओबीसी बहुजन कल्याण) सम्मिलित होंगे। समुदाय का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए चार गैर-सरकारी सदस्य भी जोड़े जाएंगे।

उपमंडल स्तरीय समिति की अध्यक्षता उपमंडल अधिकारी या उप जिला कलेक्टर करेंगे। इसमें उपमंडल पुलिस अधिकारी, तहसीलदार, समूह विकास अधिकारी, समूह शिक्षा अधिकारी और संबंधित थाने के अधिकारी शामिल होंगे। साथ ही दो गैर-सरकारी सदस्य खानाबदोश और विमुक्त समुदाय से लिए जाएंगे।

समितियों के प्रमुख कार्य और दायित्व

इन समितियों का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व होगा — अत्याचार की घटनाओं पर तत्काल संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज कराना, पीड़ितों को चिकित्सा और कानूनी सहायता दिलाना और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना।

इसके अलावा समुदाय में कानूनी जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे। स्वास्थ्य जांच शिविर, सरकारी योजनाओं की जानकारी, अंधविश्वास उन्मूलन और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना भी इनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों का स्कूलों में नामांकन सुनिश्चित करना और छात्रवृत्ति जैसी शैक्षिक योजनाओं का लाभ दिलाना विशेष लक्ष्य होगा। सड़क, बिजली, पानी और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा रोजगार योजनाओं के जरिए आर्थिक सशक्तीकरण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

व्यापक संदर्भ और राजनीतिक महत्व

गौरतलब है कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार ने वंचित तबकों के लिए कई नीतिगत घोषणाएं की हैं। घुमंतू समुदाय के लिए यह निर्णय उसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। यह भी उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्तर पर विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजाति आयोग लंबे समय से इन समुदायों के लिए संस्थागत तंत्र की मांग करता रहा है।

आलोचकों का कहना है कि केवल समितियों के गठन से बदलाव नहीं आएगा — असली परीक्षा इनके क्रियान्वयन में होगी। अतीत में भी ऐसी कई समितियां बनाई गई हैं जो कागजों तक सीमित रह गईं। इसलिए इन समितियों की नियमित बैठकें, जवाबदेही तंत्र और समयबद्ध समीक्षा सुनिश्चित करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये समितियां जमीनी स्तर पर कितनी सक्रिय होती हैं और घुमंतू समुदाय के जीवनस्तर में वास्तविक सुधार किस गति से आता है।

Point of View

यह व्यवस्था भी पिछली कई घोषणाओं की तरह फाइलों में बंद रह सकती है।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

महाराष्ट्र में घुमंतू समुदाय के लिए कौन सी नई व्यवस्था लागू की गई है?
महाराष्ट्र सरकार ने घुमंतू और विमुक्त समुदाय के विकास और अत्याचार रोकने के लिए राज्य, जिला और उपमंडल स्तर पर त्रिस्तरीय समितियां गठित की हैं। इन समितियों का काम शिकायत निवारण, एफआईआर दर्ज कराना और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
इन समितियों की अध्यक्षता कौन करेगा?
राज्य स्तरीय समिति की अध्यक्षता मंत्री अतुल सावे करेंगे, जिला स्तर पर जिला कलेक्टर और उपमंडल स्तर पर उपमंडल अधिकारी या उप जिला कलेक्टर अध्यक्ष होंगे। इन समितियों में गैर-सरकारी सदस्यों को भी शामिल किया गया है।
घुमंतू और विमुक्त समुदाय की मुख्य समस्याएं क्या हैं?
इस समुदाय को पुलिस उत्पीड़न, सामाजिक भेदभाव, सरकारी योजनाओं से वंचित रहना और शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रेणके आयोग (2008) ने इन्हें देश के सबसे वंचित समुदायों में गिना था।
इन समितियों से घुमंतू समुदाय को क्या फायदा होगा?
इन समितियों के माध्यम से अत्याचार की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई, कानूनी व चिकित्सा सहायता, शिक्षा में नामांकन और रोजगार योजनाओं का लाभ मिलेगा। साथ ही सड़क, बिजली, पानी और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएंगी।
महाराष्ट्र में घुमंतू समुदाय की कितनी आबादी है?
महाराष्ट्र में घुमंतू और विमुक्त समुदाय की अनुमानित आबादी 1.5 करोड़ से अधिक है। यह समुदाय लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा रहा है।
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