महिलाओं की गरिमा पर विपक्ष का हमला, मोहन यादव ने किया जोरदार विरोध
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक का खारिज होना एक गंभीर मुद्दा है।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए।
- महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
- विपक्ष की नीतियों पर सवाल उठाए गए हैं।
- महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह प्रयासरत हैं।
भोपाल, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा ने लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के खारिज होने पर एक प्रेस वार्ता में विपक्ष को घेरा।
भोपल स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में 10 दिनों तक कांग्रेस के खिलाफ जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की।
महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के खारिज होने पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "हमारे लोकतंत्र में जो घटना घटी, वह एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गई थी। हमने इस घटना को, इसके कारणों को और इसे एक त्रासदी में बदलने के लिए जिम्मेदार लोगों को बहुत करीब से देखा है। हम सभी ने द्रौपदी के चीरहरण के बारे में सुना था, लेकिन महिलाओं के साथ जो हुआ और जिस तरह से उनकी गरिमा को ठेस पहुंची, वह सब हमने संसद में हुई इस घटना में अपनी आंखों से देखा है।"
मोहन यादव ने कहा, "इस विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने सभी दलों को एक खुला पत्र लिखा था और समर्थन देने की बात कही थी। जो विपक्ष 2023 में इस विधेयक का समर्थन कर रहा था, वह मौकापरस्ती का सबसे बड़ा उदाहरण पेश कर रहा है।"
मोहन यादव ने डीएमके और प्रियंका गांधी पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि डीएमके ने केवल चुनाव जीतने के लिए अफवाहें फैलाई हैं। वहीं, 'नारी हूं लड़ सकती हूं' का नारा देने वाली नेता ने नारी को अधिकार दिलाने वाले बिल का विरोध करके पाप किया है।
हेमंत खंडेलवाल ने कहा, "लोकसभा में जो हुआ, वह केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि आधी आबादी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा था। हालांकि, विपक्ष और कांग्रेस ने इसे पारित नहीं होने दिया।"
रेखा वर्मा ने कहा, "नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर लोकसभा में चर्चा हुई, लेकिन इस विधेयक को विपक्ष ने पारित नहीं होने दिया। 70 साल से इस देश की नारी अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह महिलाओं की भागीदारी के लिए प्रयासरत हैं। देश में आधी आबादी महिलाओं की है, इसलिए उन्हें अधिकार मिलना चाहिए।"